Mr. Modi: वैक्सीन के निर्यात पर सवाल से संबंधित पोस्टर लगाने वालों को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन पोस्टर लगाने वालों को तो अपनी दिहाड़ी से मतलब होता है। वे लोग तो यह भी नहीं देखते कि पोस्टर पर लिखा क्या है?
Mr. Modi: प्रवचन देते रहे, लेकिन खुद नहीं पहना मास्क
चरण सिंह राजपूत
Mr. Modi: वाह रे मोदी सरकार। सत्ता के लिए जनता माई बाप। कमियां इतनी कि न केवल लोगों की रोजी-रोटी छीन ली बल्कि लोगों को कोरोना महामारी के मुंह में झोंक दिया। आक्सीजन की कमी पूरी न कराकर लाखों लोगों को मार दिया।
मोदी लोगों को प्रवचन देते रहे कि कोरोना अभी गया नहीं। मास्क लगाकर रखो। सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखो। पर खुद लाखों की रैलियों में मास्क नहीं लगाया। न रैली में पहुंचने वाले लोगों को मास्क पहनने के लिए कहा।
आत्ममुग्धता इतनी कि …
Mr. Modi: यही नहीं, आत्ममुग्धता इतनी कि यह भी बोल गए कि देखो मेरे लिए कितने लोग आए हैं। मतलब, न केवल रैलियों में शामिल लाखों लोगों की जान को खतरे में डाल दिया, बल्कि करोड़ों लोगों को मास्क न लगाने के लिए प्रेरित भी किया। वैक्सीन बनाई गई देश के लोगों को कोरोना से बचाने के लिए। लेकिन उसे निर्यात कर दिया गया।
प्रधानमंत्री हैं कि वे अपने को दुनिया का शीर्ष नेता साबित करना चाहते हैं। हो सकता है कि ऐसा वह नोबेल प्राइस के चक्कर में कर रहे हों। तभी तो वाहवाही लूटने के लिए करोड़ों वैक्सीन विदशों में भिजवा दी। प्रधानमंत्री को यह ख्याल नहीं आया कि अपने देश में लोगों को वैक्सीन कैसे लगेगी?
ऐसे में उंगलियां तो उठेंगी ही
अब जब लोग देश में कोराना महामारी से दम तोड़ रहे हैं, तो वैक्सीन का घोर अभाव है। ऐसे में लोग तो उंगलियां उठाएंगे ही। दिल्ली में लोगों ने विदेश में वैक्सीन भेजने पर जवाब मांगा और संबंधित पोस्टर लगवा दिए। लेकिन पोस्टर चिपकाने वालों पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया। उनकी गिरफ्तारियां हुईं। यह कैसा लोकतंत्र है।
पोस्टर लगाने वालों को तो अपनी दिहाड़ी से मतलब होता है। वे लोग यह भी नहीं देखते कि पोस्टर पर लिखा क्या है? लोगों को प्रधानमंत्री से सवाल करने का भी अधिकार नहीं है। वह भी तब जब वे गलतियां नहीं, अपराध कर रहे हों।
किसने मजदूरों को दिए थे पोस्टर?
दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले में पड़ताल की तो पता चला कि आप पार्षद धीरेन्द्र कुमार के कर्मचारियों ने ये पोस्टर दिहाड़ी मजदूरों को कल्याणपुरी में लगाने के लिए दिए थे।
ठीक है मोदी जी कि आप विपक्ष के नेताओं की गलतियां निकालकर उनको चुप करा देते हैं। पर जनता की क्या गलती निकालोगे।
गिरफ्तार किए गए अधिकतर लोग जमानत कराकर घर आ गए हैं। पर अब उनकी नजरों में आपकी क्या इज्जत होगी? जब दिल्ली में इन लोगों की गिरफ्तारियां हुईं, आपको शर्म नहीं आई। बड़े विवेक की बात करते हो। लोगों को मन की बात में बड़ा प्रवचन देते हो। बड़े लोकतंत्र की बात करते हो। जरा दिल्ली पुलिस से यह तो पूछ लेते कि आखिरकार इन मजदूरों का अपराध क्या है? पूछते कैसे, यह सब आपके इशारे पर ही तो हुआ होगा।
गिरफ्तार हुए लोगों का राजनीति से कोई मतलब नहीं
सोचिए। गिरफ्तार हुए लोगों में एक 30 साल का रिक्शा चालक था। एक 61 साल का बूढ़ा जो लकड़ी का फ्रेम बनाता था। और एक 19 साल का बेरोजगार युवक था, जिसकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई है। इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल के अनुसार पूर्वी दिल्ली के मंडावली से गिरफ्तार 24 वर्षीय राहुल त्यागी को उसके परिजन जमानत पर छुड़ा लाए हैं।
राहुल त्यागी ने बताया कि 11 मई को आप पार्षद धीरेन्द्र सिंह ने इस तरह के 20 बैनर कल्याणपुरी में लगाने के लिए दिए थे। मजदूरी के छह सौ रुपये तय हुए थे। आप पार्षद ने राहुल के आरोप को नकार दिया है। हालांकि शनिवार को इसी पार्षद ने वही बात पोस्ट कर दी जो पोस्टरों में लिखी है।
वैक्सीन विदेश क्यों भेज दी?
मोदी जी, वैक्सीन विदेश क्यों भेज दी? क्या वैक्सीन विदेश में नहीं भेजी गई है? भेजी गई है तो फिर पोस्टरों या बैनरों से दिक्कत क्यों? शर्म नहीं आती जब अपनी गलतियों पर जनता से माफी मांगनी हो। ऐसे में भी लोगों की आवाज को दबाने में लग गए हो। आखिर कब तक दबाओगे लोगों की आवाज? अब यह आवाज दबने वाली नहीं है।
विपक्ष भले ही आप से सवाल न पूछ पाए। पर जनता जरूर पूछेगी। एक-एक पैसे का हिसाब लेगी। कितने लोगों को गिरफ्तार कराओगे? अब तो आपके कुछ अंधभक्तों को छोड़कर देश का हर व्यक्ति आंखों में आंखें डालकर आपसे सवाल पूछने के लिए तैयार बैठा है।
विदेश घूमने के नाम पर अरबों रुपये खर्च किए
विदेश में घूमने के नाम पर जो अरबों रुपये खर्च किए हैं। अपने निजी इस्तेमाल के लिए जो 8400 करोड़ रुपये के विशेेष विमान मंगाए हैं। कुछ भाजपा नेताओं की अय्याशी के लिए जो फाइव स्टार होटल की तरह कार्यालय बनवाया है।
अपनी अय्याशी के लिए जो सेंट्रल विस्टा बनवा रहे हो। देश की जो वैक्सीन विदेश भेजी है। कहोगे फकीर और जनता का पैसा ऐसे उड़ाओगे कि जैसे कहीं के राजा-महाराजा हो। राजा महाराजा तो अपना पैसा उड़ाते थे। ये महाशय तो जनता का पैसा ऐसे उड़ा रहे हैं जैसे इनके बाप-दादा कमाकर रख गए हैं।
निष्कर्ष
Mr. Modi: जनता के पैसों से अय्याशी करो और जनता हिसाब भी न मांगे। इसी जनता ने जमीन से उठाकर आसमान पर पहुंचाया है। तो यही जनता धूल में भी मिला देगी। क्योंकि काठ की हांडी बार बार नहीं चढती। बेहतर होगा कि आप आत्ममुग्धता से बाहर निकलें और देश के लोगों की शिकायतों पर गंभीरता से विचार करें। ऐसा नहीं करेंगे तो बंगाल जैसा हाल पूरे देश में होगा।


