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India-US Trade Agreement: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर किसानों की चिंता

infopost June 22, 2026
India-US Trade Agreement

Shrikant SinghIndia-US Trade Agreement: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने किसानों के हितों की सुरक्षा की मांग उठाई। राकेश टिकैत और युद्धवीर सिंह ने एमएसपी, कृषि आयात और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई।

India-US Trade Agreement: भाकियू ने प्रधानमंत्री से की हितों की सुरक्षा की मांग

नोएडा। India-US Trade Agreement: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते (इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट) को लेकर किसानों की चिंताएं अब खुलकर सामने आने लगी हैं। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने इस संभावित समझौते को लेकर केंद्र सरकार से किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। इसी विषय पर रविवार को सेक्टर-29 स्थित नोएडा मीडिया क्लब में आयोजित एक प्रेसवार्ता में भाकियू नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित पत्र जारी करते हुए कृषि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।

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प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत और राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं से जुड़ी विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और सार्वजनिक सूचनाओं ने किसानों के बीच चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। उनका कहना था कि यदि समझौते के तहत अमेरिकी कृषि एवं खाद्य उत्पादों को भारतीय बाजार में अधिक पहुंच दी जाती है और आयात शुल्क में कटौती की जाती है, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव भारतीय किसानों की आय, उत्पादन क्षमता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

भारतीय किसानों की प्रतिस्पर्धा असमान

राकेश टिकैत ने कहा कि अमेरिका अपने किसानों को बड़े पैमाने पर सरकारी सब्सिडी उपलब्ध कराता है, जबकि भारत के अधिकांश किसान सीमित संसाधनों और बढ़ती लागत के बीच खेती करने को मजबूर हैं। ऐसे में सब्सिडी प्राप्त अमेरिकी कृषि उत्पादों के साथ भारतीय किसानों की प्रतिस्पर्धा असमान होगी। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि डेयरी, पोल्ट्री और अन्य कृषि उत्पादों के आयात में बढ़ोतरी होने पर भारतीय किसानों, पशुपालकों और इससे जुड़े छोटे व्यवसायों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

भाकियू नेताओं ने यह भी कहा कि भारत की कृषि व्यवस्था केवल किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। यदि व्यापार समझौते में कृषि क्षेत्र से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई, तो इसका प्रभाव ग्रामीण रोजगार, खाद्य सुरक्षा और स्थानीय बाजारों पर भी दिखाई दे सकता है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मुद्दे को उठाया

राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह ने प्रेसवार्ता के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मुद्दे को विशेष रूप से उठाया। उन्होंने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मंच पर अमेरिका लगातार भारत की एमएसपी व्यवस्था और कृषि सहायता नीतियों पर सवाल उठाता रहा है। ऐसे में किसानों के बीच यह आशंका है कि व्यापार समझौते के दौरान एमएसपी व्यवस्था पर किसी प्रकार का दबाव बनाया जा सकता है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि एमएसपी केवल एक आर्थिक व्यवस्था नहीं बल्कि करोड़ों किसानों के लिए सुरक्षा कवच है। यदि इसमें किसी प्रकार की कटौती, बदलाव या कमजोर करने की कोशिश की जाती है तो इसका सीधा असर विशेष रूप से धान और गेहूं उत्पादक किसानों पर पड़ेगा। इसलिए सरकार को इस विषय पर पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए।

भाकियू नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में किसानों, मछुआरों, डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने मांग की कि ऐसा कोई समझौता न किया जाए जिससे देश की कृषि व्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और किसानों की आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़े।

केंद्र सरकार पर भरोसा, किसानों की चिंता पर ध्यान दिया जाएगा

प्रेसवार्ता में राकेश टिकैत और युद्धवीर सिंह ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन किसानों से जुड़े हर मुद्दे पर लगातार निगरानी रखे हुए है और उनकी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार किसानों की चिंताओं को गंभीरता से लेगी और किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते में देश के कृषि हितों से समझौता नहीं करेगी।

India-US Trade Agreement: इस अवसर पर सुभाष चौधरी, परविंदर अवाना, रविंद्र भगत, अनिल अवाना, महेश खटाना, सुधीर भाटी, विकास गुर्जर, संदीप अवाना, प्रमोद टाइगर, राजा चौधरी, प्रशांत चौधरी, लक्की पांडे, अमित अवाना, नरेंद्र भाटी, नितिराज बैसोया, धीरज भाटी, आजाद चौधरी, समीर चौधरी और तसलीम चौधरी सहित भारतीय किसान यूनियन के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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