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Mithila: मधुबनी कला में श्रीराम की छवियां

Shrikant Singh Shrikant Singh June 11, 2026
Mithila

Arun MauryaMithila: मिथिला सिर्फ एक भू-भाग नहीं, एक भाव है। यह वह पावन धरती है जहाँ प्रेम की सबसे कोमल और दिव्य कहानी रची गई।

Mithila: जहाँ पहली बार राम और सीता के नयन मिले

Mithila: राजा जनक की नगरी जनकपुर, जहाँ राम की डगर सीता के द्वार तक पहुँची। वहीं जनक वाटिका की वह पुष्पवाटिका, जहाँ पहली बार राम और सीता के नयन मिले। ऋषि विश्वामित्र के साथ पुष्प चुनने आए राम की दृष्टि जब सीता पर पड़ी, तो नियति ने दो युगों को एक सूत्र में बांध दिया। मिथिला से राम का यह संबंध केवल विवाह का नहीं, बल्कि आत्मा और श्रद्धा का बंधन है। यह प्रेम का वह काव्य है जो हर युग में गाया गया, वह भक्ति का संगीत है जो समय और स्थान की सीमाओं से परे है।

मिथिला के लोगों के रोम-रोम में प्रभु श्रीराम बसते हैं। यहाँ की हवा में राम-नाम की गूंज है, यहाँ की मिट्टी में सीता-राम के चरणों की धूल है। इस अगाध प्रेम की सबसे सजीव और रंगीन अभिव्यक्ति हमें मिथिला की विश्वप्रसिद्ध मधुबनी चित्रकला में मिलती है। यहाँ का हर कलाकार अपनी तूलिका से राम की महिमा का गुणगान करता है। ये चित्र केवल कागज पर उकेरी रेखाएँ नहीं हैं, ये भक्ति में डूबे हृदय की प्रार्थनाएँ हैं।

प्राकृतिक रंगों की पवित्रता और हाथों की सादगी

Mithila: मधुबनी चित्रकला में रामकथा को कलाकारों ने जिस श्रद्धा और विस्तार से चित्रित किया है, वह अद्वितीय है। प्राकृतिक रंगों की पवित्रता और हाथों की सादगी से रचे गए इन चित्रों में संपूर्ण रामायण सजीव हो उठती है। हल्दी, नीम, टेसू के फूल और गोबर से बने रंगों में जब कलाकार अपनी भावनाओं को घोलते हैं, तो कैनवास पर केवल दृश्य नहीं, एक युग अवतरित होता है।

इन चित्रों में प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव है तो अयोध्या का उल्लास भी। सीता स्वयंवर का वह अद्भुत क्षण है जब राम ने शिव धनुष तोड़ा और जनकपुर जय-जयकार से गूंज उठा। जनक वाटिका में राम-सीता का प्रथम मिलन चित्रित करते समय कलाकारों की तूलिका भी लजा जाती है। उस दृश्य में प्रेम की जो कोमलता, आँखों की जो लज्जा और मन का जो समर्पण है, उसे मधुबनी की रेखाएँ अमर कर देती हैं।

हर प्रसंग में भावनाओं की गहराई

राम-भरत मिलाप की करुणा हो या लंका युद्ध का शौर्य, मधुबनी कलाकार हर प्रसंग को भावनाओं की गहराई से रचते हैं। हनुमान की भक्ति, लक्ष्मण का त्याग, सीता का धैर्य और रावण का अहंकार – रामायण का हर पात्र इन चित्रों में जीवंत है। कलाकार केवल घटनाओं को नहीं दर्शाते, वे राम के मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप का गुणगान करते हैं। राम का धैर्य, करुणा, वीरता और प्रेम – हर गुण इन चित्रों की महीन रेखाओं में मुखर होता है।

मधुबनी पेंटिंग की खासियत यह है कि इसमें कोई कोना खाली नहीं छोड़ा जाता। ठीक वैसे ही जैसे मिथिलावासियों के हृदय का कोई कोना राम के बिना खाली नहीं है। मछली, मोर, कमल और बेल-बूटों से सजे इन चित्रों में प्रकृति भी रामकथा का हिस्सा बन जाती है। यह दर्शाता है कि मिथिला के लिए राम केवल राजा या भगवान नहीं, बल्कि प्रकृति के कण-कण में बसे प्राण हैं।

जिनके लिए यह कला नहीं, उपासना

Mithila: आज जब दुनिया डिजिटल हो रही है, तब भी मिथिला की बेटियाँ और कलाकार अपनी परंपरा को सहेजे हुए हैं। वे अपनी उंगलियों पर खड़िया और रंग लगाकर दीवारों और कागज पर राम-नाम लिख रही हैं। उनके लिए यह कला नहीं, उपासना है। मधुबनी चित्रों के माध्यम से वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी राम की महिमा का गुणगान कर रही हैं। मिथिला की बेटियां अपने हाथों से बनी अद्भुत कला कृतियों को डिजिटल माध्यमों का प्रयोग करके दुनिया तक भी पहुंच रही हैं।

सच ही है, प्रभु श्रीराम मिथिला के लोगों के हृदय के साथ ही इस धरती के कण-कण में बसते हैं। और मधुबनी कला उस प्रेम, उस भक्ति और उस महिमा का सबसे सुंदर, सबसे रंगीन प्रमाण है। मिथिला के राम सचमुच अद्भुत हैं, क्योंकि वे केवल इतिहास में नहीं, हर कलाकार की तूलिका और हर भक्त की साँस में जीवित हैं।

Mithila1

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