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Golden card: गोल्डन कार्ड क्या है? इसके लिए किन गांवों में चलेगा अभियान?

November 2, 2020
Golden card

Golden card: आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को इलाज के लिए केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत गरीब और मजदूर वर्ग के लोग सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में 5 लाख रुपये तक का इलाज बिल्कुल मुफ्त करवा सकते हैं। इलाज का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती है। यह योजना देश सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है। गोल्डन कार्ड योजना भी इसी स्कीम का एक हिस्सा है।

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Golden card: कार्ड बनाने के लिए पांच गांवों में शिविर की व्यवस्था

इंफोपोस्ट न्यूज, नोएडा। Golden card: प्रधानमंत्री जन आरोग्य (आयुष्मान भारत) योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए एक बार फिर अभियान चलाया जाएगा। विशेष अभियान चला कर उन गांवों में शिविर लगाया जाएगा, जहां एक भी गोल्डन कार्ड नहीं बना है।

ऐसे गांवों की सूची तैयार कर ली गई है। जनपद में ऐसे पांच गांव हैं। आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से लाभार्थियों तक शिविर की सूचना पहुंचायी जा रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. दीपक ओहरी ने बताया कि कोविड-19 के कारण गोल्डन कार्ड बनाने का काम प्रभावित हुआ था।

नोएडा के पांच गांवों में एक भी गोल्डन कार्ड नहीं

सभी लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनवाने हैं। ताकि सभी को लाभ मिल सके। नोएडा में पांच गांव ऐसे हैं जहां एक भी गोल्डन कार्ड नहीं बना है। अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) अमित मोहन प्रसाद ने सभी लाभार्थियों के लिए गोल्डन कार्ड बनाने के निर्देश दिए हैं।

योजना के नोडल अधिकारी डॉ. अजय कुमार ने बताया कि अभियान पहली नवम्बर से चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए प्रोत्साहित करने पर 10 रुपये प्रति कार्ड आशा कार्यकर्ता को भी दिए जाएंगे।

आशा कार्यकर्ताओं को मिला ब्योरा

उन्होंने बताया कि संबंधित गांवों की आशा कार्यकर्ताओं को लाभार्थियों का ब्योरा उपलब्ध करा दिया गया है। जेवर ब्लाक के औरंगाबाद, चाचली और धनसिया, दनकौर ब्लाक के बेलाखुर्द, दलेलपुर में एक भी गोल्डेन कार्ड नहीं बना है।

इन गांवों में 81 लाभार्थी हैं, जिनके कार्ड बनने हैं। विभाग की ओर से कुल 44 गांव गोल्डन कार्ड के लिए चिन्हित किए गए थे। अब केवल पांच गांव बचे हैं। जनपद में 35 हजार लाभार्थी परिवार हैं। कुल लाभार्थी एक लाख 79 हजार हैं।

कार्ड बनवाने के लिए देने होंगे 30 रुपये

योजना के अंतर्गत 41 अस्पताल संबद्ध हैं, इनमें पांच सरकारी और 36 निजी अस्पताल हैं। आशा कार्यकर्ता प्रिटेंड डाटा के आधार पर गांव के लाभार्थी को सूचना देंगी। कॉमन सर्विस सेंटर के बीएलआई की ओर से गांव में कैंप लगा कर कार्ड बनाए जाएंगे। लाभार्थी प्रति कार्ड 30 रुपये का शुल्क देकर गोल्डन कार्ड बनवा सकते हैं।

गोल्डन कार्ड के लिए आवश्यक दस्तावेज

गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए लाभार्थियों के पास राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, प्रधानमंत्री अथवा मुख्यमंत्री का मूल पत्र (अगर प्राप्त हुआ है तो) होना जरूरी है।

इस कार्ड के बन जाने से लोगों को पांच लाख रुपये तक का निशुल्क इलाज मिल सकता है। इसके तहत सैकड़ों बीमारियां कवर की जाती हैं। अब तक आठ हजार लोगों को इसके जरिये मुफ्त इलाज मिल चुका है।

 

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