UGC Equity Regulations 2026: पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्रा ने UGC Equity Regulations 2026 पर आपत्ति जताई। बोले– नियम संविधान, सामाजिक समरसता और निष्पक्ष न्याय के खिलाफ हैं।
UGC Equity Regulations 2026: बताया संविधान की मूल भावना के खिलाफ
इंफोपोस्ट न्यूजडेस्क/नई दिल्ली/UGC Equity Regulations 2026
UGC द्वारा प्रस्तावित “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यपाल पंडित कलराज मिश्रा ने इन नियमों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह विनियम संविधान की मूल भावना, सामाजिक समरसता और निष्पक्ष न्याय प्रणाली के विपरीत हैं।
बुधवार को जारी अपने बयान में कलराज मिश्रा ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और न्याय सुनिश्चित करना निस्संदेह आवश्यक है, लेकिन इसके नाम पर किसी एक वर्ग विशेष को लगातार संदेह के दायरे में रखकर उसके विरुद्ध निगरानी एवं अनुशासनात्मक ढांचा तैयार करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि समाज के लिए भी घातक सिद्ध हो सकता है।
नियम और प्रक्रिया सभी नागरिकों के लिए समान हो
उन्होंने कहा कि यदि समानता वास्तव में स्थापित करनी है, तो नियम और प्रक्रिया सभी नागरिकों के लिए समान होनी चाहिए। किसी सामाजिक वर्ग को पूर्वाग्रह के आधार पर संभावित अपराधी मानकर नियम बनाना न्याय की अवधारणा को कमजोर करता है।
कलराज मिश्रा ने UGC द्वारा वर्ष 2012 में बनाए गए शिकायत निवारण नियमों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय व्यवस्था सभी वर्गों के लिए समान, निष्पक्ष और संतुलित थी। उन नियमों में किसी भी छात्र, शिक्षक या कर्मचारी को उसकी जाति या सामाजिक पहचान के आधार पर दोषी मानने की प्रवृत्ति नहीं थी। जांच प्रक्रिया नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित थी, जिसमें दोनों पक्षों को समान अवसर मिलता था।
सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण निर्णय का भी हवाला दिया
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2019 के एक महत्वपूर्ण निर्णय का भी हवाला दिया, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि कोई भी जांच प्रक्रिया तब तक न्यायपूर्ण नहीं मानी जा सकती, जब तक वह निष्पक्ष, संतुलित और पूर्वाग्रह-मुक्त न हो। कलराज मिश्रा के अनुसार, झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों से निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों, सम्मान और गरिमा की रक्षा करना भी न्याय व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा है, जिसे नए नियमों में नजरअंदाज किया गया है।
विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि परिषद का मूल लक्ष्य ब्राह्मण समाज को केंद्र में रखकर समाज के भीतर सामाजिक समरसता स्थापित करना है। उनके अनुसार UGC के नए नियम सामाजिक समरसता को मजबूत करने के बजाय समाज में भय, अविश्वास और विभाजन की स्थिति पैदा कर सकते हैं। शिक्षा संस्थान समाज को जोड़ने का माध्यम होते हैं और वहीं से विभाजनकारी सोच को बढ़ावा देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का प्रत्यक्ष उल्लंघन
कलराज मिश्रा ने आगे कहा कि ये प्रस्तावित विनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का प्रत्यक्ष उल्लंघन करते हैं। संविधान सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता, भेदभाव से मुक्ति और सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार देता है, जबकि ये नियम किसी एक वर्ग के लिए अलग और कठोर दंडात्मक व्यवस्था बनाते प्रतीत होते हैं।
अपने बयान के अंत में उन्होंने UGC से मांग की कि प्रस्तावित Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। साथ ही जाति-आधारित एकतरफा दंडात्मक प्रावधानों को पूरी तरह समाप्त किया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि शिकायत निवारण प्रणाली सभी वर्गों के लिए समान, निष्पक्ष और पारदर्शी हो तथा झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया जाए। इसके अलावा शिकायत निवारण समितियों में सभी वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
UGC Equity Regulations 2026: UGC के नए नियमों को लेकर उठी यह आपत्ति अब एक बड़े संवैधानिक और सामाजिक विमर्श का रूप लेती दिखाई दे रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और सरकार इन आपत्तियों पर क्या रुख अपनाती है।


