Masood Azhar: FATF से पहले पाकिस्तान का दांव
Masood Azhar: पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को अपनी नई मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया है। FIA की 2026 की रेड बुक में उसका नाम है।
Masood Azhar: 70 लाख पाकिस्तानी रुपये के इनाम की घोषणा
INFOPOST/Masood Azhar
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मसूद अजहर के बारे में जानकारी देने पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये के इनाम की घोषणा की गई है। यह कदम अक्टूबर में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की पूर्ण बैठक से पहले उठाया गया है।
मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान का यह कदम इसलिए भी सवालों के घेरे में है क्योंकि इस्लामाबाद लंबे समय से दावा करता रहा है कि वह पाकिस्तान में नहीं है। 2021 से पाकिस्तान का आधिकारिक रुख रहा है कि अजहर अफगानिस्तान चला गया है। हालांकि भारतीय खुफिया एजेंसियों के तकनीकी विश्लेषण का हवाला देते हुए रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वह सिंध प्रांत के नवाबशाह में छिपा हो सकता है।
इनाम की रकम क्यों बढ़ाई गई?
FIA ने करीब पांच साल पहले मसूद अजहर की जानकारी देने के लिए 50 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की थी। अब नई रेड बुक में यह राशि बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दी गई है। पाकिस्तान ने उसे फरार घोषित करते हुए अपनी मोस्ट वांटेड सूची में जगह दी है। FIA की वेबसाइट भी 2026 की रेड बुक को हाई-प्रोफाइल मोस्ट वांटेड आतंकवादियों की सूची के रूप में प्रदर्शित करती है।
इस कार्रवाई का समय खास महत्व रखता है। FATF आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए देशों की व्यवस्थाओं का आकलन करता है। ऐसे में पाकिस्तान की ओर से मसूद अजहर जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठन के प्रमुख को आधिकारिक रूप से मोस्ट वांटेड सूची में रखना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कार्रवाई दिखाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान को आशंका है कि उस पर दोबारा कड़ी निगरानी या ग्रे लिस्ट में वापसी का दबाव बन सकता है।
26/11 के आरोपियों पर भी कार्रवाई का दावा
FIA की नई रेड बुक में 26/11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े 19 लोगों के नाम भी शामिल बताए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार इन लोगों पर हमलावरों को अलग-अलग तरह की सहायता देने के आरोप हैं। इनमें आर्थिक मदद करने वालों के अलावा उन लोगों का भी जिक्र है जिन्होंने हमलावरों के लिए इस्तेमाल की गई नौकाओं की व्यवस्था या संचालन में मदद की थी।
रिपोर्ट के अनुसार इन 19 में से 17 लोगों की तस्वीरें और मुंबई हमले में उनकी कथित भूमिकाओं का विवरण सूची में मौजूद है। वहीं दो लोगों के मामले में तस्वीरें, लश्कर-ए-तैयबा से संबंध और हमले में उनकी भूमिका से संबंधित विस्तृत जानकारी हटा दी गई है। उनके नाम हालांकि सूची में बने हुए हैं। यह बदलाव भी पाकिस्तान की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े करता है।
पाकिस्तान के दावे पर उठते सवाल
मसूद अजहर का नाम भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों से जुड़ा रहा है। जैश-ए-मोहम्मद का नेतृत्व करने वाले अजहर को लेकर भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाता रहा है। इसके विपरीत पाकिस्तान लगातार यह कहता आया है कि वह देश में मौजूद नहीं है और अफगानिस्तान में छिपा हुआ है।
अब FATF की बैठक से ठीक पहले अजहर को मोस्ट वांटेड सूची में शामिल करना और इनाम की रकम बढ़ाना पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी नीति पर बहस को फिर तेज कर सकता है। असली सवाल यह है कि क्या यह कदम वास्तविक गिरफ्तारी और आतंकवादी नेटवर्क पर कार्रवाई में बदलेगा या अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगा। FATF के आकलन में भी यही देखा जाएगा कि पाकिस्तान की कार्रवाई कितनी प्रभावी और वास्तविक है।


