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Hathras incident: जब किसी काम न आई बाबा की दिव्य शक्ति

infopost July 4, 2024
Hathras incident

Hathras incident: भीड़ भाड़ में जाने से बचना चाहिए। नहीं तो यही भीड़ जाने अनजाने में कब आपको मार देगी, पता भी नहीं चलेगा। हमारे देश में बाबा लोग भीड़ जुटाने का परमानेंट स्रोत बन चुके हैं। लोग इनके नजदीक शायद इसलिए जाना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद होती है कि बाबा लोग उनकी उन समस्याओं को जादू से सुलझा देंगे जिन्हें सुलझाने की जिम्मेदारी सरकार पर होती है। यही वजह है कि सत्संग एक इंडस्ट्री बनता जा रहा है और हादसों का सबब भी। हाथरस की घटना एक उदाहरण मात्र है।

Hathras incident: बाबा के सत्संग के दौरान भगदड़ से 121 लोगों की मौत

इंफोपोस्ट डेस्क

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नई दिल्ली। Hathras incident: जानते हैं बाबा के सत्संग ग्राउंड में आने से लेकर भगदड़ मचने तक क्या कुछ हुआ। हाथरस में उस दिन कब-कब क्या-क्या हुआ। हाथरस के जिस मैदान में मंगलवार को सत्संग का आयोजन किया गया था, वहां सत्संग शुरू होने से पहले बारिश हुई थी। इस वजह से उस मैदान में फिसलन ज्यादा थी। तभी तो उस दिन भगदड़ के दौरान ज्यादा लोगों की मौत हुई।

उत्तर प्रदेश के हाथरस में बीते मंगलवार को भोले बाबा के सत्संग के दौरान मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो चुकी है। यह घटना इतनी बड़ी थी कि हादसे के सामने आते ही राष्ट्रपति मुर्मू, पीएम मोदी समेत सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त किया था। सीएम योगी ने इस पूरे मामले की जांच के भी आदेश दिए हैं।

बाबा के चरण की धूल लेने के लिए दौड़े थे भक्त

Hathras incident: सत्संग का आयोजन जीटी रोड के पास फुलरई गांव में किया गया था। इसी गांव में सत्संग के लिए भोले बाबा यहां पहुंचे थे। भोले बाबा मंगलवार दोपहर 12.30 बजे सत्संग ग्राउंड में पहुंचा था। दोपहर 12.55 बजे बाबा ने अपना प्रवचन शुरू किया। इस दौरान लाखों की भीड़ सत्संग स्थल पर मौजूद थी। भोले बाबा का प्रवचन दोपहर 1.45 बजे पूरा हो गया।

इसके बाद बाबा सत्संग ग्राउंड से निकलकर जाने लगा। जैसे ही भोले बाबा अपना प्रवचन देकर वहां से निकलते हैं, वैसे ही उसकी गाड़ी के पीछे भक्त दौड़ पड़ते हैं। भक्त बाबा के चरण की धूल लेने के लिए दौड़े थे। इसके बाद दोपहर 1.55 बजे सत्संग स्थल पर भगदड़ मच गई। जिस जगह पर सत्संग हो रहा था उसी के बगल में एक खेत है जहां पानी भरा हुआ था।

ऐसे में जब लाखों लोगों के बीच भगदड़ मची तो बड़ी संख्या में लोग इन गड्ढों में गिर गए। जो लोग इन गड्ढों में गिरे वो दोबारा उठ नहीं पाए। जिन लोगों की मौत इन गड्ढों में गिरने से हुई है, उनके पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र है कि ऐसे लोगों की मौत दम घुटने से हुई है। इन लोगों के सीने में खून के थक्के भी मिले हैं।

बारिश की वजह से खेत में थी फिसलन

Hathras incident: मंगलवार को जो भक्त सत्संग के दौरान हाथरस में मौजूद थे उनके अनुसार सत्संग से पहले वहां बारिश हुई थी। इस वजह से सत्संग ग्राउंड में जगह-जगह पर पानी था। बारिश के कारण खेत की मिट्टी चिकनी और फिसलन वाली थी।

इस वजह से जब लोग बाबा के काफिले की की तरफ दौड़े तो फिसलकर गिरने लगे। और उस दिन बड़ा हादसा हुआ था। साथ ही सड़क और खेत के बीच फिसलन भरी ढलान भी थी। फसल कटने के बाद खेत खाली था। कार्यक्रम स्थल कोई सपाट मैदान की तरह नहीं था।

जिम्मेदार कौन? पुलिस या सेवादार?

पुलिस ने मुख्य सेवादार और आयोजकों को ही आरोपित बनाया है। प्राथमिकी में भी घटना के लिए उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार कहते हैं कि घटना के पीछे बाबा की बड़ी लापरवाही है। उनके विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत होना चाहिए। इसी के साथ पुलिस प्रशासन की भी लापरवाही है। एसडीएम ने जब अनुमति दी तो उसके लिए व्यवस्था क्यों नहीं की गई? उन्हें तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए।

हादसे के बाद एक दिल दहला देने वाली घटना हुई। एटा के क्यूआरटी, अवागढ़ में तैनात सिपाही रजनेश ड्यूटी के बाद घर लौट रहे थे। तभी हादसे के कारण उनकी आकस्मिक ड्यूटी मेडिकल कालेज में लगा दी गई। मूल रूप से अलीगढ़ के 30 वर्षीय रजनेश ड्यूटी पर पहुंचे और लाशों को उठाना शुरू कर दिया। इतनी लाश एक साथ देखकर उन्हें दिल का दौरा पड़ गया और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई।

बॉडी तीन अलग-अलग जिलों में मिली

हाथरस के सोखना गांव निवासी 31 साल के प्रताप सिंह के लिए मंगलवार को बाकी दिनों जैसा ही रूटीन था। दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करने वाले प्रताप सुबह काम के लिए निकल गए। दोपहर को 3 बजे करीब फोन की घंटी बजनी शुरू हुई, जिसे उठाने पर उनके पैरों तले जमीन ही खिसक गई। बदहवास होकर वह फुलराई गांव में चल रहे बाबा नारायण साकार हरि के सत्संग स्थल की तरफ भागे। हादसे में उनकी मां, भाभी और भतीजी की मौत हो गई। और तीनों की बॉडी तीन अलग-अलग जिलों में मिली।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुए दर्दनाक हादसे के बाद सामने आ रही कहानियां रुला देने वाली हैं। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की भगदड़ में कुचलकर मौत हो गई। प्रताप की 70 साल की मां जैनमती देवी, 42 साल की भाभी राजकुमारी और नौ साल की भतीजी भूमि सत्संग सुनने गए थे। भगदड़ के बाद से ही तीनों का कुछ पता नहीं चल रहा था। तीनों की लाश आगरा, अलीगढ़ और हाथरस के अस्पताल में अलग-अलग जगहों पर मिली।

भगदड़ में बिछड़ गए सभी लोग

प्रताप के परिवार के तीनों सदस्य भीड़ में मची भगदड़ के दौरान एक दूसरे से बिछड़ गए थे। जब तक परिवार के लोगों को उनके बारे में कुछ पता चलता, वे लोग दम तोड़ चुके थे। तीनों की बॉडी तीन अलग जगहों पर ले जाई गईं। प्रताप ने बताया, ‘मैं सड़क से लेकर हाइवे और अस्पतालों तक दौड़ रहा था। मुझे कुछ नहीं पता चल पा रहा था। डॉक्टर और अस्पताल के अन्य स्टाफ से मैं परिवार के लोगों के बारे में पूछ रहा था।’

रात में जाकर गांव के एक व्यक्ति ने फोन कर बताया कि वॉट्सऐप पर मां की तस्वीर आई है। वह आगरा से अस्पताल में हैं। फिर पता चला कि एक सरकारी ऐम्बुलेंस उनकी बॉडी को लेकर आ रही है। ऐसे ही धीरे-धीरे पता चला कि भतीजी भूमि की बॉडी अलीगढ़ में मिली और भाभी की बॉडी हाथरस में बरामद हुई। हम लोग तबाह हो गए। बड़े भाई के तीन बच्चे घर में हैं।

चार प्रदेशों के लोग मारे गए

Hathras incident: मारे गए श्रद्धालुओं में उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से के अलग-अलग क्षेत्र के लोगों के साथ ही तीन अन्य राज्यों के श्रद्धालु भी शामिल हैं। इनमें मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के श्रद्धालु शामिल हैं। इन सभी के परिजन को योगी सरकार सहायता राशि प्रदान करेगी। जिला प्रशासन की ओर से जारी मृतकों की सूची में 6 मृतक अन्य राज्यों से हैं।

सीएम योगी ने मौके पर पहुंच कर हालात का जायजा लिया। हादसे की न्यायिक जांच के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज बृजेश कुमार श्रीवास्तव (द्वितीय) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया है। अब जांच में क्या कुछ निकल कर आएगा और किसे सजा मिलेगी या सभी बच निकलेंगे, यह बाद की बात है। लेकिन यह तय है कि हादसों से कोई सबक नहीं लिया जाता।

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