Hindu vs Buddhist: उत्तर प्रदेश के हजारों मीडिया कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा चुका है। ज्यादातर हिंदू हैं। उन हिंदू कर्मचारियों का पैसा तक मार लिया गया है। लाखों फैक्टरियों से हजारों हिंदू कर्मचारी नौकरी से बेदखल किए जा चुके हैं। प्रदेश के करोड़ों लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाने का फैसला किया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!Hindu vs Buddhist: शोषितों की सुनवाई से प्रदेश सरकार कर रही है परहेज
श्रीकांत सिंह
नई दिल्ली। Hindu vs Buddhist: आज का खास मुद्दा है हिंदू बनाम बौद्ध। जी हां। आप सोच रहे होंगे कि मैं बसपा की बात कर रहा हूं। लेकिन गलत जवाब। तो यह मुद्दा एकायक कहां से टपक पड़ा? जाहिर है आप शायद न दे पाएं जवाब। तो बता देते हैं कि मुद्दा श्रम कानूनों को समाप्त कर दिए जाने से पैदा हुआ है।
उत्तर प्रदेश की बात करें तो हजारों मीडिया कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा चुका है। उनमें ज्यादातर हिंदू हैं। यही नहीं, उन हिंदू कर्मचारियों का पैसा तक मार लिया गया है। यह तो एक क्षेत्र की बात हुई।
दुखी हिंदू किसान आंदोलित
प्रदेश की लाखों फैक्टरियों से हजारों हिंदू कर्मचारी नौकरी से बेदखल किए जा चुके हैं। हिंदू मजदूरों को भी इन्हीं हालात से गुजरना पड़ रहा है। प्रदेश के तमाम किसान आंदोलित हैं, जिनमें हिंदुओं की संख्या ज्यादा है।
अब भाजपा सरकारों को तय करना होगा कि हिंदू मालिकों का साथ देना है या हिंदू शोषितों का। क्योंकि हिंदू शोषितों की सुनवाई करने से प्रदेश सरकार परहेज कर रही है। मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत करने का कोई निष्कर्ष नहीं निकल रहा है। प्रदेश के वरिष्ठ श्रम अधिकारियों ने मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगा रखी है। प्रदेश की पुलिस का भी लगभग वही रवैया है।
राजेंद्र पाल गौतम कराएंगे धर्मांतरण
सरकार की इसी नीति से तंग आकर प्रदेश के करोड़ों लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाने का फैसला किया है। इस स्वर्णिम अवसर को आम आदमी पार्टी कैसे हाथ से निकलने दे सकती है? बौद्ध धर्म में धर्मांतरण का ठेका दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को दिया गया है।
भाजपा सरकार ने श्रम कानूनों पर ध्यान न दिया तो प्रदेश के दस करोड़ लोग बौद्ध बन जाएंगे। और आने वाले उत्तर प्रदेश के चुनावों में भाजपा को मुंह की खानी पड़ सकती है। क्योंकि राम मंदिर मुद्दा अब लगभग समाप्त सा हो गया है। यह मैं नहीं कह रहा हूं। यह कह रहे हैं गौतम साहब।
भाजपा किस प्रकार अपने ही जाल में फंसती नजर आ रही है। उसने कभी भी सिस्टम को काम नहीं करने दिया। और अब सिस्टम को ही समाप्त करने में लगी है। इस बारे में आप क्या सोचते हैं कमेंट करके जरूर बताएं।


