G7 Oil Release: पश्चिम एशिया में जंग और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से पैदा हुए ईंधन संकट के बीच G7 देशों ने अपने इमरजेंसी भंडार से 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने का फैसला किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस योजना पर सहमति बनी। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी अगले चार महीनों में तेल को चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारेगी।
G7 Oil Release: ईंधन संकट के बीच बड़ा फैसला
इंफोपोस्ट/G7 Oil Release
पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट गहराने की स्थिति बनी हुई है। कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ने की बात सामने आई है। इसी बीच भारत समेत कई देशों के लिए राहत की खबर सामने आई है।
दुनिया के सात प्रमुख देशों ने अपने तेल भंडार खोलने का फैसला किया है। इन देशों ने मिलकर 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी करने की योजना बनाई है। इसके साथ डीजल भी बाजार में उतारा जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य मौजूदा ईंधन संकट के बीच बाजार में आपूर्ति बढ़ाना है।
100 मिलियन बैरल तेल चरणबद्ध तरीके से होगा जारी
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की अगुवाई में हुई G7 बैठक में 100 मिलियन बैरल कच्चे तेल और डीजल को चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारने पर सहमति बनी। बैठक में पश्चिम एशिया में जंग और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से पैदा हुई ईंधन आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए इमरजेंसी भंडार के इस्तेमाल का फैसला लिया गया।
इस पूरे ऑपरेशन को इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के जरिए अगले चार महीनों में पूरा किया जाएगा। योजना के तहत तेल और डीजल को एक साथ बाजार में नहीं उतारा जाएगा, बल्कि निर्धारित अवधि के दौरान चरणबद्ध तरीके से इसकी आपूर्ति की जाएगी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध ईंधन की मात्रा बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
पहले 20 दिनों में डीजल की बड़ी सप्लाई
इस योजना की खास बात शुरुआती 20 दिनों से जुड़ी है। इन शुरुआती दिनों में ही बड़ी मात्रा में डीजल बाजार में जारी किया जाएगा। डीजल की इस शुरुआती आपूर्ति को मौजूदा संकट के दौरान तत्काल जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया है।
जंग के कारण परिवहन, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स पर अचानक असर पड़ने की स्थिति में डीजल की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। योजना के तहत शुरुआती चरण में भारी मात्रा में डीजल बाजार में पहुंचाने का उद्देश्य प्रभावित परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था को जल्द सामान्य स्थिति की ओर लाना है।
होर्मुज नाकेबंदी से तेल आपूर्ति पर असर
पश्चिम एशिया में जंग के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने कच्चे तेल की आपूर्ति को प्रभावित किया है। इसके चलते वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट की स्थिति बनी है। कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट का असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ने की बात भी समाचार में सामने आई है।
इस परिस्थिति के बीच G7 देशों की ओर से अपने इमरजेंसी तेल भंडार का इस्तेमाल करने का फैसला किया गया है। 100 मिलियन बैरल कच्चे तेल और डीजल को बाजार में उतारने की योजना के जरिए आपूर्ति में आई कमी को कम करने का प्रयास किया जाएगा। भारत सहित कई देशों के लिए इस फैसले को ईंधन उपलब्धता के लिहाज से राहत की खबर के तौर पर देखा जा रहा है।
चार महीनों में पूरा होगा तेल जारी करने का ऑपरेशन
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी अगले चार महीनों के दौरान इस तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारेगी। इस अवधि में 100 मिलियन बैरल कच्चे तेल और डीजल को चरणबद्ध तरीके से जारी करने की योजना है। शुरुआती 20 दिनों में डीजल की बड़ी मात्रा उपलब्ध कराने के बाद बाकी आपूर्ति निर्धारित अवधि के दौरान आगे बढ़ाई जाएगी।
G7 देशों का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया की जंग और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण वैश्विक ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। इमरजेंसी भंडार से तेल जारी करने की योजना का सीधा उद्देश्य बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति पहुंचाना और परिवहन, सप्लाई चेन तथा लॉजिस्टिक्स पर पड़े अचानक दबाव को कम करना है।


