Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। एनडीए और महागठबंधन—दोनों ही खेमों में सीट बंटवारे को लेकर गहमागहमी अपने चरम पर है।
Bihar Elections 2025: दिल्ली से पटना तक सियासी हलचल तेज
इंफोपोस्ट न्यूजडेस्क
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!Bihar Elections 2025: दिल्ली से लेकर पटना तक लगातार बैठकों का दौर जारी है। ताज़ा घटनाक्रम में केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम) के संरक्षक जीतनराम मांझी दिल्ली रवाना हो गए हैं। बताया जा रहा है कि वे एनडीए में सीट शेयरिंग पर चर्चा के लिए राजधानी पहुंचे हैं। हालांकि, खुद मांझी ने कहा कि उन्हें किसी बैठक की जानकारी नहीं है, लेकिन एनडीए के कई शीर्ष नेता पहले से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।
उधर, एनडीए के एक अन्य घटक आरएलएमपी (रालोसपा) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ा दी है। कुशवाहा ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा— “इधर-उधर की खबरों पर मत जाइए, वार्ता अभी पूरी नहीं हुई है। इंतजार कीजिए, अगर कोई खबर प्लांट कर रहा है तो यह छल है, धोखा है।” उनके इस बयान से साफ है कि एनडीए में सीट बंटवारे पर सहमति अभी नहीं बन पाई है और अंदरखाने घमासान जारी है।
बिहार भाजपा के कोर ग्रुप के नेता दिल्ली में
वहीं, सुबह के समय भाजपा प्रदेश इकाई से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बिहार भाजपा के कोर ग्रुप के नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह के साथ इन नेताओं की अहम बैठक होनी है। इस बैठक में उम्मीदवारों की पहली सूची पर भी चर्चा की जाएगी। भाजपा, जदयू, हम और आरएलएमपी के बीच सीटों की संख्या को लेकर अंतिम फार्मूला तय किया जा रहा है, लेकिन अभी कुछ प्रमुख सीटों पर पेच फंसा हुआ है।
एनडीए के भीतर उथल पुथल के बीच, महागठबंधन की ओर से भी तेजी दिख रही है। न्यूज़18 और आज तक की रिपोर्ट्स के मुताबिक, महागठबंधन में सीट बंटवारे पर लगभग सहमति बन गई है। सूत्रों के अनुसार, आरजेडी को 135, कांग्रेस को 55, वाम दलों को 18, वीआईपी को 6, सीपीआई(एमएल) को 20 और कुछ छोटी सहयोगी पार्टियों को 1 से 2 सीटें दी जा सकती हैहैं। हालांकि, लगभग 12 सीटों पर अब भी पेच बना हुआ है।
लालू और कांग्रेस हाईकमान के बीच फोन पर बातचीत
खबर यह भी है कि आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस हाईकमान के बीच फोन पर लंबी बातचीत हुई, जिसके बाद दोनों दलों ने बचे हुए सीट विवाद को निपटाने पर सहमति बनाई है। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस बार 2020 के मुकाबले कम सीटों पर चुनाव लड़ेगी लेकिन रणनीतिक रूप से अहम सीटों पर मजबूत उम्मीदवार उतारेगी।
वहीं, सी-वोटर सर्वे के ताज़ा नतीजे भी बिहार की सियासत में नई बहस छेड़ रहे हैं। सर्वे के मुताबिक, जनता अब न तो नीतीश कुमार को लेकर उत्साहित है और न ही ‘सुशासन बाबू’ की छवि पहले जैसी बरकरार है। जनता में बदलाव की मांग तेज होती दिख रही है और नए चेहरे की तलाश बढ़ रही है।
उम्मीदवारों की अंतिम सूची पर काम शुरू
राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से महागठबंधन को जहां लगभग 138 सीटों पर बढ़त का अनुमान बताया जा रहा है, वहीं एनडीए को 100 से कम सीटें मिलने का आकलन है। यह भी बताया जा रहा है कि कांग्रेस और आरजेडी ने अपने-अपने क्षेत्रों में उम्मीदवारों की अंतिम सूची पर काम शुरू कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए के भीतर चल रही सीट शेयरिंग की तनातनी अगर जल्द नहीं सुलझी, तो इसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है। वहीं महागठबंधन यदि अपने मतभेदों को इसी तरह नियंत्रित रख सका तो उसे शुरुआती बढ़त मिल सकती है।
कुल मिलाकर, बिहार की सियासत एक बार फिर चरम पर है। दिल्ली में बैठकों का दौर जारी है, सोशल मीडिया पर बयानबाज़ी गर्म है और जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव और भाजपा तीनों में से किसकी रणनीति चुनावी मैदान में बाजी मारेगी।


