Rajasthan Civic Polls: राजस्थान निकाय चुनाव से पहले पार्षदों की गिरफ्तारी को लेकर विवाद बढ़ा और हाईकोर्ट ने देर रात कई मामलों में राहत दी।
Rajasthan Civic Polls: राजस्थान निकाय चुनाव से पहले सुनवाई
इंफोपोस्ट/Rajasthan Civic Polls
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!राजस्थान में नगर निकायों के प्रमुख पदों के चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक और कानूनी गतिविधियां तेज हो गईं। बीकानेर, हनुमानगढ़, नागौर और अन्य निकाय क्षेत्रों में पार्षदों की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद सामने आया।
राजस्थान हाईकोर्ट ने रविवार देर रात कई मामलों में विशेष सुनवाई की। अदालत ने हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों तथा बीकानेर के निर्वाचित कांग्रेस पार्षद मकसूद अहमद से जुड़े मामलों में गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया। रिपोर्टों के अनुसार, विशेष सुनवाई रात करीब 10 बजे शुरू हुई और कार्यवाही रात करीब 2 बजे तक चली।
आधी रात हाईकोर्ट में हुई सुनवाई
Rajasthan Civic Polls: रविवार को छुट्टी के बावजूद राजस्थान हाईकोर्ट में चुनाव से जुड़े मामलों की तत्काल सुनवाई के लिए विशेष व्यवस्था की गई। मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर विशेष पीठ गठित की गई और उन याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिनमें पार्षदों और उम्मीदवारों ने चुनाव से ठीक पहले गिरफ्तारी की आशंका जताई थी।
हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों की याचिका पर न्यायमूर्ति नूपुर भाटी की पीठ ने रात करीब 10 बजे सुनवाई शुरू की। कार्यवाही आधी रात के बाद भी जारी रही और अदालत ने पार्षदों की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी। इस आदेश से संबंधित पार्षदों को तत्काल पुलिस कार्रवाई से राहत मिली।
बीकानेर में मकसूद अहमद को राहत
Rajasthan Civic Polls: बीकानेर के वार्ड 18 से निर्वाचित कांग्रेस पार्षद मकसूद अहमद का मामला भी देर रात हाईकोर्ट पहुंचा। न्यायमूर्ति सुनील बेनीवाल की पीठ ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए रात करीब 11:15 बजे गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई। अदालत ने उन्हें 30 सितंबर को पूछताछ के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
रिपोर्टों के अनुसार मकसूद अहमद को करीब दो महीने पुरानी एफआईआर के संबंध में नोटिस दिया गया था। पुलिस ने उन्हें और वार्ड 50 के पार्षद नवरत्न डागा को 21 सितंबर की सुबह उपस्थित होने के लिए कहा था। इसी दिन बीकानेर में मेयर चुनाव होना था। याचिका में पुलिस कार्रवाई के समय पर सवाल उठाया गया था।
चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
राजस्थान में इस चरण में 273 शहरी निकायों के मेयर, सभापति और अध्यक्ष पदों के लिए चुनाव निर्धारित थे। इनमें बीकानेर, पाली, अजमेर, उदयपुर और अलवर नगर निगम भी शामिल थे। जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों के मेयर चुनाव 25 सितंबर को होने हैं।
चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए बाड़ाबंदी की। जिन निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, वहां निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई। स्थानीय निकायों के प्रमुख पदों के चुनाव में पार्षदों का समर्थन सीधे तौर पर बोर्ड गठन के समीकरण को प्रभावित करता है।
हनुमानगढ़ में बदला राजनीतिक समीकरण
हनुमानगढ़ का चुनावी गणित इस पूरे घटनाक्रम में विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 60 सीटों वाले निकाय में भाजपा ने 15 सीटें जीतीं, जबकि स्वतंत्र विधायक गणेशराज बंसल समर्थित उम्मीदवारों ने 32 सीटें हासिल कीं। ऐसे में बंसल समर्थक पार्षदों की भूमिका अध्यक्ष पद के चुनाव में महत्वपूर्ण हो गई।
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में रविवार को स्वतंत्र विधायक गणेशराज बंसल की गिरफ्तारी की खबर सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार उन्हें निकाय प्रमुख के चुनाव से एक दिन पहले हिरासत में लिया गया। पुलिस सूत्रों ने उनके खिलाफ पुराने मामलों और सरकारी जमीन से जुड़े एक मामले का उल्लेख किया, जबकि पुलिस अधिकारियों की ओर से तत्काल विस्तृत सार्वजनिक बयान उपलब्ध नहीं था।
विधायक की गिरफ्तारी पर भी उठे सवाल
गणेशराज बंसल के समर्थकों ने उनकी गिरफ्तारी के समय को लेकर सवाल उठाए और इसे चुनावी परिस्थितियों से जोड़कर देखा। दूसरी ओर, पुलिस से जुड़े सूत्रों के अनुसार कार्रवाई लंबित मामलों से संबंधित थी। इस मामले में राजनीतिक आरोप और पुलिस कार्रवाई के आधार को अलग-अलग देखना जरूरी है।
किसी गिरफ्तारी के समय को देखते हुए उसके राजनीतिक उद्देश्य का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए एफआईआर, पुलिस की जांच, गिरफ्तारी के आधार और अदालत के रिकॉर्ड को देखना आवश्यक होगा। बंसल की गिरफ्तारी से जुड़े मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहने की संभावना है।
कुचेरा के तेजपाल मिर्धा को राहत
रविवार को राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर की कुचेरा नगरपालिका के निर्वाचित पार्षद और पूर्व चेयरमैन तेजपाल मिर्धा को भी गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मामला दर्ज किया था। रिपोर्ट के अनुसार एफआईआर 18 सितंबर को दर्ज हुई और आरोप उनके 2015 से 2018 के बीच चेयरमैन रहने के दौरान कथित अनियमितताओं से जुड़े हैं।
तेजपाल मिर्धा 14 सितंबर को कुचेरा के वार्ड 21 से पार्षद चुने गए थे और बाद में उन्होंने चेयरमैन पद के लिए नामांकन दाखिल किया। अदालत ने मामले की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए यह पूछा कि 2018 की शिकायत से जुड़ी कार्रवाई लगभग आठ वर्ष तक लंबित क्यों रही और संबंधित अनुमति 18 सितंबर को ही क्यों मिली। हालांकि अदालत ने इस स्तर पर एफआईआर को चुनावी हस्तक्षेप या वैध कानूनी कार्रवाई के रूप में अंतिम रूप से परिभाषित नहीं किया।
श्रीविजयनगर और अन्य मामलों में भी राहत
श्रीविजयनगर नगरपालिका के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार सुशील मिर्धा उर्फ बिट्टू मिर्धा को भी हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिलने की रिपोर्ट सामने आई। रविवार को नागौर और श्रीगंगानगर से जुड़े मामलों में भी चुनाव से पहले गिरफ्तारी की आशंका को लेकर अदालत का रुख किया गया था।
इससे यह स्पष्ट हुआ कि मामला केवल बीकानेर या हनुमानगढ़ तक सीमित नहीं था। कई निकायों में चुनाव से ठीक पहले दर्ज मामलों और संभावित पुलिस कार्रवाई को लेकर उम्मीदवारों तथा पार्षदों ने न्यायिक संरक्षण की मांग की। अदालत ने अलग-अलग मामलों के तथ्यों के आधार पर अंतरिम आदेश जारी किए।
बाड़ाबंदी से लेकर आरोप-प्रत्यारोप तक
राजस्थान के निकाय चुनावों में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए बाड़ाबंदी की। दोनों दलों की ओर से पार्षदों को तोड़ने या अपने पक्ष में करने की कोशिशों के आरोप भी लगाए गए। हालांकि इन राजनीतिक आरोपों को संबंधित दलों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
ऐसे माहौल में किसी पार्षद की गिरफ्तारी या पुलिस कार्रवाई का चुनावी असर पड़ सकता है, क्योंकि मेयर और सभापति पद के चुनाव में प्रत्येक वोट महत्वपूर्ण हो सकता है। फिर भी किसी पुलिस कार्रवाई को केवल उसके समय के आधार पर राजनीतिक कार्रवाई मान लेना उचित नहीं होगा। संबंधित एफआईआर, जांच और अदालत के आदेश को साथ देखकर ही स्थिति का आकलन किया जा सकता है।
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का मतलब
हाईकोर्ट द्वारा गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित एफआईआर या आरोप समाप्त हो गए हैं। अंतरिम संरक्षण एक अस्थायी न्यायिक व्यवस्था है, जिसके तहत याचिकाकर्ता को अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी से राहत मिलती है। संबंधित जांच या अदालत की आगे की कार्यवाही जारी रह सकती है।
मकसूद अहमद के मामले में अदालत ने गिरफ्तारी पर रोक के साथ पूछताछ के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अदालत ने जांच की प्रक्रिया को पूरी तरह रोकने के बजाय तत्काल गिरफ्तारी से संरक्षण दिया है। अन्य मामलों में भी अंतिम स्थिति आगे की सुनवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट होगी।
बीकानेर में सामने आया चुनाव परिणाम
हाईकोर्ट की देर रात सुनवाई के अगले दिन बीकानेर नगर निगम के मेयर चुनाव का परिणाम भी सामने आया। कांग्रेस के अनिल कल्ला ने मेयर पद पर जीत दर्ज की। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस ने 42 वार्डों में जीत हासिल की थी, जबकि बहुमत के लिए 41 पार्षदों का समर्थन जरूरी था। भाजपा को 27 वार्ड मिले थे।
बीकानेर का परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्षद मकसूद अहमद को हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर अंतरिम राहत मिली थी। हालांकि दोनों घटनाओं के बीच किसी प्रत्यक्ष कारण-परिणाम का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। अदालत का आदेश एक अलग कानूनी प्रक्रिया और मेयर का चुनाव अलग चुनावी प्रक्रिया है।
अन्य नगर निगमों में भी हुए चुनाव
Rajasthan Civic Polls: सोमवार को राज्य के कई प्रमुख नगर निगमों में मेयर पद के लिए मतदान और परिणाम सामने आए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भाजपा ने अजमेर, उदयपुर, अलवर और पाली सहित कई नगर निगमों में मेयर पद हासिल किया, जबकि बीकानेर में कांग्रेस को सफलता मिली। जयपुर, जोधपुर और कोटा के मेयर चुनाव 25 सितंबर को होने हैं।
इससे राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों का पहला बड़ा चरण पूरा हुआ। हालांकि अलग-अलग नगर निकायों में स्थानीय समीकरण अलग रहे और कई जगह निर्दलीय तथा अन्य दलों के पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। परिणामों से यह भी सामने आया कि स्थानीय निकायों की राजनीति में वार्ड स्तर के समीकरण राज्य की व्यापक राजनीतिक तस्वीर से अलग हो सकते हैं।
आगे न्यायिक प्रक्रिया पर रहेगी नजर
राजस्थान निकाय चुनाव का यह घटनाक्रम स्थानीय चुनावों में पुलिस कार्रवाई, पार्षदों की स्वतंत्रता, बाड़ाबंदी और न्यायिक हस्तक्षेप जैसे मुद्दों को सामने लाता है। हाईकोर्ट की विशेष सुनवाई इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि अदालत ने रविवार की छुट्टी के दिन देर रात तत्काल सुनवाई की और चुनाव से पहले गिरफ्तारी की आशंका वाले कई मामलों में अंतरिम संरक्षण दिया।
फिलहाल उपलब्ध तथ्यों में प्रमुख बात यह है कि हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों और बीकानेर के मकसूद अहमद को तत्काल गिरफ्तारी से राहत मिली है। कुचेरा और अन्य निकायों से जुड़े मामलों में भी अदालत ने अंतरिम आदेश दिए हैं। इन आदेशों को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। संबंधित मामलों की अगली सुनवाई, पुलिस जांच और अदालत के आगे के आदेशों से कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।


