Virasat Swaraj Yatra: विरासत स्वराज यात्रा की जरूरत क्यों है? यह यात्रा आज की जरूरत और गांधी का एहसास कराएगी। हम सभी के धर्मों को जोड़ने वाली सूफी परम्परा और समाज को जोड़ने वाली मीराबाई हैं, जो गांधी के काम व सूफी परम्परा की महान विरासत हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!Virasat Swaraj Yatra: साबरमती आश्रम से शुरू हुई ‘विरासत स्वराज यात्रा’
अंकित तिवारी
Virasat Swaraj Yatra: ‘विरासत स्वराज यात्रा’ आज साबरमती आश्रम से शुरू हुई। इसके बाद पर्यावरण सफाई संस्थान, अहमदाबाद का भ्रमण किया। हृदय कुंज में वहां के मंत्री अमृत मोदी और वहां के साथियों से मिलकर विरासत स्वराज यात्रा के बारे में जानकारी दी और गहन संवाद किया।
मीराबाई निर्भय होकर, आजादी से अपने भगवान को सम्मान से स्वीकारती थीं। बिना किसी से डरे उन्होंने भगवान को स्वीकार किया था। ‘विरासत स्वराज यात्रा’ की संयोजक आशा बोथरा ने कहा कि भारत के जीवन को बनाने वाली विरासत- जल, जंगल, जमीन, भारत को प्रेरित करने वाली विरासत गांधी, मीरा, विनोबा, अंबेडकर, सरदार पटेल इन सब को समझकर ऊर्जा लेने की जरूरत है।
जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने कहा, भारत भूमि से आरंभ हुई सूफी परम्परा पूरी दुनिया में कहीं और नहीं थी। यह पहले भारत में जन्मीं फिर पूरी दुनिया में फैली है। आज करोड़ों लोग इसको मानने वाले हैं, जो आज भी इसका पालन कर रहे हैं। इसलिए हम यदि आपसी झगड़े का निपटारा करना चाहते हैं, तो वो विखंडित होकर नहीं हो सकता।
हम सब एक हैं
हम सब एक हैं, जब एक मानकर काम करते हैं, तब हम राज्यों में नहीं बटते, धर्म में नहीं बटते, राजनीति में नहीं बटते, उन्हें तो हमें अपने मनोयोग से जोड़कर देखना होगा। इसी तरह से हम गुजराती, कश्मीरी, राजस्थानी कहकर एक नहीं हो सकते, हम तो जय जगत को मानने वाले लोग हैं। ‘जल जगत’ हमारी विरासत है।
जब हम जय जगत को मानते हैं, तो सारा जग का कल्याण हो, सुधार हो, उस रास्ते पर हमें आगे बढ़ने की जरुरत है। गांधी और विनोबा से हमने यही सीखा है। विनोबा जी का नारा था ‘जय जगत’ जय जगत मतलब पूरी जगत का शुभ हो।
बापू के विचार को आगे बढ़ाने वाले संत
विनोबा जी बापू के विचार को आगे बढ़ाने वाले संत थे। विनोबा, जे.पी., गांधी जी हमारी विरासत हैं, जो हमें प्रभावित व प्रवाहित करती है। यह हमें अच्छे काम करने के लिए तीव्रता और तुरा पैदा करती है।
साबरमती आश्रम, हृदयकुंज में जाकर संकल्प लिया कि हम विरासत स्वराज यात्रा को वर्ष भर जारी रखेंगे। इसमें सभी जगह से लोग जुड़कर, अनुकूल वातावरण निर्माण करने का काम करेंगे। भारत के 90 भू-सांस्कृतिक क्षेत्र हैं, पहले यह यात्रा सभी जोन में सामाजिक कार्यकर्ता और आमजन मिलकर करेंगे।
वैश्विक विरासत स्वराज यात्रा
इसके बाद यात्रा को पूरे राष्ट्र में जोड़ देंगे। इसी प्रकार दुनिया के दूसरे देशों में भी यह वैश्विक विरासत स्वराज यात्रा होगी। अभी इसका नाम केवल विरासत स्वराज यात्रा है, क्योंकि अभी यह भारत के कुछ क्षेत्रों में आरंभ हुई है, फिर यह पूरी दुनिया में चलेगी।
यात्रा का कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है। इसकी कोई समय सारणी नहीं है, क्योंकि इस यात्रा को सृजनात्मक यात्रा के रूप में चलाएंगे। जहां जितना समय देना उचित होगा, वहां लोगों के अनुकूल और स्थानीय लोगों का सम्मान करते हुए यात्रा करेंगे।
तीसरे चरण की यात्रा
तीसरे चरण में यात्रा भावनगर के सीहोर कस्बे में पहुंची। यहां मुकेश पंडित, जगदीश चावड़ा, देवेंद्र तिवारी, हरीश पवार, पल्लवी ने यात्रा का स्वागत किया। और भारत सरकार के स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव की प्रदर्शनी को दिखाकर सभा आयोजित हुई।
इस सभा में जलपुरुष डॉक्टर राजेंद्र सिंह ने कहा, हम सभी को मिलकर भारत की विरासत को बचाने में जुटना है। हम अपनी विरासत को समझें, जानें और सत्याग्रह करें। रात यह यात्रा जैन तीर्थ पालीताना में रुकेगी।
दूसरा दल उत्तर प्रदेश में
दूसरा दल उत्तर प्रदेश में है जो संजय सिंह की नुमाइंदगी में संचालित है। तीसरा दल सुरेश रैकवार के नेतृत्व में अजबगढ़, समरा, पिपलाई, जैतपुर गुजरान होते हुए नाटाटा पहुंचा। जगह जगह किसानों, बच्चों, महिलाओं के साथ संवाद किया और गांधी जी की विरासत बचाने के लिए प्रेरित किया। तुलसी का पौधा भी रोपा गया।
इससे पहले 02 अक्टूबर को महात्मा गांधी बापू की जयंती के अवसर पर ‘विश्व विरासत स्वराज यात्रा’ वागधारा के प्रांगण से आरंभ हुई। इस अवसर पर यात्रा की संयोजक आशा बहिन और वागधारा के सचिव जयश जोशी और क्षेत्र के सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे।


