Skip to content
Primary Menu
  • Home
  • ताजा तरीन
  • आलेख
    • सत्ता की सियासत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • दिल्ली एनसीआर
  • राज्यों से …
  • कारोबार
  • साहित्य
  • संस्कार
  • तकनीक
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • खेल
Logo300

INFOPOST NEWS

The power of information

October 24, 2026

Connect with Us

  • Home
  • ताजा तरीन
  • आलेख
    • सत्ता की सियासत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • दिल्ली एनसीआर
  • राज्यों से …
  • कारोबार
  • साहित्य
  • संस्कार
  • तकनीक
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • खेल

Categories

  • INFOPOST PDF
  • अंतरराष्ट्रीय
  • आलेख
  • कारोबार
  • ख़ास ख़बर
  • खेल पोस्ट
  • तकनीक
  • ताजा तरीन
  • दिल्ली एनसीआर
  • बोलती तस्वीरें
  • मनोरंजन
  • राज्यों से …
  • राष्ट्रीय
  • शिक्षा
  • सत्ता की सियासत
  • संस्कार
  • साहित्य
  • स्वास्थ्य
An error has occurred, which probably means the feed is down. Try again later.

  • आलेख
  • ताजा तरीन

वेजबोर्ड लागू न होने से पत्रकारों का शोषण चरम पर

September 2, 2020
Exploitation of journalists to peak due to non-implementation of wage board

अखबारों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए वेजबोर्ड लागू न होने से श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यही वजह है कि अखबार मालिक पत्रकारों को अनवरत खटा रहे हैं। कोरोना महामारी के नाम पर पत्रकारों का शोषण चरम पर है। क्योंकि अखबारों से तमाम कर्मचारियों को हटा दिया गया है और बचे हुए कर्मचारियों पर काम का सारा बोझ लाद दिया गया है। कर्मचारियों की संख्या पूछने वाला श्रम विभाग भी पंगु हो गया है।

राजस्थान पत्रिका समूह के अखबार पत्रिका के इंदौर संस्करण की बात करें, तो मालवा जोन के मीडियाकर्मी बगैर किसी ब्रेक के कार्य किए जा रहे हैं। मालिकों के इशारे पर रतलाम, मंदसौर, नीमच, उज्जैन, देवास, शाजापुर और आगर जिलों के संपादकीय प्रभारी मनमानी कर रहे हैं। किसी कर्मचारी को 20 मार्च से साप्ताहिक अवकाश तक नहीं मिल सका है। अब कर्मचारियों की हालत खराब होने लगी है।

पिछले आलेख में आप पढ़ चुके होंगे कि किस प्रकार अखबार कर्मचारियों को पहले वेजबोर्ड से वंचित कर दिया गया था। अब आगे। 1955 से सरकार ने श्रमजीवी पत्रकार और गैर-पत्रकार समाचारपत्र कर्मचा‎रियों के ‎लिए जिन 6 वेतन बोर्डों का गठन कर चुकी है, वे इस प्रकार हैं।

केंद्र सरकार कर चुकी है 6 वेतन बोर्डों का गठन

श्रमजीवी पत्रकारों के ‎लिए पहला वेज बोर्ड 2 मई 1956 को गठित हुआ जो लागू नहीं हो सका। दूसरा वेज बोर्ड 12 नवंबर 1963 को गठित हुआ, लेकिन लागू नहीं हो सका। 25 फरवरी 1964 को गठित वेजबोर्ड लागू नहीं हो सका। इसी प्रकार 11 जून 1975 को गठित वेजबोर्ड को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। वेजबोर्डों को 9 फरवरी 1979 को एकल व्य‎क्ति (पालेकर वेतन बोर्ड) ‎ट्रिब्यूनल में प‎रिव‎र्तित कर ‎दिया गया।

इस प्रकार बछावत वेतन बोर्ड को भी लागू नहीं किया जा सका। म‎णिसाना वेतन बोर्ड का भी कुछ वैसा ही हाल हुआ। अंतत: 11-11-2011 मजी‎ठिया वेतन बोर्ड पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, लेकिन उसे भी लागू नहीं किया गया।

दरअसल, केंद्र सरकार ने 2007 में श्रमजीवी पत्रकार और अन्य समाचार पत्र कर्मचारी (सेवा की शर्तें) ‎विविध प्रावधान अ‎धिनियम, 1955 के प्रावधान के अनुसार छठे वेतन बोर्ड के रूप में न्यायाधीश कुरुप की अध्यक्षता में दो वेतन बोर्डों (मजी‎ठिया) का गठन ‎किया, एक श्रमजीवी पत्रकार और दूसरा गैर-पत्रकार समाचार पत्र कर्मचा‎रियों के ‎लिए। अध्यक्ष, न्यायाधीश के नारायण कुरुप ने 31 जुलाई 2008 को त्यागपत्र दे ‎दिया।

जब जी. आर. मजी‎ठिया ने संभाला अध्यक्ष का पद भार

इसके बाद, न्यायाधीश जी. आर. मजी‎ठिया ने 4 मार्च 2009 को अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला। मजी‎तिया वेतन बोर्ड ने केंद्र सरकार को 31 ‎दिसम्बर 2010 को अपनी अं‎तिम ‎रिपोर्ट सौंपी। सरकार ने मजी‎ठिया वेतन बोर्ड की अनुशंसाओं को स्वीकार ‎किया और इसी के अनुसार इसे प्रका‎शित ‎किया गया। इन अनुशंसाओं को मंत्रालय की वेबसाइट और प‎ब्लिक डोमेन में अपलोड कर ‎दिया गया।

यह अ‎धिसूचना एबीपी प्राइवेट ‎लिमिटेड और एएन आर बनाम भारत संघ और अन्य के मामले में 2011 की ‎रिट या‎चिका (‎सिविल) संख्या 246 के प‎रिणाम के अधीन है। इसके अ‎तिरिक्त, वेतन बोर्ड की कानूनी वैधता और मजी‎तिया वेतन बोर्ड की अनुशसाओं को ‎‎क्रिया‎न्वित न करने के संबंध में ‎विभिन्न समाचार पत्र कर्मचा‎रियों ने ‎सितम्बर 2012 तक 11 अन्य ‎रिट या‎चिकाएं सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दायर की।

मजी‎ठिया वेतन बोर्ड की अनुशंसाओं के ‎क्रियान्वयन पर सर्वोच्च न्यायालय का कोई स्थगन आदेश नहीं है। सभी रिट याचिकाओं की सुनवाई 5 फरवरी 2013 को शुरू हुई और उक्त मामले समय-समय पर सुनवाई के लिए 09 जनवरी, 2014 तक जब तक कि उच्चतम न्यायालय ने फैसले को सुरक्षित रखा, प्रस्तुत होते रहे।

और 7 फरवरी 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

वर्ष 2011 के डब्ल्यूपी नंबर 246 और अन्य इंगित कोर्ट केसों में उच्चतम न्यायालय ने 7 फरवरी 2014 को इस निर्देश के साथ फैसला सुनाया कि सभी रिट याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं और मजदूरी यथा परिशोधित/निर्धारित रूप से 11.11.2011 से जब केंद्र सरकार ने मजीठिया वेतनबोर्ड की सिफारिशों को अधिसूचित किया है, देय होगा।

सभी बकाये की राशि को मार्च, 2014 तक सभी पात्र व्य‎‎‎क्तियों में चार समान किस्तों में 7 फरवरी 2014 से एक वर्ष के भीतर भुगतान किया जाएगा और अप्रैल, 2014 के बाद से परिशोधित मजदूरी का भुगतान जारी रखा जाएगा। उच्चतम न्यायालय के फैसले से सभी राज्य सरकारों/केन्द्र शासित प्रदेशों को मार्च, 2014 में सूचित कर दिया गया।

अनुशंसाओं के ‎क्रियांवयन की प्राथ‎मिक ‎जिम्मेदारी राज्य सरकार/केन्द्र शा‎सित प्रदेश की है। अ‎धिसूचना की एक प्र‎ति (‎हिन्दी एवं अंग्रेजी दोनों में) सभी राज्य सरकारों/केन्द्र शा‎सित प्रदेशों को इस मंत्रालय की ‎चिट्ठी 24/11/2011 को भेज दी गई थी। अ‎धिसूचना के ‎क्रियान्वयन की ‎निगरानी के लिए प्रधान श्रम एवं रोजगार सलाहकार की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्तर की अनुवीक्षण स‎मिति का गठन ‎किया गया।

‎त्रिपक्षीय अनुवीक्षण स‎मिति का गठन

इस समिति में संयुक्त स‎चिव, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय एवं प्रधान श्रम आयुक्त (केंद्रीय) सदस्य के तौर पर हैं। उप महा‎निदेशक सदस्य स‎चिव हैं। ‎त्रिपक्षीय अनुवीक्षण स‎मिति के गठन से संबं‎धित श्रम और रोजगार मंत्रालय का 24.04.2012 का आदेश राज्यों/संघ शा‎सित प्रदेशों के सभी श्रम स‎चिवों को पृष्ठां‎कित करते हुए स‎मिति के सभी सदस्यों को भेज ‎दिया गया।

केन्द्रीय स्तर की अनुवीक्षण स‎मिति की प्रथम बैठक प्रधान श्रम एवं रोजगार सलाहकार की अध्यक्षता में 24/09/2012 को हैदराबाद में आयो‎जित की गई थी। त‎मिलनाडु, कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश से आए अ‎धिकारी बैठक में उप‎स्थित हुए। 5 पूर्वी राज्यों नामत: ‎बिहार, छत्तीसगढ़, प‎श्चिम बंगाल, झारखण्ड और उड़ीसा के संबंध में वेतन बोर्ड ‎निर्णयों के कार्यान्वयन की सं‎विधियों की समीक्षा करने के ‎लिए भुवनेश्वर में 13/09/2013 को केंद्रीय स्तर की अनुवीक्षण स‎मिति की दूसरी बैठक आयो‎जित की गई थी।

पश्चिमी क्षेत्र के सात राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों अर्थात् राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गोवा, दादर एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव के लिए 21.04.2014 को इसकी तीसरी बैठक मुंबई (महाराष्ट्र) में आयोजित की गई। उतरी क्षेत्र के आठ राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों अर्थात् जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के संबंध में सीएलएमसी की चौथी बैठक 10.06.2014 को दिल्ली (श्रम शक्ति भवन) में आयोजित की गई।

About Author

See author's posts

Post navigation

Previous: तो कुछ नेताओं के इशारे पर लोगों को ठग रहे हैं बिल्डर?
Next: …कि इन हालात के आगे मुकम्मल रास्ता-सा है

Related Stories

SIR Protest
  • ताजा तरीन
  • राष्ट्रीय

SIR Protest: दिल्ली में प्रदर्शन तेज, 1 नवंबर की रैली पर नजर

infopost October 24, 2026 0
November 1 Rally
  • ताजा तरीन
  • सत्ता की सियासत

November 1 Rally: विपक्ष के बड़े शक्ति प्रदर्शन की तैयारी

infopost October 24, 2026 0
Election Transparency
  • ताजा तरीन
  • सत्ता की सियासत

Election Transparency: लोकतंत्र में बढ़ती राजनीतिक बहस

infopost October 23, 2026 0

Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.