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कांग्रेस की ओर से पत्रकारों के बहिष्कार ने इमरजेंसी की याद दिलाई : भाजपा

ohm verma September 16, 2023
boycott of journalists

इंफोपोस्ट ब्यूरो, नयी दिल्ली। boycott of journalists: 

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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने नयी दिल्ली में केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में कांग्रेस और घमंडिया गठबंधन द्वारा पत्रकारों के बहिष्कार करने की तुलना इमरजेंसी से करते हुए कहा कि यह 14 पत्रकारों को बायकाट करने की सूची नहीं है, बल्कि कांग्रेस और घमंडिया गठबंधन द्वारा पत्रकारों को टारगेट करके ‘हिट लिस्ट’ बनायी गई है। भारतीय जनता पार्टी इसकी कड़ी निंदा करती है।

कांग्रेस ने आतंकियों के पक्ष में बयान दिया

boycott of journalists: डॉ. संबित पात्रा ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में आतंकी हमले के वीर शहीदों की अंतिम यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज और नेशनल कांफ्रेंस के सुप्रीमो फारुख अब्दुला पाकिस्तान एवं आतंकवादियों के पक्ष में बयान देते हैं और इंडी एलायंस और घमंडिया गठबंधन के नेता मुंबई बैठक के बाद निरंतर सनातन धर्म पर हमला कर रहे हैं। वहीँ, कांग्रेस की प्रमुख सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और घमंडिया गठबंधन के नेता चुप रहकर मौन स्वीकृति देते हैं। यही नहीं, सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और घमंडिया गठबंधन के बड़े नेता 14 पत्रकारों के बायकॉट पर भी चुप हैं।

पूछे सवाल

15 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस को याद करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और घमंडिया गठबंधन के बड़े नेताओं से सवाल पूछा और उनसे जवाब की मांग की-

1— यदि कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता जारी सूची के पत्रकारों से कोई दुर्व्यवहार करेंगे या उन पर हमला कर दे तो उसका जिम्मेवार कौन होगा? क्योंकि कांग्रेस और घमंडिया गठबंधन ने बकायादा नाम की सूची जारी करके ‘नफरती पत्रकार’ बताने की कोशिश की है। इस मामले को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

2— इसका प्रमाण है, पश्चिम बंगाल में पत्रकार ‘देबमल्य बागची’ गिरफ्तार किये गए। एक वरिष्ठ पत्रकार को हिरासत में लेना इस घमंडिया गठबंधन का असली चेहरा सामने लाती है, जो सही सवालों का उत्तर देने से डरती है।

3— क्या यह मोहब्बत की दुकान में नफ़रत के सामानों की लिस्ट है? भारतीय लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मीडिया है, कांग्रेस ने जिस प्रकार से मीडिया के खिलाफ नफरत दिखायी है, क्या यह मोहब्बत है?

4— कांग्रेस पार्टी और आम आदमी पार्टी के नेता भारतीय सेना से सवाल पूछते हैं कि सर्जिकल स्टाइक का सबूत क्या है? भारतीय सेना से सबूत लाकर दिखाने की मांग करते हैं।

5— कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता पूछते हैं कि बताओ, भगवान श्रीराम किस कमरे में जन्म लिए थे?

6— घमंडिया गठबंधन के नेता पूछते हैं कि बताओ, भगवान श्रीराम ने किसी इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग की?

7— पत्रकार जब किसी डिबेट में कांग्रेस पार्टी और घमंडिया गठबंधन के नेताओं से सवाल पूछ लेता है कि आपके राज्य में भ्रष्टाचार क्यों हो रहा है। आपने जो आंकड़े प्रस्तुत किए थे, वह गलत थे और सही आंकड़े यह है। तब ये लोग बौखला जाते हैं, क्या यही इनकी मोहब्बत की दुकान है? कांग्रेस पार्टी और घमंडिया गठबंधन के नेता जब किसी भी तरह के सवाल पूछेंगे, तो वह जायज।

8— पत्रकार जब कांग्रेस पार्टी या घमंडिया गठबंधन के नेता से सवाल पूछते हैं कि क्या हिन्दुस्तान की ग्रोथ स्टोरी दुनिया में चर्चा का विषय है ? क्या जी-20 का आयोजन सफल हुआ है? तब ये लोग बौखला जाते हैं और पत्रकारों को बायकॉट करने की घोषणा करते हैं, ऐसा क्यों? क्या यह मोहब्बत की दुकान है?

9— क्या पत्रकार राजनीतिक पार्टियों के नेताओं पर सवाल नहीं उठा सकते हैं? क्या पत्रकार नेताओं से सवाल नहीं पूछ सकते हैं?

कांग्रेस राहुल गांधी का बॉयकाट करे

boycott of journalists: संबित पात्रा ने कांग्रेस पार्टी को सलाह देते हुए कहा कि उनकी पार्टी को राहुल गांधी को ही ‘बॉयकाट’ कर देना चाहिए, तभी कांग्रेस पार्टी की थोड़ी बहुत हालात सुधर सकती है।

डॉ. संबित पात्रा ने कहा कि हिन्दुस्तान के लोकतंत्रिक इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ था कि किसी राजनीतिक पार्टी ने पत्रकारों के नाम के साथ सर्कुलर जारी कर बहिष्कार करने की घोषणा की हो। यह पत्रकारिता का विरोध है और इंटरनेशनल ‘डेमोक्रेसी डे’ में कहीं न कहीं यह दर्शाता है कि कुछ ऐसे दल हिन्दुस्तान में है जो पहले भी लोकतंत्र में विश्वास नहीं करते थे और आज भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास नहीं कर रहे हैं।

लोकतंत्र को कुचलने वाले कार्रवाई को इतिहास के पन्ने पलटते हुए डॉ. पात्रा ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 10 मई 1951 में भारतीय संविधान का पहला संशोधन करके अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगया था। आजादी के बाद उस समय अंतरिम सरकार थी और आम चुनाव भी नहीं हुए थे, इसके बावजूद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने के लिए संशोधन लाया गया था।

इमरजेंसी देश का काला अध्याय

डॉ. पात्रा ने कहा कि 25 जून 1975 को देश में इमरजेंसी घोषित करने की घटना भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का काला अध्याय है। इमरजेंसी लगाने के बाद देशभर में पत्रकारों को प्रताड़ित किया गया था। अखबारों में संपादकीय लिखना मुश्किल हो गया था, सरकार के लोग देखते थे कि संपादकीय में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का नाम तो नहीं लिखा जा रहा है। उस दौरान ‘मीसा’ कानून के तहत कई पत्रकारों पर जुल्म ढाहा गया था।

तब बोफोर्स घोटाले की चर्चा चरम पर थी

boycott of journalists: राजीव गांधी ने डिफेमेशन बिल की जिक्र करते हुए डॉ. पात्रा ने कहा कि 19 अगस्त 1988 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा ‘मानहानि विधेयक-1988’ लाया था। उस समय बोफोर्स घोटाले की चर्चा चरम पर थी। कुछ जाबांज पत्रकारों ने खुलासा किया था कि किस प्रकार से बोफोर्स डील के भ्रष्टाचार में राजनेता संलिप्त हैं।

कुछ बड़े अखबारों ने बोफोर्स डील घोटाले में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम का खुलासा किया था। इसके विरोध में राजीव गांधी ने ‘मानहानि विधेयक लाकर कानून बनाए थे, किन्तु बाद में राजीव गांधी को प्रेस कांफ्रेंस करके उस कानून को वापिस लेना पड़ा था। क्योंकि, पत्रकार जगत ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होकर विरोध किया था। राजीव गांधी ने सोच था कि जो गांधी परिवार के खिलाफ लिखने वालों को सजा दिलाएंगे।

डॉ. संबित पात्रा कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज के बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज ने बयान दिया है कि हिन्दुस्तान को पाकिस्तान से बातचीत करे और प्रधानमंत्री को आतंकवादियों के मन में चल रहे बातों को समझना चाहिए। यह विचार सिर्फ सैफुद्दीन सोज की नहीं है, बल्कि कांग्रेस पार्टी और घमंडिया गठबंधन की सोच है। सैफुद्दीन सोज और फ़ारुक़ अब्दुल्लाह जैसे लोग राजनैतिक पार्टियो और गठबंधन में मुख्य स्थान दिया गया है।

सुरजेवाला पर चर्चा

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. पात्रा ने कहा कि कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कि “जिसने भी मोदी जी को वोट दिया, वो राक्षस है।“ उन्होंने विपक्ष पर प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं ने हमेशा चुनाव प्रक्रिया पर अविश्वसनीयता दिखाई है, कभी ईवीएम मशीन को लेकर तो कभी चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किया है।

उन्होंने कहा कि कैसे कांग्रेस ने उच्चतम न्यायलय के न्यायधीशों पर भी सवाल उठाया है। जनतंत्र का कोई ऐसा स्तंभ नहीं है जिस पर इस इंडी एलायंस यानी घमंडिया गठबंधन के नताओं ने सवाल न खड़े किए हो।

boycott of journalists: डॉ. संबित पात्रा ने “अवॉर्ड वापसी गैंग” व “मोमबत्ती गैंग” का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर इन 14 पत्रकारों की सूची बीजेपी द्वारा प्रकाशित की जाती, तो अब तक देश में मोमबत्तियों की कमी हो जाती। सीधे तौर पर ये कांग्रेस का “सिलेक्टिव आउटरेज” यानी चयनात्मक आक्रोश है।

क्या राहुल गांधी बिहार के शिक्षा मंत्री का बहिष्कार करेंगे

boycott of journalists: उन्होंने राहुल गांधी पर सीधे सवाल करते हुए कहा कि बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने रामचरितमानस को ‘पॉटेशियम साइनाइट’ कह दिया। ऐसे नेताओ का कांग्रेस समर्थन करेगी या इनका भी बहिष्कार होगा? जो पत्रकार जी-20 और भारत का समर्थन करते है, कांग्रेस उनका बहिष्कार करती है। ये वही कांग्रेस है जिसके नेता सलमान खुर्शीद इस बात को व्यक्त करते है कि श्रीमती सोनिया गांधी, कैसे ‘बाटला हाउस’ की घटना पर रोई थी व कई दिनों तक सो नहीं पाईं थी। “इंडी गठबंधन में हिन्दू धर्म के लिए जहर भर हुआ है और इस गठबंधन का कोई जमीर नहीं है।”

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