Skip to content
Primary Menu
  • Home
  • ख़ास ख़बर
  • आलेख
    • सत्ता की सियासत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • दिल्ली एनसीआर
  • राज्यों से …
  • कारोबार
  • साहित्य
  • संस्कार
  • तकनीक
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • खेल
Logo300

INFOPOST NEWS

The power of information

September 1, 2026

Connect with Us

  • Home
  • ख़ास ख़बर
  • आलेख
    • सत्ता की सियासत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • दिल्ली एनसीआर
  • राज्यों से …
  • कारोबार
  • साहित्य
  • संस्कार
  • तकनीक
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • खेल

Categories

  • INFOPOST PDF
  • sports
  • Uncategorized
  • अंतरराष्ट्रीय
  • आलेख
  • कारोबार
  • ख़ास ख़बर
  • तकनीक
  • दिल्ली एनसीआर
  • बोलती तस्वीरें
  • मनोरंजन
  • राज्यों से …
  • राष्ट्रीय
  • शिक्षा
  • सत्ता की सियासत
  • संस्कार
  • साहित्य
  • स्वास्थ्य
An error has occurred, which probably means the feed is down. Try again later.

  • ख़ास ख़बर
  • संस्कार

वेदांत दर्शन में सूक्ष्म जगत के रहस्यों की चर्चा

October 11, 2020
image

सत्य ऋषि

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

वेदांत दर्शन को सर्वश्रेष्ठ और अत्याधुनिक माना जाता है। क्योंकि विचारों के स्तर पर वेदांत दर्शन ठीक उसी तरह से है, जैसे एक बच्चा खिलौने वाली कार से संतुष्ट हो जाता है। लेकिन जब वही बच्चा बड़ा हो जाता है तो उसमें खिलौने वाली कार के प्रति कोई रुचि नहीं रह जाती। तब उसे असली कार की जरूरत होती है। वेदांत दर्शन उसी असली कार की तरह है।

दरअसल, वेदांत दर्शन ज्ञानयोग का एक स्रोत है जो व्यक्ति को ज्ञान प्राप्ति की दिशा में उत्प्रेरित करता है। इसका मुख्य स्रोत उपनिषद हैं, जो वेद ग्रंथों और वैदिक साहित्य का सार समझे जाते हैं। उपनिषद वैदिक साहित्य का अंतिम भाग है। इसीलिए इसको वेदान्त कहते हैं। कर्मकांड और उपासना का मुख्यत: वर्णन मंत्र और ब्राह्मणों में है। ज्ञान का विवेचन उपनिषदों में। ‘वेदान्त’ का शाब्दिक अर्थ है-‘वेदों का अंत’ अथवा सार।

अद्वैत वेदांत, विशिष्ट अद्वैत और द्वैत

वेदान्त की तीन शाखाएं जो सबसे ज्यादा जानी जाती हैं वे हैं: अद्वैत वेदान्त, विशिष्ट अद्वैत और द्वैत। आदि शंकराचार्य, रामानुज और श्री मध्वाचार्य जिनको क्रमश: इन तीनों शाखाओं का प्रवर्तक माना जाता है। इनके अलावा भी ज्ञानयोग की अन्य शाखाएं हैं। ये शाखाएं अपने प्रवर्तकों के नाम से जानी जाती हैं।

उनमें भास्कर, वल्लभ, चैतन्य, निम्बार्क, वाचस्पति मिश्र, सुरेश्वर और विज्ञान भिक्षु। आधुनिक काल में जो प्रमुख वेदान्ती हुए हैं, उनमें रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, अरविंद घोष, स्वामी शिवानंद स्वामी करपात्री और रमण महर्षि उल्लेखनीय हैं।

संत पुरुषों ने वेदांत दर्शन को आगे बढ़ाया

ये आधुनिक विचारक अद्वैत वेदान्त शाखा का प्रतिनिधित्व करते हैं। दूसरे वेदान्तों के प्रवर्तकों ने भी अपने विचारों को भारत में भलीभांति प्रचारित किया, लेकिन भारत के बाहर उन्हें बहुत कम जाना जाता है। संतों में भी ज्ञानेश्वर महाराज, तुकाराम महाराज आदि विचारक आते हैं।

संत पुरुषों ने वेदांत पर बहुत ग्रंथ लिखे हैं। आज भी लोग संतो के उपदेशों का अनुकरण करते हैं। वेदांत दर्शन भारत ही नहीं, विदेशों में भी काफी प्रचलित हुआ। सत्य को समझने में उसके सिद्धांत काफी कारगर साबित हुए। वेदांत पर चर्चा जारी रहेगी। आज इतना ही। तब तक के लिए सत्य को प्रणाम।

About Author

See author's posts

Post navigation

Previous: Television rating points: फेक न्यूज के बाद अब फेक टीआरपी
Next: Mental illnesses: कैसे करें मानसिक बीमारियों की पहचान?

Related Stories

Ram Mandir Trust Controversy
  • ख़ास ख़बर
  • राष्ट्रीय

Ram Mandir Trust Controversy: राम मंदिर ट्रस्ट पर उठे सवाल

infopost June 27, 2026
Narendra Modi IVLP Program
  • ख़ास ख़बर
  • राष्ट्रीय

Narendra Modi IVLP Program: क्या 1993 का अमेरिकी कार्यक्रम आज भी खड़ा करता है सवाल?

infopost June 27, 2026
Global Diplomacy
  • अंतरराष्ट्रीय
  • ख़ास ख़बर

Global Diplomacy: ईरान-अमेरिका वार्ता के बाद बदले पश्चिम एशिया के समीकरण?

infopost June 26, 2026

Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.