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पीसीएस 2018: एमएलसी देवेंद्र ने उठाई यूपी के छात्रों की समस्या

October 6, 2020
pcs-2018

शिवांश सिंह

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लखनऊ। (pcs 2018) पीसीएस 2018 के प्री में उत्तर प्रदेश पर केंद्रित सवाल न के बराबर थे। मेंस में भी नाममात्र के सवाल यूपी पर थे। पहले 15-20 सवाल यूपी केंद्रित होते थे। उसका फायदा यूपी के लोगों को मिलता था। लेकिन इस बार उसी प्रदेश के उम्मीदवारों को झटका लग गया, जिसके लिए अधिकारी चुने जाने थे।

(pcs 2018) उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का तर्क है कि पैटर्न बदलने से तैयारी आसान होगी। लेकिन सवाल है कि आपको तैयारी आसान करनी है या यूपी के हिसाब से अफसर चुनने हैं। प्रादेशिक सेवाओं के लिए चुने जाने वाले अफसरों को प्रदेश का ज्ञान तो होना ही चाहिए। पैटर्न में केंद्र की नकल के बाद पीसीएस के नतीजों से यह सवाल और प्रासंगिक होते जा रहे हैं।

(pcs 2018) एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र 

शायद यही वजह है कि एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिख कर उत्तर प्रदेश के प्रतियो​गी छात्रों की इसी समस्या को उठाया है। अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि PCS 2018 परीक्षा पैटर्न अचानक बदल दिए जाने से हिंदी भाषी प्रतियोगी छात्र प्रतिभा के बावजूद चयनित होने से वंचित रह गए।

प्रतियोगी छात्र पिछले चार माह से निम्नलिखित विसंगतियों की तरफ आपका ध्यान आकर्षित कर रहे थे। उस समय मैंने विसंगतियों को सदन में उठाया था। लेकिन मेरी बात अनसुनी कर दी गई। पुनः पैटर्न बदलने से प्रभावित और उम्र सीमा बीत जाने के कारण प्रभावित प्रतियोगी छात्रों के लिए दो अतिरिक्त अवसर देने की मांग करता हूं।

(pcs 2018) मुख्य परीक्षा में स्केलिंग नहीं की गई। जबकि विज्ञापन में स्पष्ट रूप से प्रावधान है। माननीय उच्चतम न्यायालय का इस संबंध में दिशानिर्देश भी है, जिसका अनुपालन नहीं हुआ। स्केलिंग न होने के कारण विज्ञान विषय के अभ्यर्थियों को फायदा हुआ।

(pcs-2018) मानविकी विषय लेकर परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को बड़ा नुकसान

जबकि मानविकी विषय लेकर परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। गणित और विज्ञान के अभ्यर्थियों को तो पूरे अंक मिल जाते हैं लेकिन मानविकी विषय के अभ्यर्थियों को पूरे अंक नहीं मिल पाते। इसी संतुलन के लिए स्केलिंग की व्यवस्था की गई थी। इसलिए परिणाम बदल गए।

(pcs 2018) परीक्षा के परिणाम के विश्लेषण में यह निष्कर्ष निकाला कि कुल 976 पदों में से बाहरी राज्यों के लगभग 500 चयनित हुए। जबकि उत्तर प्रदेश के लगभग 400 अभ्यर्थी चयनित हुए। अन्य राज्यों में अपने प्रदेश के लिए प्रतियोगियों के लिए विशेष उम्र सीमा निर्धारित की है परंतु ऐसा यहां कुछ भी नहीं है।

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