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UK media: ब्रिटेन और मीडिया की स्वतंत्रता

November 5, 2022
UK Media

UK media: भारत में कहा जाता है कि टू मच डेमोक्रेसी है। यानी अतिलोकतंत्र है। लेकिन आज कल ब्रिटेन में जो हो रहा है, उसे क्या कहेंगे? ब्रिटेन में एक ऐसी डेमोक्रेसी है जहां मीडिया इतना स्वतंत्र है कि सत्ताधारी पार्टी के बड़े बड़े नेताओं के स्कैंडल का खुलासा कर पाता है।

UK media: पार्टी गेट और वालपेपर गेट जैसे स्कैंडल उजागर

इंफोपोस्ट न्यूज डेस्क


UK media: ब्रिटेन में पार्टी गेट और वालपेपर गेट जैसे स्कैंडल उजागर किए गए। वह भी प्रधानमंत्री के खिलाफ। वहां चुनाव आयोग भी इतना स्वतंत्र है कि सरकार के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत जुटा पाता है। पुलिस तो प्रधानमंत्री पर भी भारी भरकम जुर्माना लगा देती है। यही नहीं, वहां के नेता भी इतने स्वतंत्र हैं कि अपनी ही पार्टी के नेताओं और प्रधानमंत्री की गलत नीतियों पर सवाल उठा पाते हैं। भ्रष्ट नेताओं की कमी न तो वहां है और न ही भारत में।

दोनों देशों में अंतर यह है कि ब्रिटेन में प्रधानमंत्री तक का विरोध सत्ताधारी पार्टी के भी नेता कर पाते हैं। लेकिन भारत के हालात क्या हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। न्यू इंडिया में क्या ऐसी कोई राजनीतिक पार्टी है, जिसमें इस तरह का पार्टी लोकतंत्र कभी नजर आया हो? इसे विस्तार से समझने के लिए आपको इस वीडियो के माध्यम से ब्रिटेन ले चलते हैं और जानते हैं कि चालू दशक में वहां क्या कुछ हुआ है।

कंजरवेटिव पार्टी और लेबर पार्टी

UK media: शुरुआत वर्ष 2019 से करते हैं जब ब्रिटेन यानी यूनाइटेड किंगडम में कंजरवेटिव पार्टी प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई थी। इसी वर्ष भारत में भी भाजपा ने प्रचंड बहुमत से केंद्र की सत्ता पर काबिज हुई थी। यूके के आम चुनाव में दो पार्टियों कंजरवेटिव पार्टी और लेबर पार्टी में सीधी टक्कर हुई थी।

कंजरवेटिव पार्टी के नेता थे बोरिस जानसन और लेबर पार्टी के नेता थे जेरेमी कॉर्विन। जिस प्रकार भारत की लोकसभा में 543 सीटें हैं, ठीक उसी प्रकार यूके में 650 सीटें हैं। कंजरवेटिव पार्टी को 365 सीटें मिली थीं, जबकि लेबर पार्टी 202 सीटों पर सिमट गई थी। इस प्रकार बोरिस जानसन यूके के प्रधानमंत्री बन गए थे।

विवादों से घिरे रहे बोरिस जानसन

UK media: लेकिन बोरिस जानसन को तीन वर्षों में ही इस्तीफा दे देना पड़ा। ऐसा इसलिए हुआ कि बोरिस जानसन ने अपनी पार्टी और जनता का विश्वास खो दिया था। नवंबर 2021 में ही वह विवादों में आ गए थे। हुआ यह था कि बोरिस जानसन की पार्टी के सांसद ओवन पीटरसन को लाबिंग नियमों को भंग करने के आरोप में निलंबित किया जा रहा था।

इस निलंबन को रोकने के लिए बोरिस ने अपनी पार्टी के नेताओं पर व्हिप लगा दी थी। ऐसा करके पार्टी नेताओं को अपने मुताबिक मतदान के लिए बाध्य किया जाता है। ऐसा समय समय पर भारत में भी होता आया है। जनता में एक सवाल तैर रहा था कि आखिर बोरिस जानसन एक भ्रष्ट नेता को क्यों बचाना चाह रहे हैं?

लॉकडाउन में भी जॉनसन कर रहे ​थे पार्टी

बोरिस जानसन पर यह पहला दाग लगा था। 30 नवंबर 2021 को उन पर दूसरा दाग लगा। क्योंकि उसी समय पार्टी गेट स्कैंडल की रिपोर्ट आ गई थी। पार्टी गेट स्कैंडल को इस तरह से समझें कि कोविड महामारी के दौरान जब पूरा लंदन लॉकडाउन में था, उसी समय प्रधानमंत्री कार्यालय में पार्टी की जा रही थी।

यानी लोगों के घर से निकलने पर रोक लगी थी और प्रधानमंत्री कार्यालय में काम करने वाले लोग पार्टी के जश्न में डूबे थे। इसीलिए इस स्कैंडल को पार्टी गेट स्कैंडल कहा जाता है। 7 दिसंबर 2021 को इस पार्टी गेट में एक और बड़ा खुलासा हुआ। मीडिया में एक वीडियो क्लिप सामने आई जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रेस सचिव अलिग्रा स्टेटन इन पार्टियों का मजाक उड़ाती नजर आईं।

बोरिस जानसन पर लगा था 17 हजार 800 पाउंड का जुर्माना

बोरिस जानसन को तीसरा बड़ा झटका वालपेपर गेट विवाद में लग गया। क्योंकि यूके का चुनाव आयोग इतना सख्त हो गया कि बोरिस जानसन पर 17 हजार 800 पाउंड का जुर्माना लगा दिया गया। हुआ यह था कि प्रधानमंत्री आवास का रेनोवेशन कराने के लिए जो चंदा मिला था, उसे बोरिस जानसन ने घोषित नहीं किया था। इस रेनोवेशन का जो बिल आया था, वह दो लाख पाउंड का था। जबकि सार्वजनिक तौर पर इसके लिए मात्र 30 हजार पाउंड की स्वीकृति मिली थी।

10 जनवरी 2022 को पार्टी गेट स्कैंडल में एक और बड़ा खुलासा हुआ। बोरिस जानसन के निजी सचिव मार्टिन रेनॉल्डस की एक ईमेल लीक हो गई। इस मेल से पता चला कि बोरिस जानसन ने 100 लोगों को अपने घर पर पार्टी करने के लिए आमंत्रित किया था। जबकि उस समय विकट लॉकडाउन के हालात थे। यह खबर मीडिया में चलाई गई तो दबाव में आकर बोरिस जानसन को जवाब देना पड़ा। उन्हें आम जनता से माफी तक मांगनी पड़ी।

भरोसा टूटा तो बिखर गई जानसन की पार्टी

जानसन को कहना पड़ा कि यह वास्तव में कोई पार्टी नहीं थी। यह तो एक वर्क इवेंट था। विपक्ष के सांसदों ने आरोप लगाया कि बोरिस जानसन झूठ बोल रहे हैं। यही नहीं, उन्हीं की पार्टी कंजरवेटिव पार्टी के कुछ सांसद भी बोरिस की बातों पर भरोसा नहीं कर रहे थे। तभी तो उन्होंने पार्टी ही छोड़ दी। 19 जनवरी को कंजरवेटिव पार्टी के सांसद क्रिश्चियन वेकफोर्ड लेबर पार्टी में चले गए।

आपने देखा कि किस प्रकार यूके का चुनाव आयोग बहादुरी से सत्ताधारी पार्टी पर नकेल कसता है। मीडिया भी बेबाकी से सरकार के बड़े बड़े स्कैंडल का खुल कर खुलासा करता है। पुलिस भी पूरी स्वतंत्रता से पार्टी गेट स्कैंडल पर कार्रवाई करती है। अप्रैल 2022 में मेट्रोपोलिटन पुलिस ने बोरिस जानसन और वर्तमान में यूके के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक पर इसलिए जुर्माना लगाया था कि दोनों ने एक बर्थडे पार्टी में शिरकत की थी। जबकि उस समय पूरा देश लॉकडाउन में था।

भारत में तो यह संभव ही नहीं

क्या आप भारत के संदर्भ में इस तरह की कार्रवाइयों की कल्पना भी कर सकते हैं? आप तो देखते ही हैं कि किस प्रकार भारतीय पुलिस सत्ताधारी पार्टी के इशारों पर नाचती है। इस समय ऋषि सुनक बोरिस सरकार में वित्त मंत्री थे। 25 मई 2022 को एक और जोर का झटका धीरे से लगा। सिविल सर्वेंट सू ग्रे ने एक विस्तृत रिपोर्ट निकाली, जिससे पता चला कि प्रधानमंत्री के आफिस और घर पर एक दो नहीं, कई पार्टियां आयोजित की गई थीं।

इन पार्टियों में माननीयों ने इतनी ज्यादा शराब पी ली थे कि वे शोर शराबे और मारपीट पर भी उतर आए थे। जून तक आते आते बोरिस जानसन की छवि न केवल आम जनता, अपनी पार्टी के नेताओं के बीच भी खराब हो गई थी। हालत यह हो गई थी कि उनकी पार्टी के नेता भी उनका समर्थन करने से परहेज कर रहे थे। विश्वास मत हासिल करने की बात आई तो बोरिस की पार्टी के 41 प्रतिशत नेताओं ने उनके खिलाफ मतदान किया।

बोरिस जानसन के सहयोगियों का धैर्य जवाब दे गया

बोरिस जानसन को एक और बड़ा झटका तक लगा जब उनके डिप्टी चीफ क्रिस पिंचर ने दो लोगों को यौन प्रताड़ना का शिकार बना लिया। तभी तो 30 जून 2022 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया। लेकिन इस पर बोरिस जानसन ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन मीडिया की गहन पड़ताल से पता चला कि बोरिस को इन आरोपों के बारे में 2019 में ही पता चल गया था।

ये खबरें सामने आईं तो बोरिस जानसन के सहयोगियों का धैर्य जवाब दे गया। वे कहने लगे कि जब तक बोरिस जानसन प्रधानमंत्री पद पर बने रहेंगे, तब तक वे पार्टी का साथ नहीं दे पाएंगे। ऐसा प्रधानमंत्री हमें नहीं चाहिए। हुआ यह कि ततकालीन वित्त मंत्री ऋषि सुनक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। साजिद जावेद ने स्वास्थ्य सचिव के पद से इस्तीफा दे दिया। और अगले 24 घंटों में 36 और सांसदों का इस्तीफा आ गया।

और बोरिस जानसन को भी देना पड़ इस्तीफा

UK media: कुल मिला कर बोरिस सरकार के 62 मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया था। इस प्रकार सरकार चलाने का संकट पैदा हो गया। अंत में 7 जुलाई 2022 को बोरिस जानसन भी इस्तीफा देने के लिए मजबूर हो गए। सितंबर 2022 में लिस ट्रस ने उस समय सक्रियता दिखाई, जब यूके तमाम चुनौतियों से घिर गया था।

क्योंकि हाल ही में क्वीन एलिजाबेथ का देहांत। यूक्रेन युद्ध के कारण मुद्रा स्फीति नियंत्रण से बाहर। ब्रेकसिट के कारण जो आर्थिक संकट पैदा हुआ सो अलग। उधर, स्कॉटलैंड की अलग होने की धमकी ने तो यूके को हिला कर रख दिया। लेकिन यूके के संकट की बड़ी वजह 2016 के ब्रेकसिट फैसले को माना जा रहा है।

 

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