Beginning of Journalism: विश्व में पत्रकारिता की शुरुआत ईसा से 131 वर्ष पूर्व रोम में हुई थी। उसी वर्ष से पहला दैनिक समाचार-पत्र निकलने लगा जिसका नाम था, ऐकटा डुरीना। भारत में छापे की पहली मशीन 1674 में आई, लेकिन भारत का पहला अख़बार 100 साल बाद 1776 में प्रकाशित हुआ। इसके प्रकाशक ईस्ट इंडिया कंपनी के विलेम बॉल्ट्स थे।
Beginning of Journalism: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सूत्रधार ‘बंगाल गज़ेट’
इंफोपोस्ट न्यूज
Beginning of Journalism: जहां तक विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रश्न है, उसका सूत्रधार 1780 में जेम्स ओगस्टस हीकी का अख़बार ‘बंगाल गज़ेट’ था। उसमें दो पन्ने होते थे और इसमें ईस्ट इंडिया कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के व्यक्तिगत जीवन पर लेख छपते थे। 1819 में भारतीय भाषा में पहला समाचार-पत्र प्रकाशित हुआ जो बंगाली भाषा का पत्र ‘संवाद कौमुदी’ था। प्रकाशक राजा राममोहन राय थे। 1826 में ‘उदंत मार्तंड’ नाम से हिंदी के प्रथम समाचार-पत्र का प्रकाशन प्रारंभ हुआ।
पत्रकारिता के इतिहास की चर्चा कर रहे थे, इंटरनेशनल चैम्बर ऑफ़ मीडिया एंड एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (आईसीएमईआई) के चांसलर और ग्लोबल फेस्टिवल ऑफ़ जर्नलिज्म महोत्सव के अध्यक्ष डॉ. संदीप मारवाह। उन्होंने 12वें ग्लोबल फेस्टिवल ऑफ़ जर्नलिज्म के शुभांरभ अवसर पर अतिथियों और छात्रों को संबोधित किया और कहा कि हर अच्छे काम के पीछे लक्ष्य रखकर कड़ी मेहनत होती है। तभी सफलता मिलती है। आज जर्नलिज्म को लोकतंत्र के चौथे पायदान के रूप में जाना जाता है।
फेस्टिवल में देश दुनिया के जाने माने लोग आए
इस अवसर पर कई गण्यमान्य हस्तियां उपस्थित रहीं। उनमें सुमित चौधरी संपादक टीवी 9, जसप्रीत कौर वरिष्ठ एंकर, न्यूज़ 18 इंडिया रंजना सिंह राठौड़, वरिष्ठ एंकर न्यूज़ नेशन, फिलिस्तीन दूतावास के अबू ए जाजेर, मीडिया सलाहकार, गिनी दूतावास के श्री फ़या एफ मिलिमौनो, यूपी के पूर्व मुख्य सचिव दीपक सिंघल, चाड गणराज्य दूतावास के डिल्ला लुसिएन, अल्जीरिया दूतावास के राजदूत डॉ. अली अचौई, उज़्बेकिस्तान के राजदूत सरदार रुस्तमबायेव, रूसी संघ दूतावास के काउंसलर पेट्र सिज़ोव प्रमुख रूप से शामिल रहे।
फेस्टिवल का शुभांरभ दीप प्रज्ज्वलन और गणेश वंदना के साथ किया गया। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस के पोस्टर का विमोचन किया गया। इस अवसर पर अंबर शर्मा संस्थापक मोगली की पुस्तक “बॉम्बे टू बैंकॉक” का भी विमोचन किया गया। एनिमेशन प्रदर्शनी एवं फोटोग्राफी प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर अतिथियों को पुरस्कार, आजीवन सदस्यता प्रमाणपत्र और उत्सव स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। महोत्सव निदेशक डॉ. अजय कुमार ने अपने विचार प्रस्तुत किए। अंत में उज़्बेकिस्तान के कलाकारों ने संगीतमय प्रस्तुति दी।


