Skip to content
Primary Menu
  • Home
  • ताजा तरीन
  • आलेख
    • सत्ता की सियासत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • दिल्ली एनसीआर
  • राज्यों से …
  • कारोबार
  • साहित्य
  • संस्कार
  • तकनीक
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • खेल
Logo300

INFOPOST NEWS

The power of information

October 16, 2026

Connect with Us

  • Home
  • ताजा तरीन
  • आलेख
    • सत्ता की सियासत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • दिल्ली एनसीआर
  • राज्यों से …
  • कारोबार
  • साहित्य
  • संस्कार
  • तकनीक
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • खेल

Categories

  • INFOPOST PDF
  • अंतरराष्ट्रीय
  • आलेख
  • कारोबार
  • ख़ास ख़बर
  • खेल पोस्ट
  • तकनीक
  • ताजा तरीन
  • दिल्ली एनसीआर
  • बोलती तस्वीरें
  • मनोरंजन
  • राज्यों से …
  • राष्ट्रीय
  • शिक्षा
  • सत्ता की सियासत
  • संस्कार
  • साहित्य
  • स्वास्थ्य
An error has occurred, which probably means the feed is down. Try again later.

  • आलेख
  • ताजा तरीन

Kamra: तो कामरा की तरह सोचने लगेगा आम आदमी?

November 16, 2020
Kamra

Kamra: निश्चित रूप से कुणाल कामरा कई बार ज्यादा बोल जाते हैं। पर क्या सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के दबाव में काम नहीं हो रहा है? क्या सुप्रीम कोर्ट के जो फैसले आ रहे हैं, उनमें कई महत्वपूर्ण फैसले विवादित नहीं रहे हैं? अर्णब गोस्वामी मसले में महाराष्ट्र सरकार ने यदि इस बार गलत किया है तो क्या देवेंद्र फडणवीस के कार्यकाल में पुलिस ने सही किया था?

Kamra: सरकारों के दबाव में चहेतों को बचाने की फितरत

चरण सिंह

Kamra: अक्सर देखने में आता है कि सरकारों के दबाव में चहेतों लोगों को बचाया जाता है। यही वजह है कि विभिन्न सरकारों के करीबी लोग अपराध करने से नहीं हिचकिचाहते। ऐसे मामलों में कोर्ट का भी सरकारों के दबाव में आ जाना आम बात है।

यदि सुप्रीम कोर्ट अवमानना मामलों में इतना गंभीर है तो फिर मजीठिया वेज बोर्ड मामले में उसे अखबार मालिकों की अवमानना नजर क्यों नहीं आई? क्यों अवमानना मामले में अखबार मालिकों को राहत दे दी गई ? क्यों अखबार मालिकों को राहत देने वाले, राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद में मंदिर निर्माण का आदेश देने वाले जस्टिस रंजन गोगई को राज्यसभा भेज दिया गया?

अर्णब गोस्वामी को जमानत क्यों?

क्यों अर्णब गोस्वामी को जमानत दे दी गई ? क्यों अधिकतर जज किसी आयोग का चैयरमेन बनने के लिए लालायित रहते हैं? क्यों सहारा के चैयरमेन सुब्रत राय चार साल से पैरोल पर खुलेआम घूम रहे हैं? क्यों मजीठिया वेज बोर्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के सम्मान में खड़े हुए मीडियाकर्मियों को सुप्रीम कोर्ट ने लेबर कोर्ट के धक्के खाने के लिए छोड़ दिया हैं?

क्यों सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भाजपा के विधायक की 50 लाख की मोटरसाइकिल पर स्टंट करने लगते हैं? क्यों चीफ जस्टिस को कोई सरकार हेलीकॉप्टर की सुविधा देती है?

भले ही अवमानना का नाम देकर सुप्रीम कोर्ट में प्रख्यात वकील प्रशांत भूषण के बाद कॉमेडियन कुणाल कामरा की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा हो पर जो रवैया सुप्रीम कोर्ट का है, ऐसे में तो अब आम आदमी भी सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को गलत ठहराने लगेगा।

वेणुगोपाल किसके लिए काम कर रहे हैं?

कौन नहीं जानता अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल किसके लिए काम कर रहे हैं? जब कुणाल गोस्वामी के पक्ष में पूरी भाजपा खड़ी हो गई तो वेणुगोपाल और सुप्रीम कोर्ट के इस रुख पर कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

कामरा ने सीधी सादी बात में यही तो कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में गरीबों की उपेक्षा कर अमीरों के लिए काम हो रहा है। क्या सुप्रीम किसी गरीब के साथ न्याय कर पा रहा है ? क्या अमीर सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं?

ट्वीट के लिए आपराधिक अवमानना

स्‍टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा को टीवी एंकर अर्नब गोस्‍वामी को अंतरिम जमानत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की आलोचना वाले ट्वीट के लिए आपराधिक अवमानना के आरोपों का सामना करना होगा। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ कथित अपमानजनक ट्वीट के लिए कामरा के खिलाफ आपराधिक अवमानना का केस चलाने की सहमति दी है।

अटॉनी जनरल ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, ‘यह समय है कि लोग इस बात को समझें कि सुप्रीम कोर्ट पर अकारण हमला करने से सजा का सामना करना पड़ सकता है।’ उन्‍होंने कहा कि कॉमेडियन के ट्वीट न केवल ‘खराब टेस्‍ट’ के थे बल्कि यह साफ तौर पर हास्‍य और अवमानना के बीच की लाइन को पार कर गए थे।

कॉमेडियन कामरा के ट्वीट

Kamra: दरअसल, कॉमेडियन कामरा ने अर्णब गोस्वामी को अंतरिम जमानत मिलने के बाद अपने ट्वीट में कहा है कि जिस गति से सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों को ऑपरेट करती है, उसको देखकर लगता है महात्मा गांधी के फोटो को हरीश साल्वे के फोटो से बदलने का वक्त आ गया है।

कुणाल ने दूसरे ट्वीट में लिखा, डीवाई चंद्रचूड एक फ्लाइट अटेंडेंट हैं, जो प्रथम श्रेणी के यात्रियों को शैम्पेन ऑफर कर रहे हैं। क्योंकि वो फास्ट ट्रैक्ड हैं। जबकि सामान्य लोगों को यह भी नहीं पता कि वो कभी फ्लाइट चढ़ या बैठ भी सकेंगे।

सर्व करने की तो बात ही नहीं है। कुणाल अपने एक अन्य ट्वीट में वकीलों से कहा कि जिनके पास रीढ़ की हड्डी है, उन्हें न्यायाधीशों को बुलाते समय ‘ऑनरेबल’ की उपाधि लगानी छोड़ देनी चाहिए।

About Author

See author's posts

Post navigation

Previous: mental health issue: ‘मिशन शक्ति’ के तहत मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
Next: Bihar election: लोकतंत्र की ताकत का आभास

Related Stories

Delhi Protest 2026
  • ताजा तरीन
  • दिल्ली एनसीआर
  • राष्ट्रीय

Subject: Delhi Protest 2026: प्रदर्शन से पहले हिरासत और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

infopost October 10, 2026 0
Supreme Court Metro Services
  • ताजा तरीन
  • दिल्ली एनसीआर
  • राष्ट्रीय

Subject: Supreme Court Metro Services: सुप्रीम कोर्ट का नियंत्रित संचालन पर जोर

infopost October 10, 2026 0
Noida Ramlila 2026: नोएडा में कल से भव्य रामलीला महोत्सव
  • ताजा तरीन
  • दिल्ली एनसीआर

Noida Ramlila 2026: नोएडा में कल से भव्य रामलीला महोत्सव

Avatar Shrikant Singh October 10, 2026 0

Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.