समारोह का मुख्य आकर्षण ‘मेरे घर राम आएंगे’ पर आधारित प्रस्तुति रही, जिसमें कथक के पारंपरिक भावों और शास्त्रीय नृत्य की सुंदर मुद्राओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को दर्शाया गया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, भक्ति और जीवन मूल्यों का संदेश दिया। प्रस्तुति के दौरान दर्शक भावनात्मक रूप से कलाकारों से जुड़े नजर आए और उन्होंने तालियों के साथ विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
कथक के माध्यम से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का संदेश
‘अभिव्यक्ति 2026’ केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास भी रहा। कार्यक्रम में कथक की पारंपरिक शैली के साथ भावाभिव्यक्ति और संगीत का सुंदर तालमेल देखने को मिला।
‘मेरे घर राम आएंगे’ जैसी भक्तिमय प्रस्तुति के माध्यम से कलाकारों ने दर्शकों के सामने भारतीय संस्कृति की उस परंपरा को जीवंत किया, जिसमें कला को आध्यात्मिक अभिव्यक्ति और मानवीय मूल्यों के प्रसार का सशक्त माध्यम माना जाता है। विद्यार्थियों की मेहनत, अभ्यास और मंच पर उनके आत्मविश्वास ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
समारोह में प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि शास्त्रीय नृत्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह भारतीय इतिहास, परंपरा, भावनाओं और सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
मुख्य अतिथियों की उपस्थिति ने बढ़ाई समारोह की गरिमा
इस सांस्कृतिक समारोह में फरीदाबाद जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुश्री सिखा अंतिल, सर्वोदय अस्पताल के चेयरमैन डॉ. राकेश गुप्ता और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), फरीदाबाद की प्रमुख डॉ. पुनीता ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
मुख्य अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। समारोह में भारतीय कला और संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराने के महत्व को भी रेखांकित किया गया।
नृत्यस्थली के प्रथम वार्षिक समारोह में विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने यह दिखाया कि उचित मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और कला के प्रति समर्पण से युवा प्रतिभाएं अपनी सांस्कृतिक विरासत को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकती हैं।
गुरु अर्चना बिनानी के 22 वर्षों के अनुभव का मिला मार्गदर्शन
नृत्यस्थली की संस्थापक और कथक गुरु अर्चना बिनानी पिछले 22 वर्षों से अधिक समय से नृत्य शिक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने प्रसिद्ध कथक गुरु वास्वती मिश्रा के मार्गदर्शन में छह वर्षों तक कथक का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके अलावा, वह दिल्ली की शंभू महाराज कथक अकादमी से भी जुड़ी रहीं और विभिन्न प्रस्तुतियों में हिस्सा लिया।
अर्चना बिनानी का अनुभव और प्रशिक्षण के प्रति समर्पण नृत्यस्थली की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनके मार्गदर्शन में अब तक 250 से अधिक विद्यार्थी कथक का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। संस्थान में विद्यार्थियों को शास्त्रीय नृत्य की तकनीक, लय, भाव, मुद्राओं और मंच पर प्रस्तुति देने की बारीकियों से परिचित कराया जाता है।
‘अभिव्यक्ति 2026’ में विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने उनके निरंतर अभ्यास और गुरु के मार्गदर्शन को प्रदर्शित किया। मंच पर उनकी भावपूर्ण अभिव्यक्ति और कथक के प्रति समर्पण को दर्शकों ने सराहा।
वंचित विद्यार्थियों को भी कथक प्रशिक्षण दे रही है नृत्यस्थली
नृत्यस्थली शास्त्रीय नृत्य के प्रशिक्षण के साथ सामाजिक सरोकारों को भी महत्व देता है। संस्थान की ओर से हर वर्ष पांच से छह वंचित विद्यार्थियों को निःशुल्क या रियायती शुल्क पर कथक का प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है।
यह पहल उन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो आर्थिक कारणों से शास्त्रीय नृत्य का प्रशिक्षण प्राप्त करने में कठिनाई महसूस करते हैं। इसके माध्यम से संस्थान कला को अधिक लोगों तक पहुंचाने और प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर देने का प्रयास कर रहा है।
संस्थान का मानना है कि कला और संस्कृति तक पहुंच केवल आर्थिक रूप से सक्षम लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्रतिभा को उचित प्रशिक्षण और मंच मिले, तो विद्यार्थी अपनी कला के माध्यम से समाज और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
‘अभिव्यक्ति 2026’ ने दिया नई प्रतिभाओं को मंच
नृत्यस्थली का प्रथम वार्षिक सांस्कृतिक समारोह विद्यार्थियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने और दर्शकों के सामने अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर बना। कार्यक्रम ने गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय शास्त्रीय नृत्य और सांस्कृतिक मूल्यों के महत्व को भी उजागर किया।
‘मेरे घर राम आएंगे’ की भावपूर्ण कथक प्रस्तुति ने समारोह को यादगार बना दिया। इसके साथ ही कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि भारतीय शास्त्रीय कलाओं को जीवंत बनाए रखने के लिए प्रशिक्षण, निरंतर अभ्यास और नई पीढ़ी की भागीदारी बेहद जरूरी है।
कुल मिलाकर, ‘अभिव्यक्ति 2026’ फरीदाबाद में कला, संस्कृति और आध्यात्मिकता का सुंदर उत्सव बनकर सामने आया। नृत्यस्थली और गुरु अर्चना बिनानी के प्रयासों ने न केवल विद्यार्थियों को मंच प्रदान किया, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विरासत को आगे बढ़ाने और सामाजिक समावेश के माध्यम से कला को अधिक लोगों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित की।


