Houthi Saudi Arabia Attack: रियाद पर मिसाइल हमले के दावे और ऊर्जा ठिकानों पर कार्रवाई से सऊदी अरब तथा हूती संघर्ष नए चरण में पहुंच गया है।
Houthi Saudi Arabia Attack: रियाद पर हमले से मचा हड़कंप
इंफोपोस्ट/Houthi Saudi Arabia Attack
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद समेत कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। 19 सितंबर 2026 को हुए इन घटनाक्रमों के बाद रियाद में हवाई हमले की चेतावनी जारी की गई। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि राजधानी की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवाई सुरक्षा प्रणाली ने रोककर नष्ट कर दिया। हूती पक्ष ने रियाद में संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही, जबकि सऊदी अधिकारियों ने नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर जोर दिया। ([Reuters][1])
रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास ईंधन भंडारण क्षेत्र से आग और काले धुएं का गुबार दिखाई दिया। घटना के बाद कुछ समय के लिए उड़ानों पर असर पड़ने की खबरें सामने आईं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई कि हवाई अड्डे के ईंधन क्षेत्र को सीधे हूती मिसाइल ने निशाना बनाया था। सऊदी अधिकारियों की ओर से रियाद की ओर आने वाली मिसाइल को रोकने की पुष्टि हुई, जबकि अन्य दावों को अलग-अलग पक्षों के बयानों के रूप में देखा जा रहा है। ([Internazionale][2])
हूती विद्रोहियों ने क्या दावा किया
Houthi Saudi Arabia Attack: हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने रियाद और सऊदी अरब के अन्य हिस्सों में सैन्य कार्रवाई की जानकारी दी। हूती पक्ष के मुताबिक बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों तथा ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। समूह ने रियाद के अलावा लाल सागर के तट पर स्थित यानबू में सऊदी तेल कंपनी अरामको से जुड़े एक ऊर्जा प्रतिष्ठान को निशाना बनाने का दावा भी किया। इन दावों के मुताबिक हमले व्यापक सैन्य अभियान का हिस्सा थे। ([Kurdistan24 – کوردستان 24][3])
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इसके जवाब में कहा कि रियाद की ओर आने वाली बैलिस्टिक मिसाइल को रोक दिया गया। गठबंधन ने यह भी दावा किया कि बिशा, ताइफ, फरासान और यानबू समेत अन्य स्थानों को निशाना बनाने के प्रयासों को विफल किया गया। हूती पक्ष और सऊदी अधिकारियों के बयानों में अंतर होने के कारण प्रत्येक हमले के प्रभाव को अलग-अलग सत्यापित करना जरूरी है। ([Al Jazeera][4])
ऊर्जा ढांचे पर क्यों बढ़ी चिंता
सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है और उसके ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर किसी भी हमले का असर केवल स्थानीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता। यानबू लाल सागर के किनारे स्थित एक महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र है। मौजूदा संघर्ष में लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की भूमिका भी बढ़ गई है, क्योंकि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। ([Al Jazeera][5])
हाल के सप्ताहों में हूती हमलों ने सऊदी ऊर्जा ढांचे को पहले भी प्रभावित किया है। सितंबर की शुरुआत में सऊदी अधिकारियों ने देश के दक्षिणी हिस्सों में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिष्ठानों पर हमलों की पुष्टि की थी। उन घटनाओं में दर्जनों लोगों के घायल होने और कुछ स्थानों पर आग लगने की जानकारी सामने आई थी। हूती पक्ष ने उन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए उन्हें सऊदी कार्रवाई के जवाब में किया गया अभियान बताया था। ([Al Jazeera][5])
यमन संघर्ष फिर क्यों भड़का
सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष नया नहीं है, लेकिन 2026 में इसकी तीव्रता फिर बढ़ी है। 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से बड़े पैमाने की लड़ाई में कमी आई थी। इसके बाद लंबे समय तक अपेक्षाकृत शांत स्थिति रही, लेकिन इस साल जुलाई से दोनों पक्षों के बीच सैन्य गतिविधियां दोबारा बढ़ने लगीं। अब संघर्ष का प्रभाव यमन की सीमाओं से निकलकर सऊदी शहरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों तक दिखाई दे रहा है। ([Al Jazeera][5])
इस बढ़ते तनाव के पीछे लाल सागर और बाब अल-मंदेब क्षेत्र का रणनीतिक महत्व भी है। हूती लड़ाके पश्चिमी यमन में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सऊदी समर्थित यमनी सरकार उनसे जुड़े इलाकों पर दबाव बढ़ा रही है। विश्लेषकों के अनुसार समुद्री मार्गों पर नियंत्रण और पश्चिमी तट पर सैन्य स्थिति मजबूत करना हूती रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। ([Al Jazeera][5])
तुर्की ने सऊदी को मदद की बात कही
हूती हमलों के बीच तुर्की ने सऊदी अरब की सुरक्षा जरूरतों में सहायता देने की इच्छा जताई है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि सऊदी अरब को कुछ सैन्य और तकनीकी जरूरतें हो सकती हैं और अंकारा उन्हें पूरा करने में मदद कर सकता है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि संभावित सहायता किस रूप में होगी। ([Al Jazeera][4])
तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने हाल में मक्का संयुक्त रक्षा समझौता किया है। इस समझौते में तीनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग का प्रावधान है। मौजूदा हूती हमलों के बीच इस समझौते की वास्तविक भूमिका पर भी चर्चा बढ़ी है। हालांकि, तुर्की की ओर से सैन्य सहायता की पेशकश को सीधे युद्ध में शामिल होने की घोषणा के रूप में नहीं देखा गया है। ([Al Jazeera][4])
अमेरिका ने नागरिकों को चेताया
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका ने क्षेत्र में मौजूद अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने क्षेत्र में यात्रा से जुड़े जोखिमों को लेकर चेतावनी जारी की है और संभावित उड़ान रद्द होने तथा अन्य यात्रा संबंधी व्यवधानों के लिए तैयार रहने को कहा है। यह सलाह ऐसे समय आई है जब सऊदी अरब पर हूती हमलों की आवृत्ति बढ़ी है। ([Zeta][6])
अमेरिका की स्थिति इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वाशिंगटन ने सऊदी अरब के साथ खुफिया जानकारी साझा करने और लक्ष्य संबंधी सहायता देने की बात कही है, लेकिन सीधे हूती ठिकानों पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर अलग रुख अपनाया गया है। इससे क्षेत्रीय सहयोगियों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। ([Al Jazeera][4])
तेल बाजार और समुद्री रास्तों पर असर
सऊदी अरब पर हमलों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की चिंता भी बढ़ाई है। रियाद और यानबू जैसे स्थानों पर हमलों के दावे ऐसे समय सामने आए हैं जब लाल सागर तथा आसपास के समुद्री मार्ग पहले ही सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। तेल और गैस की आवाजाही में किसी बड़े व्यवधान की आशंका बाजारों में कीमतों पर असर डाल सकती है। ([Reuters][7])
हालांकि, हमलों के बावजूद क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह बाधित होने की स्थिति सामने नहीं आई है। उपलब्ध बाजार रिपोर्टों के मुताबिक सऊदी अरब ने वैकल्पिक निर्यात मार्गों और उपलब्ध बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करते हुए तेल आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की है। इसका मतलब है कि सैन्य तनाव और वास्तविक वैश्विक आपूर्ति प्रभाव को अलग-अलग समझना जरूरी है। ([Reuters][7])
आगे किस दिशा में जाएगा संघर्ष
Houthi Saudi Arabia Attack: मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सऊदी अरब और उसके सहयोगी हूती हमलों का जवाब किस स्तर पर देते हैं। हूती विद्रोहियों ने सऊदी शहरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की क्षमता दिखाने का दावा किया है, जबकि सऊदी पक्ष अपनी हवाई सुरक्षा और सैन्य क्षमता के जरिए हमलों को रोकने की कोशिश कर रहा है। दोनों पक्षों के बीच यह टकराव जितना लंबा चलेगा, क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार पर दबाव उतना बढ़ सकता है। ([Al Jazeera][4])
फिलहाल रियाद पर हुए हमले और यानबू में ऊर्जा प्रतिष्ठान को निशाना बनाने के दावे ने यमन संघर्ष को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। तुर्की की सहायता पेशकश, अमेरिकी सुरक्षा चेतावनी और लाल सागर की रणनीतिक स्थिति इस संकट को केवल सऊदी-हूती विवाद से आगे ले जाती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सैन्य कार्रवाई बढ़ती है या क्षेत्रीय देश कूटनीतिक रास्ते से तनाव कम करने की कोशिश करते हैं। ([Al Jazeera][4])


