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IHW: राष्ट्रीय रोगी चार्टर की जोरदार मांग उभरी

infopost September 11, 2026
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IHE: IHW Council के नेशनल लीडरशिप राउंडटेबल में स्वास्थ्य नेताओं, नीति निर्माताओं और रोगी वकालत समूहों ने रोगी की आवाज़ को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय रोगी चार्टर की मांग की। चर्चा में महंगी उपचारों तक पहुंच, रोगी प्रतिनिधित्व, समय पर स्क्रीनिंग और समान तथा सुलभ देखभाल को प्रमुख मुद्दा बताया गया, और इन सिफारिशों को 6th Patient First Summit 2026, मुंबई में 23 अक्टूबर को आगे बढ़ाया जाएगा।

IHW: राउंडटेबल का मुख्य निष्कर्ष और चिंताएँ

इंफोपोस्ट न्यूजडेस्क


IHW: Integrated Health and Wellbeing (IHW) Council ने Indian Medical Parliamentarians Forum (IMPF) के सहयोग से नेशनल लीडरशिप राउंडटेबल ऑन पेशेंट सेंट्रिसिटी आयोजित किया। इस बैठक में वरिष्ठ क्लीनिशियन्स, नीति विशेषज्ञ, रोगी वकालत समूह और फार्मास्यूटिकल नेता शामिल हुए और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य नीति की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

बैठक में प्रमुख चिंताएँ महंगी और लक्षित उपचारों तक पहुंच की कठिनाइयाँ, रोगी प्रतिनिधित्व के अंतर, नवजात स्क्रीनिंग की सीमाएँ और दिव्यांगता के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के रूप में उभरीं। प्रतिभागियों ने रोगियों और देखभालकर्ताओं को दीर्घकालिक देखभाल का अभिन्न हिस्सा बताया और प्रारंभिक पहचान तथा हस्तक्षेप पर बल दिया।

प्रमुख सिफारिशें और 10X प्रिंसिपल के स्तंभ

चर्चा IHW Council के 10X Principle of Patient First Care के पांच स्तंभों के चारों ओर संरचित थी: Availability, Accessibility, Innovation, Quality of Care और Shared Decision Making. प्रतिभागियों ने इन सिद्धांतों को नीति, कार्यक्रम और सेवाओं के डिजाइन व वितरण में लगातार प्रतिबिंबित करने की बात कही।

राउंडटेबल में सुझाई गई सिफारिशों में महंगे उपचारों के लिए सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का तालमेल, भारतीय रोगियों के लिए तेजी से क्लिनिकल ट्रायल पहुँच, पैशेंट नेविगेटर प्रोग्राम्स का विस्तार, नवजात और दुर्लभ रोगों की स्क्रीनिंग का स्केल-अप और उच्च-लागत बायोलॉजिक्स के जेनेरिक संस्करणों के लिए कड़े सुरक्षा निरीक्षण शामिल हैं। प्रतिभागियों ने Ayushman Bharat और CGHS जैसे सरकारी कार्यक्रमों में इन उपचारों के समावेश पर भी ज़ोर दिया।

नेतृत्व की बातें

Mr. Kamal Narayan, CEO, IHW Council ने कहा कि “Healthcare must be designed around the patient. Whether we plan, build, regulate or facilitate healthcare, the patient must remain at the centre. A strong patient-first approach can make healthcare more efficient, effective, accessible and affordable for everyone.” यह स्पष्ट करता है कि नीति निर्माण में रोगी केंद्रित सोच को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

Dr. Vivek Tomar, Cancer Patient Advocate and Co-Founder, ALK Positive India ने रोगियों और देखभालकर्ताओं की नीति निर्माण में भागीदारी की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा, “Cancer care cannot be determined by where a patient lives or what a patient can afford. Patients need timely access to the right therapies, affordable medicines and clinical trials, irrespective of their location or economic background. Patients and caregivers must also have a meaningful place in policymaking, so that healthcare decisions reflect the realities of those living with disease.”

नीतिनिर्माताओं का दृष्टिकोण

Dr. Shivaji Kalge, Member of Parliament (Lok Sabha) from Latur और Indian Medical Parliamentarians Forum के सदस्य, जिन्होंने राउंडटेबल में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया, ने कहा कि नीति निर्माताओं की जिम्मेदारी है कि वे जमीनी हकीकतों को सरकार की नीतियों में प्रतिबिंबित करें। उन्होंने रोगियों, देखभालकर्ताओं और स्वास्थ्य पेशेवरों की चिंताओं को नीतियों में शामिल करने पर ज़ोर दिया।

Dr. Avinash, DADG, NCD & Patient Safety Division, Directorate General of Health Services, Ministry of Health and Family Welfare, Government of India ने रोकथाम और स्वास्थ्य संवर्धन के महत्व को रेखांकित किया और यह बताया कि नेशनल हेल्थ मिशन के तहत 27 से अधिक राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम इन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। राउंडटेबल में कैंसर केयर और स्क्रीनिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर सरकार के प्रयासों पर भी चर्चा हुई।

कैंसर बोझ और रोकथाम

राउंडटेबल में ऑनकोलॉजिस्टों ने बताया कि भारत में प्रति वर्ष 1.5 से 1.6 मिलियन नए कैंसर मामले दर्ज होते हैं और अगले दो दशकों में यह बोझ दोगुना होने का अनुमान लगाया गया है। प्रतिभागियों ने तंबाकू, मोटापा और प्रदूषण को प्रमुख रोकने योग्य जोखिम कारक बताया और रोगनिदान के साथ-साथ रोकथाम पर भी बल दिया।

इस संदर्भ में विशेषज्ञों ने कहा कि रोग निवारण, समय पर स्क्रीनिंग और उपचार के साथ लगातार फॉलो-अप आवश्यक हैं, ताकि बढ़ते रोगभार से निपटा जा सके।

नवजात स्क्रीनिंग व न्यूरोविकास संबंधी ज़रूरतें

प्रतिभागियों ने बताया कि देखभाल यात्रा की शुरूआत में ही अंतर हैं, जिनमें निजी शहरी अस्पतालों के बाहर नवजात स्क्रीनिंग सीमित होना एक प्रमुख कमी के रूप में सामने आया। उन्होंने समय पर पहचान और हस्तक्षेप की महत्ता पर ज़ोर दिया।

Dr. Shafali Gulati, Child Neurology and Neurodevelopment ने कहा, “Neurodevelopmental disorders, including autism and other neurological conditions, need to be recognised as an important public health priority. These conditions require timely identification, early intervention and continued support across the lifespan. Healthcare systems must therefore look beyond diagnosis and treatment and also address the needs of families and caregivers who remain an integral part of long-term care.”

आगे की कार्रवाई और समिट

राउंडटेबल की चर्चा ने एक औपचारिक नेशनल पेशेंट चार्टर की आवश्यकता पर बल दिया, जिसे रोगी वकालत समूहों द्वारा सीधे आकार दिया जाए। प्रतिभागियों ने माना कि एक निर्धारित चार्टर स्वास्थ्य नीति में रोगी की आवाज़ को स्थायी रूप से दृढ़ करेगा।

यह राउंडटेबल 6th Patient First Summit 2026 तक की चर्चाओं की पहली कड़ी थी। इस समिट को मुंबई में 23 अक्टूबर को “Redefining Healthcare: Where Every Patient Matters” विषय के तहत आयोजित किया जाएगा और राउंडटेबल की सिफारिशें वहीं आगे बढ़ाई जाएँगी।

निष्कर्ष

राउंडटेबल में रोगियों के प्रतिनिधित्व, महंगी थेरैपियों तक पहुँच, प्रारंभिक स्क्रीनिंग और समावेशी स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी चुनौतियों पर व्यापक सहमति बनी। प्रतिभागियों ने नेशनल पेशेंट चार्टर तथा नीतिगत सुधारों के माध्यम से रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य नीतियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया और इन सिफारिशों को आगे बढ़ाने के लिए 6th Patient First Summit 2026 को अगले चरण के रूप में चिन्हित किया।

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