Ramkatha7: कथा व्यास अनंत विभूषित महामंडलेश्वर स्वामी पंचमानंद जी महाराज ने कहा, भगवान श्रीराम श्रीविष्णु के नहीं, पारब्रह्म नारायण के अवतार हैं। वह कोई देवता नहीं, साक्षात परमेश्वर हैं। ब्रह्मांड की संपूर्ण व्यवस्था के वही मालिक हैं।
Ramkatha7: आम राय से हटकर भगवान श्रीराम के महत्व की व्याख्या
श्रीकांत सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!Ramkatha7: नोएडा के सेक्टर 82 स्थित ईडब्ल्यूएस पॉकेट 12 में आयोजित श्रीराम कथा के सातवें दिन कथा व्यास अनंत श्री विभूषित महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी पंचमानंद जी महाराज ने श्रीराम कथा के प्रसंगों का वर्णन करने के दौरान आम राय से हटकर भगवान श्रीराम के महत्व की व्याख्या की। जैसा कि आम राय है कि भगवान श्रीराम श्री विष्णु के अवतार हैं, इससे अलग महाराज जी ने बताया कि वह पारब्रह्म नारायण के अवतार हैं।
कथा को आगे बढ़ाते हुए महाराज जी ने कहा कि भगवान राम, लक्ष्मण, सीता और निषाद के साथ गंगा पार उतरकर मां गंगा को प्रणाम करके आगे बढ़ते हैं। प्रयागराज पहुंचकर वह त्रिवेणी में स्नान करते हैं और मुनि भारद्वाज जी के आश्रम पहुंचते हैं। मुनि को दंडवत प्रणाम करते हैं और भारद्वाज जी उनको गले से लगाकर आशीर्वाद देते हैं।
भगवान किसे और कहां मिलते हैं?
Ramkatha7: भगवान राम से मिल कर भारद्वाज जी आनन्द मग्न हो जाते हैं और सोचते हैं कि आज हमारी तपस्या सफल हो गई। मेरा जीवन धन्य हो गया। मुनि प्रभु राम सहित सभी को पवित्र आसन बैठने के लिए देते हैं और खाने में कंद मूल फल देते हैं। सभी प्रकार से संतुष्ट कर प्रभु की वंदना करते हैं। लेकिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम कहते हैं कि हे मुनि जिसको आपका आशीर्वाद मिल जाता है वही बड़ा हो जाता है।
भगवान किसे और कहां मिलते हैं? भक्तों की इस जिज्ञासा को महाराज जी ने बहुत ही आसान भाषा में शांत किया। महाराज जी ने कहा, जाके हृदय कपट नहि माया, ताके हृदय बसहिं रघुराया। यानी जिसका हृदय छल, कपट और माया से मुक्त होकर शुद्ध हो जाता है, उसी के हृदय में भगवान श्रीराम निवास करते हैं। लेकिन साधारण मनुष्य के लिए यह कठिन मार्ग है। जब नारद जैसे सिद्ध महात्मा माया को समझ नहीं तो जन साधारण कैसे समझ सकता है?
सत्य वचन आधीनता, पर तिय मातु समान
महाराज जी ने भक्तों को एक आसान और छोटा मार्ग बताया। उन्होंने कहा, सत्य वचन आधीनता, पर तिय मातु समान। एतनेउ पर हरि न मिलें, तो तुलसी झूठ जबान।। यानी सत्य बोलने वाले, भगवान पर निर्भर रहने वाले और पराई स्त्री को माता के समान समझने वाले पुरुष को ईश्वर अवश्य मिलते हैं। इसके अलावा तुमहिं निवेदित भोजन करहीं। जब भी भोजन करें, तो उसे पहले भववान को समर्पित कर दें। लेकिन भगवान को वही भोजन समर्पित किया जाता है जो अपनी पाकशाला में शुद्धता से बना हो। सड़क पर ठेले वाला धूल से भरा भोजन कभी भी भगवान को समर्पित नहीं करना चाहिए।
श्रीराम कथा में नोएडा की मीडिया के कई पत्रकार भी पहुंचे और मंच पर जाकर परम पूज्य गुरुदेव जी का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा कई प्रतिष्ठित लोग भी कथा पंडाल में पहुंचे, जिनका भक्तों ने भव्य स्वागत किया और उन्हें महाराज जी ने आशीर्वाद दिया। इस मौके पर भगवान श्रीराम, माता सीता और अनुज लक्ष्मण की भव्य झांकी सजाई गई थी। आशीर्वाद लेने के लिए भक्तों की लाइन लगी हुई थी।
मौके पर पहुंच शहर के प्रतिष्ठित लोग
Ramkatha7: श्रीराम कथा आयोजन समिति के मीडिया प्रभारी देवमणि शुक्ल ने बताया कि 10 अक्टूबर को राम भरत मिलाप सहित कई प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। मौके पर भाजपा की वरिष्ठ नेत्री श्रीमती प्रज्ञा पाठक, भाजपा मंडल अध्यक्ष गौतम शर्मा, धर्मेंद्र कुमार मिश्रा, विनय त्रिवेदी, सीके शर्मा, अरविंद परिहार, मनीष मिश्रा, मुकेश शुक्ला, महेंद्र शर्मा, विकास राज तिवारी, एसपी मिश्रा, धर्मेंद्र सिंह, शिव कुमार पाठक, चंदन पांडेय, जेपी मिश्रा, उम्मीद सिंह, प्रमोद यादव, सीएल तिवारी, राजीव श्रीवास्तव, राजेश महाले, रवि राघव, गोरे लाल, रमेश वर्मा, अंकित उपाध्याय, अंकित शर्मा, सर्वेश तिवारी, रमेश चंद्र शर्मा, विजेंद्र सिंह, राजेश कुमार गुप्ता, संजय पांडे, हरि शंकर सिंह, संजय शुक्ला, रमेश दास, अनूप सिंह, विकास शर्मा, आचार्य गौरव, हंस मणि शुक्ल, अंगद सिंह तोमर, संगम प्रसाद मिश्रा सहित तमाम लोग मौजूद रहे।


