Politics on Corona: कोरोना महामारी में अब सारा दोष जनता पर डाला जा रहा है। लोग जान जाने के डर से घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने पत्रकार वार्ता कर बताया कि देश के 50 फीसद लोग मास्क ठीक से नहीं लगा रहे हैं। उनका यह बयान सरकार की हताशा को दर्शाता है।
Politics on Corona: गांवों में भी गहराया रोजी रोटी का संकट
चरण सिंह राजपूत
Politics on Corona: कोरोना महामारी पर मोदी सरकार का रवैया ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ जैसा है। कोरोना की दूसरी लहर में गनीमत यह है कि सरकार के हाथ मुस्लिमों के खिलाफ कुछ नहीं मिल रहा है। नहीं तो मुस्लिम समाज ही इस महामारी के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया जाता।
जैसा कि आप देख ही चुके हैं कि पहली लहर में संक्रमण के लिए तब्लीगी जमात को ही दोषी ठहरा दिया गया था। शहरों और गांवों में मुस्लिम समाज के सब्जी और फल बेचने वालों को भी निशाना बनाया गया था।
गांवों के लोग अधिक भयभीत
अब तो गांवों में भी कोरोना से बढ़ रही मौतों से लोग इतने भयभीत हैं कि तमाम परेशानियां झेलने के बावजूद अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। रोजी-रोटी के लिए भी मजबूर लोग ही बाहर निकल रहे हैं। इन लोगों को तो इस बात का भी एहसास नहीं होगा कि देश में रोजी-रोटी का संकट इतना गहरा गया है कि कितने लोगों के पास मास्क लेने के लिए भी पैसे न हों।
फिर भी लोग विधिवत मास्क लगाए देखे जा रहे हैं। लाखों लोगों की मौत के बाद अब कोई अपनी जान से खिलवाड़ नहीं कर रहा है। हां, केंद्र सरकार लगातार लोगों की जान से खेल रही है। कभी आक्सीजन की कमी के नाम पर तो कभी रेमडिसीविर इंजेक्शन के नाम पर और कभी प्लाज्मा थेरपी के नाम पर।
दोष जनता के सिर मेढ़े जाने का क्या औचित्य?
जब खुद प्रधानमंत्री संक्रमण के मामले में कमी आने की बात स्वीकार कर रहे हैं तो सही ढंग से मास्क न लगाने का दोष जनता के सिर मेढ़े जाने का क्या औचित्य? मतलब कोरोना महामारी में मोदी सरकार की विफलता का ठीकरा जनता के सिर पर फोड़ दो।
संक्रमण में कमी मतलब कोरोना की चेन टूटना। चेन टूटना मतलब जनता का सहयोग। जब मोदी सरकार को अपनी गलतियों पर मंथन कर उन्हें सुधारना चााहिए, ऐसे में महामारी के लिए सारा दोष जनता पर मढ़ देना सरकार के मानसिक दिवालिएपन को दर्शा रहा है।
सवालों के घेरे में शीर्ष नेता
क्या कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद ब्लैक फंगस भी ठीक से मास्क न लगाने की वजह से हो रहा है? क्या अस्पतालों में भी जनता की मनमानी चल रही है? क्या प्रधानमंत्री बिना मास्क के बंगाल में लाखों की रैली को संबोधित करते हुए कोरोना की चेन तोड़ रहे थे? क्या हरिद्वार में लाखों साधु गंगा स्नान कर कोरोना पर विजय प्राप्त कर रहे थे?
क्या सांसद प्रज्ञा ठाकुर मास्क लगाने में विश्वास करती हैं? क्या उन्हें मास्क से ज्यादा गोमूत्र पर विश्वास नहीं? क्या उत्तराखंड के मुख्यमंत्री गंगा स्नान से कोरोना भगाने की बात कर मास्क पर विश्वास जता रहे थे?
लाखों लोगों की जान ले ली
जमीनी हकीकत तो यह है कि मोदी सरकार ने मनमानी ढंग से तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाकर जनता को खतरे में डाल दिया। लाखों लोगों की जान ले ली और अब जनता को ही दोषी ठहराया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में तो और गजब स्थिति है। देश में सबसे अधिक हालात खराब होने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सब कुछ सही नजर आ रहा है। वह तो उल्टे जमीनी हकीकत बताने और दिखाने वालों को धमका रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के ही भाजपा प्रमुख स्वतंत्र देव तो इन सबके भी आगे निकल गए। वह तो इन भयावह हालात में भी पिछले साल की तरह ‘मोदी ने देश को बचा लिया’ कह रहे हैं। उनके अनुसार यदि कांग्रेस की सरकार होती तो स्थिति और भयावह होती।
रोजी रोटी-ठप, अर्थव्यवस्था ठप
इन महाशय को और कितने हालात खराब करने हैं? रोजी रोटी-ठप, अर्थव्यवस्था ठप, स्वास्थ्य सेवाएं ठप। लोगों में असुरक्षा। लाखों लोगों की बलि। दूसरी लहर खत्म नहीं हुई कि तीसरी लहर की चिंता। कोरोना महामारी खत्म नहीं हुई कि ब्लैक फंगस महामारी।
वैक्सीन लगवाने के लिए चिल्ला रहे हैं और वैक्सीन की भी किल्लत। वैसे भी वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को जब पैसे नहीं दिए जाएंगे तो वैक्सीन आएगी कहां से? कुछ तो शर्म करो। चुल्लू भर पानी में डूब मरो। क्या अब भी कांग्रेस की सरकार चल रही है कि लोग कांग्रेस से पूछें।
गेंद अब राज्यों के पाले में डाल दी
Politics on Corona: गजब स्थिति है मोदी सरकार की। जब कोविड-19 की स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है तो गेंद अब राज्यों के पाले में डाल दी। जब देखा कि मामले कम हो रहे हैं तो प्रधानमंत्री खुद जिलाधिकारियों के साथ बैठक करने लगे।
अब जब स्थिति संभाले नहीं संभल रही है तो खुद जनता ही कोरोना संक्रमण और मौतों के लिए जिम्मेदार हो गई। इसे कहते हैं चित्त भी मेरी और पट भी मेरी। इस संदर्भ में आप क्या सोचते हैं, कमेंट करके बता सकते हैं।


