Strait of Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच दुनिया की नजरें कच्चे तेल की कीमतों और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर टिकी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान के साथ जारी युद्ध में जल्द जीत हासिल कर सकता है और इसके बाद गैस तथा तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई में बदलाव का असर घरेलू ईंधन बाजार पर भी पड़ सकता है।
Strait of Hormuz: तेल की कीमतों पर संघर्ष का असर
इंफोपोस्ट/Strait of Hormuz
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दबाव बना हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बना है, क्योंकि यह फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच स्थित महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के तेल कारोबार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस समुद्री मार्ग से तेल की आवाजाही प्रभावित होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर बढ़ने का दबाव बन सकता है।
29 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ चल रहे युद्ध में बहुत जल्द जीत हासिल करेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि संघर्ष समाप्त होने के बाद गैस की कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है। उनके मुताबिक युद्ध खत्म होने के बाद तेल की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि यह फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है और इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पेट्रोल या एलपीजी की कीमतें तुरंत कम होने वाली हैं।
तेल सप्लाई के लिए हॉर्मुज क्यों अहम
Strait of Hormuz: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। इस मार्ग से तेल की बड़ी मात्रा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचती है। इसलिए यहां तनाव बढ़ने या तेल की आवाजाही प्रभावित होने की स्थिति में वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है। सप्लाई पर दबाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
हाल के महीनों में हॉर्मुज को लेकर बढ़े तनाव ने वैश्विक तेल सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है तो उसका असर अलग-अलग देशों के ईंधन बाजारों पर पड़ सकता है। इसी वजह से अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष तथा हॉर्मुज की स्थिति पर तेल बाजार की नजर बनी हुई है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक सप्लाई की स्थिति भारत के लिए महत्वपूर्ण होती है। अगर ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष कम होता है, तेल की आवाजाही सामान्य होती है और वैश्विक सप्लाई बेहतर होती है तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर नीचे आने का दबाव बन सकता है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत में गिरावट का सीधा मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कीमत उसी समय और उसी अनुपात में कम हो जाएगी। घरेलू ईंधन की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के अलावा कई अन्य आर्थिक और नीतिगत कारकों का भी असर पड़ता है। इसलिए भारत में कीमतों में संभावित बदलाव को केवल ट्रंप के बयान से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी।
पेट्रोल और एलपीजी की कीमतों पर क्या असर
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में गैस की कीमतों में गिरावट की संभावना की बात कही है। लेकिन भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों को लेकर अभी किसी निश्चित कटौती की घोषणा को इस बयान से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। घरेलू बाजार में कीमतों में बदलाव के लिए अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के साथ-साथ अन्य आर्थिक और नीतिगत परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।
अगर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें लंबे समय तक नीचे रहती हैं और सप्लाई से जुड़ी परेशानियां कम होती हैं तो तेल आयात करने वाले देशों को राहत मिल सकती है। हालांकि घरेलू बाजार में इसका असर कब और कितना दिखाई देगा, यह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि ट्रंप के बयान के बाद भारत में पेट्रोल या एलपीजी के दाम तत्काल कम हो जाएंगे।
अमेरिका के कदमों पर भी नजर
हॉर्मुज की स्थिति के साथ-साथ अमेरिकी प्रशासन की ओर से तेल की कीमतों को कम करने के लिए उठाए जा सकने वाले कदम भी महत्वपूर्ण हैं। अमेरिकी प्रशासन ने यूरोपीय देशों के साथ इमरजेंसी डीजल भंडार के इस्तेमाल को लेकर चर्चा की है। इसका उद्देश्य तेल सप्लाई से जुड़ी संभावित चिंताओं के बीच बाजार पर दबाव को कम करने से जुड़ा है।
इसके अलावा अमेरिका ने अपने स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से बड़ी मात्रा में तेल जारी करने की प्रतिबद्धता जताई है। ऐसे में आगे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की दिशा अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष, हॉर्मुज से तेल की आवाजाही और वैश्विक सप्लाई की स्थिति पर निर्भर करेगी। भारत जैसे आयातक देशों के लिए भी इन घटनाक्रमों पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।
आगे क्या देखना होगा
Strait of Hormuz: अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा अगर वास्तविक रूप से संघर्ष में कमी और तेल की सामान्य आवाजाही की स्थिति में बदलता है तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर इसका असर दिखाई दे सकता है। लेकिन केवल बयान के आधार पर भारत में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कीमतों में तत्काल कमी की उम्मीद करना उचित नहीं होगा। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और सप्लाई की स्थिति में स्थायी बदलाव देखना जरूरी होगा।
फिलहाल स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की स्थिति इस पूरे मामले का अहम केंद्र बनी हुई है। तेल की आवाजाही सामान्य रहती है या प्रभावित होती है, वैश्विक सप्लाई किस दिशा में जाती है और कच्चे तेल की कीमतों में आगे क्या बदलाव आता है, इन सभी पहलुओं पर भारत सहित दुनिया के कई देशों की नजर रहेगी।


