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एमबीएफ में लाखों रोजगार सृजित करने और 15,000 करोड़ से बड़ी अर्थव्यवस्था विकसित करने की क्षमता

M Sajid February 22, 2026
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नई दिल्ली: देश में बढ़ती आवारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक नया प्रस्ताव सामने आया है। पशु अधिकारों के लिए कार्यरत एक्टिविस्ट्स के एक समूह ने सभी राज्य सरकारों से “मैन्स बेस्ट फ्रेंड (एमबीएफ)” मॉडल अपनाने की अपील की है।

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दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एनिमल एक्टिविस्ट संक्षय बब्बर ने कहा कि एमबीएफ एक राष्ट्रीय सार्वजनिक सुरक्षा एवं प्रशासनिक मिशन है, जिसका उद्देश्य भारत में मानव–डॉग संघर्ष का स्थायी समाधान प्रस्तुत करना है।

उन्होंने बताया कि यह पहल 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की विनियमित कैनाइन अर्थव्यवस्था विकसित करने और लाखों रोजगार सृजित करने की क्षमता रखती है। उनके अनुसार, एमबीएफ मॉडल आवारा पशुओं को समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक और आर्थिक अवसर के रूप में देखता है।

क्या है एमबीएफ मॉडल?

एमबीएफ मॉडल पहचान प्रणाली, 80% से अधिक टीकाकरण कवरेज, नसबंदी ट्रैकिंग, व्यवहार मॉनिटरिंग और सामुदायिक कुत्तों की संरचित तैनाती को एक एकीकृत जवाबदेह प्रणाली में जोड़ता है।

इस मॉडल के तहत:

  • मौजूदा एनिमल पाउंड्स को सरकारी पशु अस्पतालों और ट्रॉमा यूनिट्स में बदला जाएगा।

  • नसबंदी क्षमता बढ़ाई जाएगी और पशु चिकित्सकों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

  • एक केंद्रीकृत मोबाइल ऐप के माध्यम से नगर निगम और फीडर्स मिलकर नसबंदी, फीडिंग ज़ोन, स्वास्थ्य जांच, व्यवहार रिपोर्ट, जियोटैग्ड डाटाबेस, माइक्रोचिपिंग और गोद लेने की प्रक्रिया को ट्रैक कर सकेंगे।

रोजगार और राजस्व का अवसर

संक्षय बब्बर ने कहा कि यह मॉडल केवल पशु कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों के लिए सतत राजस्व और रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकता है। मान्यता प्राप्त निजी चिकित्सा केंद्रों को नसबंदी सेवाओं में शामिल करने, थेरेपी डॉग्स की तैनाती, सुरक्षा सहयोगी के रूप में प्रशिक्षित सोसायटी डॉग्स, और रिफ्लेक्टिव कॉलर अभियान जैसे कदमों से एक संगठित कैनाइन इकोनॉमी विकसित होगी।

साथ ही इंडी डॉग्स को गोद लेने को प्रोत्साहन और विदेशी नस्लों पर संरचित टैक्स व्यवस्था लागू करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

नियंत्रित सह-अस्तित्व पर जोर

एमबीएफ मॉडल आवारा पशुओं को हटाने की नीतियों से अलग हटकर नियंत्रित सह-अस्तित्व पर जोर देता है। इसका उद्देश्य काटने की घटनाओं में कमी, रेबीज़ के खतरे को समाप्त करना और नागरिक व्यवस्था बहाल करना है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभिन्न पशु कल्याण संगठनों ने भाग लिया और इस पहल का समर्थन किया।

अंत में संक्षय बब्बर ने कहा, “भारत सदैव पशु-प्रेमी राष्ट्र रहा है। हमारी सांस्कृतिक विरासत और परंपराएं मानव और पशु के सह-अस्तित्व की मिसाल हैं। एमबीएफ के माध्यम से हम उसी परंपरा को आधुनिक प्रशासनिक ढांचे में आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं।”

About Author

M Sajid

editor

Md Sajid एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने TV 100 News, NUBT News और Eros Times जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य किया है। निष्पक्ष रिपोर्टिंग, जमीनी मुद्दों की समझ और जनहित से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाने के लिए वे जाने जाते हैं।

पत्रकारिता के साथ-साथ वे डिजिटल मीडिया में भी सक्रिय हैं। उनके द्वारा संचालित ABC WORLD HINDI YouTube चैनल को उल्लेखनीय सफलता मिली है, जिसके लिए उन्हें YouTube Silver Play Button से सम्मानित किया गया। वे लगातार सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को अपनी रिपोर्टिंग के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचा रहे हैं।

“सच्ची खबर, निष्पक्ष सोच और जनता की आवाज़ को मंच देना ही मेरी पत्रकारिता का उद्देश्य है।” – Md Sajid

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