इंफोपोस्ट डेस्क, नयी दिल्ली। Russia Spacecraft:
Russia Spacecraft: रूस को करारा झटका लगा है। उसका स्पेसक्राफ्ट लूना-25 रविवार को चांद से टकरा गया। नष्ट हो गया। इसके साथ ही रूस का मिशन चांद फेल हो गया है। इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय मंच पर रूस की किरकिरी भी हो रही है। रूस की स्पेस एजेंसी रॉस्कोसमॉस ROSKOSMOS ने बताया कि स्पेसक्राफ्ट का कुछ अता-पता नहीं चल रहा है।
एक दिन पहले रॉस्कोसमॉस ने प्री-लैंडिंग ऑर्बिट में लूना-25 को भेजने में दिक्कत के बारे में बताया था। रॉस्कोसमॉस ने रविवार को बयान में कहा कि स्पेसक्राफ्ट एक अप्रत्याशित कक्षा में चला गया और चंद्रमा की सतह से टकराकर वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
तब असामान्य स्थित पैदा हो गई थी
स्पेस एजेंसी ने बताया कि मिशन कंट्रोल ने शनिवार को स्पेसक्राफ्ट को 11 बजकर 10 मिनट (GMT) प्री-लैंडिंग ऑर्बिट में ले जाने की कोशिश की तो एक ‘असामान्य स्थिति’ पैदा हो गई। 21 अगस्त को लूना-25 को चंद्रमा पर उतरना था।
रॉस्कोसमॉस ने आगे कहा, ‘ऑपरेशन के दौरान, असामान्य स्थिति तब पैदा हुई, जब तय पैरामीटर्स पर मैनूवर्स नहीं हो पा रहा था।’ रूस ने ही पहली बार धरती की कक्षा के बाहर 1957 में स्पूतनिक-1 लॉन्च किया था. इसके बाद साल 1961 में सोवियत एस्ट्रोनॉट यूरी गागरिन स्पेस में जाने वाले पहले शख्स बने. स्पेस एजेंसी ने बताया कि लूना-25 क्रैश क्यों हुआ, उसके कारणों की जांच की जाएगी.
भारत-रूस के बीच थी रेस
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहले पहुंचने के लिए भारत के चंद्रयान-3 और रूस के लूना-25 के बीच रेस चल रही थी। चंद्रयान को 23 अगस्त को शाम 6 बजकर 4 मिनट पर लैंडिंग करनी है। बता दें कि चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव अपने संभावित जल संसाधनों और कमाल की भूवैज्ञानिक खासियतों के कारण वैज्ञानिकों की दिलचस्पी का केंद्र बना हुआ है। यह अज्ञात जगह भविष्य के मून मिशन के लिए जरूरी है, जिसमें अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का आगामी आर्टेमिस-तीन मिशन भी शामिल है, जिसका मकसद पांच दशक के अंतराल के बाद मानव को चंद्रमा पर ले जाना है।


