Kanwar Yatra 2026: श्रावण मास आते ही पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है। आसमान में बादल, धरती पर हरियाली और भक्तों के हृदय में भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था। इसी आस्था को लेकर इस बार भी लाखों कांवड़िए “बोल बम” के जयकारे लगाते हुए जलाभिषेक के लिए शिवालयों की ओर निकल पड़े हैं। इस बार की कावड़ यात्रा में श्रद्धा के साथ-साथ युवाओं का जोश और समर्पण भी देखने लायक है।
Kanwar Yatra 2026: हरिद्वार से शिवालयों की ओर बढ़े कांवड़िए
Kanwar Yatra 2026: भगवान भोलेनाथ की भक्ति में डूबे भक्त हरिद्वार, गौमुख, गंगोत्री सहित अन्य पवित्र स्थानों से गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों की ओर प्रस्थान कर चुके हैं। कंधों पर कांवड़, पैरों में घुंघरू और मुख पर “ॐ नमः शिवाय” का जाप – यही इस यात्रा की पहचान है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इस वर्ष की कावड़ यात्रा में सबसे खास बात युवाओं की भागीदारी है। कोई युवा अपनी बहन के सुखी जीवन और अच्छे भविष्य की कामना के लिए पैदल कांवड़ उठा रहा है, तो कोई अपनी माता-पिता को डोली में बिठाकर उन्हें कंधे पर लेकर भोले के दरबार जा रहा है। यह दृश्य यह बताता है कि आज भी हमारे समाज में सेवा और समर्पण जीवित है। कुछ कांवड़िए भगवान शिव के विभिन्न रूपों – रुद्र, नटराज, अर्धनारीश्वर – की वेशभूषा धारण कर, ढोल-नगाड़ों और भजनों के साथ यात्रा कर रहे हैं। बद्रीनाथ और केदारनाथ की तर्ज पर सजाई गई झांकियां राहगीरों का मन मोह लेती हैं।
दिल्ली-एनसीआर में दिखी आस्था की झलक
कावड़ यात्रा की सबसे पावन झलक इन दिनों नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और पूरे दिल्ली-एनसीआर में देखने को मिल रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश श्रद्धालु हरिद्वार से जल लेकर दिल्ली-एनसीआर होते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं।
जैसे ही कांवड़ियों का जत्था शहर में प्रवेश करता है, उनके पैरों के घुंघरू की छन-छन और “भोले का नारा है, बाबा एक सहारा है” की गूंज पूरे माहौल को भक्तिमय कर देती है। सड़कों के दोनों ओर खड़े लोग पुष्प वर्षा कर, जल पिलाकर और पांव धोकर इन शिवभक्तों का स्वागत कर रहे हैं।
सेवा और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
कांवड़ियों की थकान मिटाने और उनकी सेवा के लिए जगह-जगह समाजसेवी संगठनों द्वारा शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में भोजन, पानी, प्राथमिक उपचार, विश्राम और जूते-चप्पल रखने तक की व्यवस्था की गई है। सेवा का भाव लिए लोग रात-दिन भक्तों की सेवा में जुटे हैं।
यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए नोएडा पुलिस और प्रशासन भी पूरी मुस्तैदी से तैनात है। ट्रैफिक डायवर्जन, सीसीटीवी निगरानी, अतिरिक्त पुलिस बल और एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई है। महिला पुलिसकर्मी भी जगह-जगह तैनात हैं ताकि महिला कांवड़ियों को कोई असुविधा न हो।
भोलेनाथ जो सबको अपनाते हैं
कहते हैं भगवान भोलेनाथ सबसे भोले और सबसे निर्मोही हैं। उन्हें न जाति से मतलब है, न धर्म से, न ऊंच-नीच से। जिनको समाज ने ठुकरा दिया, भोलेनाथ ने उन्हें गले लगाया। शायद इसी कारण उनकी सेना में भूत-प्रेत, जीव-जंतु और समाज का हर वर्ग शामिल है। भोलेनाथ की भक्ति सबसे सरल है। एक लोटा जल और सच्चा मन – बस यही उन्हें प्रसन्न करने के लिए काफी है। इसी कारण आम इंसान से लेकर संत तक सभी उनके द्वार पर शीश झुकाते हैं।
कावड़ यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, यह तप, त्याग और आस्था का प्रतीक है। यह हमें सिखाती है कि कैसे कष्ट सहकर भी लक्ष्य की ओर बढ़ा जाता है। इस बार की यात्रा में युवाओं का उत्साह यह संकेत देता है कि हमारी संस्कृति और परंपराएं नई पीढ़ी में भी उतनी ही जीवंत हैं। जब कांवड़िया शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित कर “हर-हर महादेव” का उद्घोष करेगा, तो मानो पूरा ब्रह्मांड उसी स्वर में गूंज उठेगा।



Kanwar Yatra 2026: श्रावण मास आते ही पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है। आसमान में बादल, धरती पर हरियाली और भक्तों के हृदय में भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था। इसी आस्था को लेकर इस बार भी लाखों कांवड़िए “बोल बम” के जयकारे लगाते हुए जलाभिषेक के लिए शिवालयों की ओर निकल पड़े हैं। इस बार की कावड़ यात्रा में श्रद्धा के साथ-साथ युवाओं का जोश और समर्पण भी देखने लायक है।