watershed moment: दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण नजदीक आ रहा है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जिसे जेवर एयरपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है) का शुभारंभ 30 अक्टूबर को होने जा रहा है। यह खबर न केवल नोएडा बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए मील का पत्थर साबित होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन कर सकते हैं।
watershed moment: उत्तर प्रदेश को मिलेगा नया हवाई अड्डा
इंफोपोस्ट न्यूजडेस्क
watershed moment: यह एयरपोर्ट इस क्षेत्र को वैश्विक हवाई संपर्क का नया केंद्र बना देगा। जो एशिया का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा होगा। क्षमता शुरुआती चरण में ही 12 मिलियन यात्रियों की होगी। आने वाले वर्षों में यह 70 मिलियन तक पहुंच जाएगी, जो दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट को राहत देगा। जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट की नींव 2018 में रखी गई थी, जब उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे मंजूरी दी।
कुल 1,334 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह एयरपोर्ट जेवर, यमुना एक्सप्रेसवे के पास स्थित है, जो नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आगरा को जोड़ता है। पहले चरण में 2,100 करोड़ रुपये की लागत से दो रनवे, एक टर्मिनल और कार्गो सुविधाएं बनाई गई हैं। यह प्रोजेक्ट स्विस कंपनी क्राउन एजुकेशन एयरपोर्ट (ज्यूरिख एयरपोर्ट का मॉडल) के सहयोग से विकसित हो रहा है। पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखते हुए इसे ‘ग्रीन एयरपोर्ट’ के रूप में डिजाइन किया गया है, जहां सोलर पैनल और वाटर रीसाइक्लिंग सिस्टम प्रमुख होंगे।
नोएडा की अर्थव्यवस्था में आएगा जबरदस्त उछाल
इस एयरपोर्ट के उद्घाटन से नोएडा की अर्थव्यवस्था में जबरदस्त उछाल आएगा। नोएडा पहले से ही आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और रियल एस्टेट का हब है, लेकिन हवाई संपर्क की कमी से निवेश सीमित था। अब, अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होने से विदेशी कंपनियां यहां आकर्षित होंगी। विशेषज्ञों के अनुसार, अगले पांच वर्षों में 50,000 नई नौकरियां पैदा होंगी, जिनमें एविएशन, टूरिज्म, लॉजिस्टिक्स और हॉस्पिटैलिटी शामिल हैं।
जेवर क्षेत्र के किसानों को जमीन अधिग्रहण से मुआवजा मिला, जो अब लाखों रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच गया है। इससे स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। हालांकि, प्रोजेक्ट की राह आसान नहीं रही। 2020 में कोविड महामारी से देरी हुई, फिर भूमि विवाद और पर्यावरण मंजूरी में चुनौतियां आईं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पक्षी अभयारण्य के पास होने के कारण चिंता जताई, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों ने सख्ती से नियमों का पालन सुनिश्चित किया।
ट्रायल रन सफल होने के बाद व्यावसायिक उड़ान की उम्मीद
अब, ट्रायल रन सफल होने के बाद 30 अक्टूबर को पहली व्यावसायिक उड़ान की उम्मीद है। दिल्ली से मात्र 45 मिनट की दूरी पर यह एयरपोर्ट ट्रैफिक जाम से परेशान यात्रियों के लिए वरदान साबित होगा। नोएडा के निवासियों में उत्साह है। सेक्टर 18 के एक व्यवसायी राजेश कुमार कहते हैं, “यह हमारी उम्मीदों का विमान है। पहले दिल्ली एयरपोर्ट जाने में घंटों लगता था, अब घर से ही उड़ान मिलेगी।”
वहीं, युवा इंजीनियर प्रिया सिंह बताती हैं, “नौकरी के अवसर बढ़ेंगे, खासकर एविएशन सेक्टर में।” ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने आसपास मेट्रो कनेक्टिविटी और रोड नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 500 करोड़ का बजट आवंटित किया है। यमुना एक्सप्रेसवे पर नई सर्विस लेन और इंटरचेंज बन रहे हैं, जो एयरपोर्ट को सीधे दिल्ली से जोड़ेंगे।
प्लॉटों की कीमतें 20-30% बढ़ गईं
watershed moment: इस खबर का असर रियल एस्टेट पर भी दिख रहा है। जेवर के आसपास प्लॉटों की कीमतें 20-30% बढ़ गई हैं। डेवलपर्स जैसे गौतमबुद्ध नगर अथॉरिटी और प्राइवेट बिल्डर्स नए टाउनशिप प्लान कर रहे हैं। पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि आगरा का ताजमहल मात्र 2 घंटे की दूरी पर है। सरकार का लक्ष्य है कि यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश को ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ स्कीम से जोड़कर निर्यात बढ़ाए।
उद्योग मंत्री आशीष पटेल ने कहा, “यह प्रोजेक्ट योगी सरकार की ‘न्यू इंडिया’ विजन का प्रतीक है।”लेकिन चुनौतियां बाकी हैं। स्थानीय किसान संगठन अभी भी मुआवजे की मांग कर रहे हैं, जबकि ट्रैफिक मैनेजमेंट एक बड़ी समस्या है। प्रशासन ने 1,000 नई बसें और ई-रिक्शा सर्विस शुरू करने का प्लान बनाया है। कुल मिलाकर, जेवर एयरपोर्ट नोएडा को वैश्विक पटल पर ले जाएगा। यह न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि आर्थिक विकास की नई उड़ान भरेगा। 30 अक्टूबर को जब पहला विमान उतरेगा, तो नोएडा गर्व से चमकेगा।


