Unprecedented Success: फोर्टिस असपताल के डॉक्टरों ने एक अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। इन चिकित्सकों ने हाइपरएक्यूट लीवर फेलियर के एक मरीज का प्लाज्मा थेरेपी से उपचार किया और लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत को ही खत्म कर दिया।
Unprecedented Success: प्लाज्माफेरेसिस चिकित्सा बनी एक वरदान
इंफोपोस्ट न्यूज
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश। Unprecedented Success: यहां के फोर्टिस अस्पताल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोबिलरी साइंसेज विभाग के डॉक्टरों की टीम ने हाइपरएक्यूट लीवर फेलियर के एक मरीज का प्लाज्मा थेरेपी के जरिये उपचार किया और लीवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता को ही खत्म कर दिया।
आमतौर पर ऐसे मरीज के लिए लीवर ट्रांसप्लांट ही अंतिम विकल्प होता है। उसके लिए मरीज को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। कभी कभी तो यही इंतजार मरीज के जीवन के लिए घातक साबित हो जाता है।
हेपेटाइटिस ए बीमारी से पीड़ित मरीज
ग्रेटर नोएडा निवासी उक्त मरीज की उम्र 29 वर्ष है। वह बुखार और पीलिया की शिकायत के साथ फोर्टिस अस्पताल पहुंचा था। मरीज की हालत इतनी खराब थी कि वह मस्तिस्क में सूजन यानी सेरेब्रल एडिमा के कारण ठीक से बात तक नहीं कर पा रहा था। वह हेपेटाइटिस ए बीमारी से पीड़ित था।
उसे तुरंत आईसीयू में भर्ती किए जाने की जरूरत थी। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोबिलरी साइंसेज के कंसल्टेंट डॉक्टर अपूर्व पांडे ने कहा कि यह एक गंभीर स्थिति है, जो एक प्रतिशत मरीजों में ही होती है। ऐसे मरीज को पीलिया हो जाता है और मस्तिस्क में सूजन जैसी जटिलताएं पैदा हो जाती हैं। ऐसे मामलों में ज्यादातर मरीज समय पर चिकित्सा और उचित देखभाल से ठीक हो जाते हैं।
डॉक्टर ने किया प्लाज्माफेरेसिस देने का फैसला
डॉक्टर पांडे ने बताया कि मरीज की उम्र कम होने के कारण ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त डोनर की व्यवस्था करने में ज्यादा समय लग जाता। इसलिए हमने सेरेब्रल एडिमा और लीवर सपोर्ट के लिए आईसीयू में मरीज को प्लाज्माफेरेसिस देने का फैसला किया।
उन्होंने बताया कि प्लाज्माफेरेसिस एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति के खून के तरल भाग या प्लाज्मा को उससे अलग कर दिया जाता है। उसमें श्वेत रक्त कोशिकाएं होती हैं। और फिर डोनर से प्राप्त ताजा प्लाज्मा से इसे बदल दिया जाता है। मरीज को प्लाज्मा चढ़ाया गया और वह कुछ ही दिनों में ठीक हो गया।
बासी खाना या स्ट्रीट फूड से बचें
डॉक्टर पांडे ने बताया कि दूषित भोजन और पानी के सेवन से पेट में इंफेक्शन, फ्लू और हेपेटाइटिस के मामले बढ़ जाते हैं। लोगों को बासी खाना या स्ट्रीट फूड से बचना चाहिए। जल शोधक से निकले पानी को भी एक बार जरूर उबाल लेना चाहिए। डॉक्टरों ने लीवर की सुरक्षा के लिए हेपेटाइटिस के शुरुआती लक्षणों की पहचान किए जाने पर भी जोर दिया।
सुस्ती, मांसपेशियों में दर्द और बुखार हेपेटाइटिस के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। इस बीमारी के दूसरे चरण में पीलिया विकसित हो जाता है। डॉक्टर प्रमित मिश्रा ने कहा कि हाइपरएक्यूट लीवर फेल्योर के मामले में समय पर उपचार न किया गया तो मरीज की जान जा सकती है। इस मामले में प्लाज्मा फेरेसिस एक अमूल्य जीवन को बचाने में कारगर साबित हुआ है।


