Skip to content
Primary Menu
  • Home
  • ख़ास ख़बर
  • आलेख
    • सत्ता की सियासत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • दिल्ली एनसीआर
  • राज्यों से …
  • कारोबार
  • साहित्य
  • संस्कार
  • तकनीक
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • खेल
Logo300

INFOPOST NEWS

The power of information

July 23, 2026

Connect with Us

  • Home
  • ख़ास ख़बर
  • आलेख
    • सत्ता की सियासत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • दिल्ली एनसीआर
  • राज्यों से …
  • कारोबार
  • साहित्य
  • संस्कार
  • तकनीक
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • खेल

Categories

  • INFOPOST PDF
  • sports
  • Uncategorized
  • अंतरराष्ट्रीय
  • आलेख
  • कारोबार
  • ख़ास ख़बर
  • तकनीक
  • दिल्ली एनसीआर
  • बोलती तस्वीरें
  • मनोरंजन
  • राज्यों से …
  • राष्ट्रीय
  • शिक्षा
  • सत्ता की सियासत
  • संस्कार
  • साहित्य
  • स्वास्थ्य
An error has occurred, which probably means the feed is down. Try again later.

  • ख़ास ख़बर
  • साहित्य

साहित्य में है समाज निर्माण की शक्ति

July 21, 2020
College1

रांची। किसी भी देश अथवा समाज के बारे में जानना है तो उसके साहित्य में उतरना होगा। इस संदर्भ में साहित्य की प्रासंगिकता हमेशा बनी रहती है। आज कल तो साहित्य जो कर दिखाता है, वह करना मीडिया के वश में भी नहीं रह गया है। उपभोक्तावादी संस्कृति ने साहित्य को हासिये पर पहुंचा दिया है। देश हित में साहित्य और समाज को जुड़ना ही होगा।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

इसी प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए सेंट जेवियर्स कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार के दूसरे दिन बुधवार को प्रथम सत्र के प्रमुख वक्ता जबलपुर के साहित्यकार रमेश सैनी ने साहित्य और समाज का अंतरसंबंध विषय पर वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि साहित्य की प्रासंगिकता समाज के लिए हमेशा बनी रहेगी।

श्री सैनी ने कहा कि साहित्य समाज का दिशा निर्धारक होता है। साहित्य मानव समुदाय व अर्जित की गई समृद्ध भाषा की उपलब्धि है। साहित्य अपने समय का प्रतिबिंब है। इसमें समाज निर्माण की शक्ति होती है। आज साहित्य की जरूरत ज्यादा बढ़ गई है और साहित्यकारों का सामाजिक दायित्व भी बढ़ गया है।

दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता साहित्यकार दिलीप तत्त्वे ने साहित्य और समाज के पुराने संबंधों की पुनर्स्थापना विषय पर बात की। उन्होंने कहा कि लोग अच्छे साहित्य में अपने आपको ढूंढ़ते हैं। साथ ही अपने पास-पड़ोस, परिवेश की कथा और भाषा को तलाशते हैं। लोग युग के अनुरूप बदली परंपराओं और संस्कृति को अपनाना चाहते हैं, ताकि समय के साथ चल सकें।

उन्होंने समय सापेक्ष साहित्य लेखन पर जोर दिया। वेबिनार में प्रतिभागियों ने साहित्य, समाज और भाषा से जुड़े कई प्रश्न भी वक्ताओं से पूछे, जिनके जवाब उन्होंने दिए। संचालन कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष सह वेबिनार के संयोजक डॉ कमल कुमार बोस ने किया। इसमें हिंदी विभाग के सभी शिक्षकों समेत बड़ी संख्या में अन्य प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

जाहिर है कि साहित्य को समाज से जोड़े रखने के लिए इस तरह के वेबिनार संजीवनी साबित हो सकते हैं, क्योंकि आज के मीडिया में साहित्य से संबंधित खबरों का सर्वथा अभाव रहता है। लोग साहित्य तो पढ़ना चाहते हैं, लेकिन जितना प्रचार प्रसार फिल्मों और क्रिकेट को मिलता है, उतना साहित्य को नहीं मिल पाता।

About Author

See author's posts

Post navigation

Previous: Google hit with record EU fine over Shopping service
Next: ..तो ऐसा होगा भव्य राम मंदिर

Related Stories

Rajiv Narayan's prediction
  • ख़ास ख़बर
  • राष्ट्रीय

Rajiv Narayan’s prediction: ज्योतिषीय भविष्यवाणी से गरमाई राजनीतिक बहस

infopost July 20, 2026 0
Sonam Wangchuk Episode
  • ख़ास ख़बर
  • राष्ट्रीय

Sonam Wangchuk Episode: पुलिस कार्रवाई ने तेज की राजनीतिक बहस

infopost July 19, 2026 0
Sonam Wangchuk
  • ख़ास ख़बर
  • राष्ट्रीय

Sonam Wangchuk: लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने की कोशिश!

infopost July 18, 2026 0

Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.