Hanuman Ansh: 26 दिन की शूटिंग, वंदे भारत में मिली पंक्तियां और 15 मिनट में तैयार धुन ने फिल्म के संगीत को खास बना दिया।
Hanuman Ansh: 26 कम बजट वाली फिल्मों को लेकर बनी कई धारणाओं को चुनौती
Hanuman Ansh: इंफोपोस्ट/नई दिल्ली
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!‘हनुमान अंश’ की सफलता ने कम बजट वाली फिल्मों को लेकर बनी कई धारणाओं को चुनौती दी है। आध्यात्मिक विषय पर बनी यह फिल्म पहले धीमी रफ्तार से आगे बढ़ी, लेकिन बाद में दर्शकों की चर्चा और सकारात्मक प्रतिक्रिया ने इसकी कमाई को तेजी से बढ़ाया। फिल्म की कहानी नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ी है। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की यह फिल्म 7 अगस्त 2026 को रिलीज हुई थी।
फिल्म की खासियत केवल इसकी कहानी या बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन नहीं है। इसके संगीत को भी कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। फिल्म में करीब 11 भजनों और गीतों का इस्तेमाल किया गया है। इनका उद्देश्य केवल दृश्यों के पीछे संगीत देना नहीं, बल्कि कहानी के भाव और पात्रों की आध्यात्मिक यात्रा को मजबूत करना रहा। इसी वजह से संगीत में भक्ति के साथ लोक संस्कृति की झलक भी दिखाई देती है।
वंदे भारत में मिली गीत की पंक्तियां
फिल्म के चर्चित गीत ‘सासा हाले’ की कहानी इसके संगीत निर्माण से जुड़े सबसे दिलचस्प प्रसंगों में शामिल है। फिल्म की टीम के मुताबिक इसकी पंक्तियां निर्देशक विशाल चतुर्वेदी को दतिया के पीताम्बरा पीठ में मिली एक पुस्तक से प्राप्त हुई थीं। बताया गया कि यह रचना गुरु गोरक्षनाथ की परंपरा से जुड़ी मानी जाती है और इसका संबंध योग तथा कुंडलिनी साधना से बताया जाता है। गीत को फिल्म के आध्यात्मिक वातावरण के अनुरूप संगीत में ढाला गया। गीत को पारंपरिक रचना के रूप में भी सूचीबद्ध किया गया है।
इस गीत के निर्माण का अगला हिस्सा और भी रोचक है। निर्देशक ने ट्रेन यात्रा के दौरान संगीतकार साधु को गीत की पंक्तियां भेजीं। इसके बाद संगीतकार ने कथित तौर पर महज 15 मिनट में गिटार पर इसकी धुन तैयार कर दी। रिकॉर्डिंग कर उसे टीम तक भेजा गया। इस तरह यात्रा के दौरान शुरू हुआ प्रयोग फिल्म के प्रमुख संगीत अंशों में शामिल हो गया। यह प्रसंग बताता है कि सीमित संसाधनों के बीच भी रचनात्मकता किस तरह काम कर सकती है।
26 दिन में पूरी हुई शूटिंग
‘हनुमान अंश’ की शूटिंग भी कम समय में पूरी करने की चुनौती सामने थी। टीम के मुताबिक फिल्म की पूरी शूटिंग महज 26 दिनों में पूरी की गई। सीमित बजट के कारण हर दिन और हर संसाधन का इस्तेमाल सोच-समझकर करना पड़ा। इसके बावजूद निर्माताओं ने संगीत को फिल्म की कमजोरी नहीं बनने दिया। यही कारण है कि गीतों की संख्या और उनकी कहानी में भूमिका दोनों पर विशेष ध्यान दिया गया।
फिल्म के संगीत में बुंदेली और अवधी रंग के साथ पुराने दौर की अनुभूति पैदा करने की कोशिश की गई। टीम ने 1930 और 1940 के दशक की संगीतात्मक फील को भी बनाए रखने का प्रयास किया। इसका मकसद फिल्म के समय, परिवेश और आध्यात्मिक माहौल को एक साथ जोड़ना था। संगीत की प्रोडक्शन प्रक्रिया में भी उपलब्ध साधनों का अधिकतम इस्तेमाल किया गया।
भक्ति गीत बने कहानी का हिस्सा
Hanuman Ansh: फिल्म में नीम करोली बाबा का किरदार निभाने वाले कलाकार को गीत गाते हुए दिखाने के बजाय उन्हें भजनों को सुनते और महसूस करते हुए प्रस्तुत किया गया। इससे संगीत को किरदार की अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया गया। यानी भजन केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि कथा के भावनात्मक और आध्यात्मिक हिस्से को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल हुए।
फिल्म की सफलता को लेकर इसकी टीम ‘नीयत’ और कहानी के प्रति ईमानदारी को महत्वपूर्ण मानती है। ‘हनुमान अंश’ की यात्रा भी इसकी मिसाल है। शुरुआती दिनों में फिल्म की कमाई बेहद सीमित रही, लेकिन तीसरे सप्ताह के बाद इसके प्रदर्शन में बड़ा बदलाव आया। उपलब्ध बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के अनुसार फिल्म ने बाद के हफ्तों में तेज बढ़त दर्ज की और सितंबर में भी सिनेमाघरों में इसकी मजबूत मौजूदगी बनी रही।


