उत्तर प्रदेश के देहाती इलाकों में बेहिसाब बिजली कटौती की जा रही है। इस वजह से लोग रात भर जागने को मजबूर हैं।
सिर्फ वादे करते हैं हमारे नेता
श्रीकांत सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सुल्तानपुर। चुनाव के समय हमारे नेता फ्री बिजली देने का वादा करते नहीं थकते। कोई दो सौ यूनिट फ्री बिजली देने का वादा करता है तो कोई तीन सौ यूनिट। लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद बिजली मिलती ही नहीं।
ग्रामीण क्षेत्रों में हालत ये हैं कि घरेलू कारखाने बंद पड़े हैं। आटा चक्की नहीं चल पा रही है। तेल मिल की तो बात करना ही बेमानी है।
इस समय धान की बेरन डाली गई है। उसे पानी नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि डीजल के दाम आसमान पर हैं। कुछ किसान डीजल की व्यवस्था भी करते हैं तो उनकी फसल की लागत बढ़ जाती है। अधिक लागत से वे फसल तैयार भी करते हैं तो वह माटी के भाव बिकती है।
किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार अभी तक कोई रोडमैप तैयार नहीं कर पाई है। एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी जामा पहनाने के अपने वादे से भी सरकार मुकर सी गई है।
इन हालात में बिजली कटौती किसानों पर भारी पड़ रही है। किसान रमेश कहते हैं कि उनकी नौकरी छूट गई तो वह खेती किसानी में हाथ आजमाने लगे। लेकिन लगातार बिजली कटौती के कारण उनकी धान की बेरन को पानी नहीं मिल पाया और फसल बर्बाद हो गई।
आटा चक्की चलाने वाले संजय कहते हैं कि बिजली कटौती से तंग आकर उन्होंने इंजन खरीद लिया है। महंगे डीजल को खरीद कर वह अपने ग्राहकों का गल्ला पीसते हैं। लेकिन उन्हें लागत के हिसाब से पिसाई नहीं मिल पाती।
संबंधित अधिकारियों और नेताओं से बात करने की कोशिश की गई। लेकिन वे अपने वातानुकूलित कमरे में भी जन समस्या पर बात करना जरूरी नहीं समझ रहे थे। फिर भी उम्मीद है कि कोई न कोई इस समस्या से संज्ञान जरूर लेगा और समाधान की दिशा में कदम जरूर बढ़ाएगा।


