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Essay collection: भारतीय अंग्रेजी साहित्य लेखन की नई प्रवृत्तियों को समेटती पुस्तक

November 6, 2020
Essay collection

Essay collection: इंदौर की सुपरिचित लेखिका डॉ. हेमलता दिखित के सरोकारों में अंग्रेजी साहित्य की श्रेष्ठ पुस्तकों पर हिंदी में समीक्षा लेखन महत्वपूर्ण है। इसके अलावा चर्चित अंग्रेजी कहानियों के अनुवाद भी उनकी उपलब्धि हैं। अपनी अभिरुचि के अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक प्रसंगों पर उनके लेखों की भी अनदेखी नहीं की जा सकती।

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Essay collection: प्रमुख अंग्रेजी लेखकों के रचना कर्म से अवगत होने का मौका

राजीव कुमार झा


book reviewEssay collection: पुस्तक समीक्षा : अतीत की कतरनों से (निबंध संग्रह), लेखिका: डॉ. हेमलता दिखित, 115, श्रीनगर एक्सटेंशन, इंदौर, मध्य प्रदेश। मूल्य ₹ 150 ।


Essay collection: हेमलता दिखित की इस पुस्तक में उनके लेख संग्रहीत हैं। जिन्हें पढ़ते हुए समकालीन भारतीय आंग्ल साहित्य के साथ दुनिया के दूसरे देशों के कुछ प्रमुख अंग्रेजी लेखकों के रचना कर्म से अवगत होने का मौका मिलता है।

लेखिका ने इस किताब के पहले लेख में भारतीय आंग्ल लेखक विक्रम सेठ के उपन्यास द गोल्डन गेट की विषय वस्तु पर विचार किया है। और इसके बाद अगले लेख में अमेरिकी अंग्रेजी काव्य लेखन से प्रशंसा बटोरने वाले भारतीय कवि अकिल कांट्रैक्टर से उन्होंने सबको अवगत कराया है।

दो लेखों में नयनतारा सहगल और अनिता देसाई

इसके बाद के दो लेखों में नयनतारा सहगल और अनिता देसाई के अंग्रेजी कथा लेखन के विविध विषयगत पहलुओं की विवेचना से जुड़े लेख इस पुस्तक में पढ़ने को मिलते हैं। कुछ साल पहले भारती मुखर्जी ने अपने उपन्यास ‘द मिडिल मैन एंड अदर स्टोरीज’ के लेखन के लिए अमेरिका में नेशनल बुक क्रिटिक्स सर्कल अवार्ड प्राप्त करके काफी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था।

डॉ. हेमलता ने अपने एक पृथक लेख में इनके साहित्यिक लेखा जोखा को प्रस्तुत किया है। फ्रांसीसी लेखक डोमिनिक लेपियरे ने भारत को अपना विषय बना कर चर्चित पुस्तक फ्रीडम एट मिड नाइट लिखी थी। इस पुस्तक के एक अध्याय में लस्ट फार लाइफ उपन्यास के लेखक इरविंग स्टोन के कथा लेखन पर विचार किया गया है।

प्रसिद्ध चित्रकार विंसेंट वानगाग का जीवन

प्रसिद्ध चित्रकार विंसेंट वानगाग के जीवन पर आधारित इस उपन्यास के लेखन से इरविंग स्टोन को अंग्रेजी साहित्य लेखन में विशिष्ट पहचान मिली है। अंग्रेजी में ‘द आटोबायोग्राफी आफ एन अननोन इंडियन’ पुस्तक के लेखक नीरद चौधरी के जीवन और लेखन के बारे में भी इस किताब में एक संग्रहणीय लेख संकलित है।

अनिता देसाई को 1978 में फायर आन द माउंटेन के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। हेमलता ने इस पुस्तक में उनके एक अन्य उपन्यास इन कस्टडी के कथानक के बारे में बताया है। और इस उपन्यास की विषय वस्तु के बारे में दिलचस्प प्रसंगों से अवगत कराती प्रतीत होती हैं।

अमेरिकी लेखक क्लार्क ब्लेज का जीवन और लेखन

भारतीय मूल की लेखिका भारती मुखर्जी के पति और प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक क्लार्क ब्लेज के जीवन और लेखन के बारे में भी एक लेख इस पुस्तक में पढ़ने को मिलता है। साहित्य की दुनिया में लेखकों के पुरस्कार और सम्मान के साथ कई विवादों का समावेश भी अक्सर होता दिखता है।

लेखिका ने कामनवेल्थ राइटर्स प्राइज के साथ भारतीय अंग्रेजी लेखक अमिताभ घोष की नाराजगी को लेकर यहां कई विचारणीय प्रसंगों को उजागर करती हैं। देश के पूर्व चुनाव आयुक्त टी एन शेषन को सरकारी लोक सेवक के तौर पर मैग्सेसे पुरस्कार से नवाजे जाने के उपलक्ष्य में भी लेखिका ने इस पुस्तक के एक लेख में उनकी चर्चा को समेटा है।

उड़ीसा के अंग्रेजी कवि राजू सामल

उड़ीसा के अंग्रेजी कवि राजू सामल के काव्य लेखन के बारे में भी एक लेख में विचार विमर्श है। भारत के प्रवासी भारतीय अंग्रेजी उपन्यासकार अरदेशर वकील के उपन्यास बीच-बाय के उल्लेख के साथ लेखिका ने एक लेख में उनके रचना कर्म के अन्य पहलुओं के बारे में भी बताया है।

प्रकाशक से लेखक के रूप में सामने आना भी कुछ कम हैरतअंगेज नहीं है। और पेंग्विन इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेविड देवीदार और उनके उपन्यास द हाउस आफ ब्लू मैंगोज के लेखन की कहानी इस पुस्तक में ऐसे ही सच का बयान करती है।

लेखिका ने इस पुस्तक के अगले पठनीय लेखों में भारतीय मूल के लेखक मनिल सूरी, लैटिन अमेरिकी लेखक गेब्रियल गार्सिया मार्खेज, दिल्ली की अंग्रेजी लेखिका मधु टंडन और उनके उपन्यास फेथ एंड फायर के अलावा अंग्रेजी साहित्य के भारतीय विद्वान प्रो. बोरगांवकर के जीवन-लेखन पर केंद्रित लेख सहजता से ध्यान आकर्षित करता है।

कई कवि गुमनाम

समाज में कविता जीवन का आलोक फैलाती है। लेकिन कई कवि गुमनाम ही बने रह जाते हैं। और उड़ीसा के एक कवि अक्षय साहू से लेखिका ने इसी क्रम में परिचय कराया है। लेखक किरपाल कजाक के बारे में लिखा लेख भी इसी प्रसंग में पठनीय बन पड़ा है।

इंदिरा गोस्वामी के कठोर एकाकी संघर्षमय जीवन की कथा से भी जुड़ा लेख प्रेरक बन पड़ा है।हेमलता की इस पुस्तक के शेष अध्यायों में बड़ौदा की हिंदी कवयित्री कुमारी मधु मालती के हिंदी काव्य लेखन से उनके प्रेम के बारे में बताया गया है।

इनके काव्य संग्रह ‘भाव निर्झर’ के प्रकाशन के बाद माथे की चोट से उनके असहाय हो जाने का जिक्र भी एक लेख में है। इसके बाद के लेख में पोलियोग्रस्त डॉ. सुरेश अडवानी की प्रेरक जीवन कथा का वर्णन इस पुस्तक को सार्थक बनाता है। उसमें इस शारीरिक अपंगता के बावजूद वे निरंतर चिकित्सा शोध और लेखन में संलग्न दिखाई देते हैं।

साहित्येत्तर मुद्दों की भी चर्चा

लेखिका ने अपनी इस पुस्तक के बाकी कुछ अध्यायों में साहित्येत्तर मुद्दों को लेखन में समेटा है। और यहां वह मुंबई के शेर अहमद जैसे गरीब बच्चों की जिंदगी का मुआयना करती नजर आती हैं। जिनका जीवन मुंबई की लोकल ट्रेनों में हेयर पिन्स और सेफ्टी पिन्स बेचते व्यतीत हो जाता है।

लेखिका ने एक लेख में इंदौर के अपने गुरुजनों में शुमार डॉ. के के केमकर को भी याद किया है। और इसके अलावा इंदौर के अन्य लोगों से अपनी इस मुलाकात में टेलरिंग मास्टर अब्दुल हमीद चौधरी से भी पुस्तक को पढ़ते हमारी मुलाकात उनसे होती है।

महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा

एशियाई देशों में महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा एक जटिल समस्या है। और अमेरिका के प्रवासी भारतीय परिवारों में भी यह समस्या व्याप्त है। शिकागो के अपना घर की सेवाओं की चर्चा से लेखिका ने इस तरह की कठिनाइयों से जूझती भारतीय अमेरिकी महिलाओं की कठिनाइयों को उजागर किया है।

लेखिका ने इस पुस्तक के अन्य लेखों में अपनी विदेश यात्रा के अनुभवों के बहाने कई अन्य रोचक बातों को शेयर किया है। इस प्रकार यह पुस्तक भारतीय अंग्रेजी लेखकों के लेखन के नए संदर्भों के अलावा दूसरे अनेक स्फुट विषयों को अपने कलेवर में समेटती है।

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