Enforcement Directorate1: भारतीय जनता पार्टी की सरकार का तोता मार दिया गया है। ईडी यानी जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय को सरकार ने अपना अमोघ हथियार बना लिया था। और इसी का इस्तेमाल करके विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया जा रहा था। अब उस राक्षस की कहानी खत्म हो चुकी है जिसकी जान तोते में बसती थी। क्योंकि उस तोते को मार दिया गया है और अब राक्षस भी मरने वाला है।
Enforcement Directorate1: आरोपी के बयान को अब नहीं माना जाएगा सबूत
इंफोपोस्ट डेस्क
Enforcement Directorate1: सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले की बड़ी चर्चा है। जिसके अनुसार ईडी की हिरासत में जो भी आरोपी गवाही देगा, उसे सबूत नहीं माना जाएगा। पुलिस की हिरासत में भी जो गवाही देगा, उसे अदालती सबूत नहीं माना जाएगा। इससे पहले किसी भी गवाह पर दबाव बना कर उससे विपक्ष के नेताओं के खिलाफ बयान दिला दिया जाता था। और उसी बयान के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता था। मिसाल के तौर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और के कविता। यानी कि हिरासत में आरोपियों ने गवाह के तौर पर जो बयान दिए, उसी के आधार पर इन बड़े बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।
यहां सेक्शन 50 पर गौर करना जरूरी है। कोई भी बयान जो धारा 50 में दिया गया हो, वह अदालत में सबूत के तौर पर नहीं माना जाएगा। पीएमएलए यानी प्रिवेंशन आफ मनी लांड्रिंग ऐक्ट के अंतर्गत जिसे भी गिरफ्तार किया जाता था, वह जो भी गवाही देता था उसी के आधार पर विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया जाता था।
इस संदर्भ में तेलगू देशम पार्टी के नेता मागुंटा रेड्डी और उनके बेटे राघव रेड्डी का जिक्र करना जरूरी है। राघव रेड्डी को 11 फरवरी 2023 को गिरफ्तार किया जाता है। वह सीबीआई और ईडी दोनों की हिरासत में होते हैं। और फिर ये गवाहियां देते हैं। उनकी गवाहियों के आधार पर अरविंद केजरीवाल और के कविता को गिरफ्तार कर लिया जाता है। लेकिन जिस व्यक्ति राघव रेड्डी को ईडी और सीबीआई ने आरोपी बनाया था, उसे रिहा कर दिया जाता है। अब वह आरोपियों की लिस्ट में नहीं है। आरोपियों की लिस्ट में अरविंद केजरीवाल और के कविता हैं। राघव रेड्डी को जांच से पहले ही दोषमुक्त कर दिया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट की निगहबानी में हो रहा था यह सब
यह सब सुप्रीम कोर्ट की निगहबानी में हो रहा था। दिलचस्प यह है कि अरविंद केजरीवाल को ईडी के मामले में जमानत मिल चुकी है। लेकिन के कविता जेल से रिहा हो चुकी हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट की नजर थी कि राघव रेड्डी को आरोपी नहीं बना रही थी ईडी मगर उनकी गवाही पर अरविंद केजरीवाल और के कविता को गिरफ्तार किया जाता है। और इसकी पोल खोल अरविंद केजरीवाल ने अदालत में की थी मगर उनकी बात को अनसुना कर दिया गया था।
केजरीवाल ने एक अदालत में कहा था कि मागुंटा रेड्डी ने अपना बयान तब बदल दिया था जब उनके बेटे को पांच महीने तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने अपना बयान बदला 16 जुलाई 2023 को और राघव रेड्डी को 18 जुलाई 2023 को रिहा कर दिया गया। इन तारीखों का खेल और भी ज्यादा दिलचस्प है। भारतीय जनता पार्टी इसकी पिछले साल से ही प्लानिंग कर रही थी।
Details :
“We have no hesitation in holding that when an accused is under custody under PMLA, irrespective of the case of which he is under custody, any statement under Section 50 to the same investigating agency is inadmissible against the maker”https://t.co/VBNfd1PjET
— Live Law (@LiveLawIndia) August 28, 2024
दबाव की राजनीति का एक और खेल समझने लायक है। आंगोले, आंध्र प्रदेश से सांसद मागुंटा रेड्डी ने 28 फरवरी 2024 को वाईएसआर कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। और उन्होंने टीडीपी यानी तेलगू देशम पार्टी में चले जाते हैं। यह पार्टी भाजपा की सहयोगी है जहां से मागुंटा रेड्डी को टिकट मिल जाता है। जाहिर है कि राघव रेड्डी को इसलिए भी गिरफ्तार किया गया था, ताकि मागुंटा रेड्डी वाईएसआर कांग्रेस से निकल कर भाजपा के खेमे में शामिल हो जाएं।
चंद्र बाबू नायडू के भी कुछ ऐसे राज हैं जो भाजपा के पास!
Enforcement Directorate1: अगर यह सब न हुआ होता तो क्या तेलगू देशम पार्टी को लोकसभा चुनाव में इतनी सीटें मिलतीं? तेलगू देशम सुप्रीमो चंद्र बाबू नायडू की पार्टी को अपने पिछले कार्यकाल में भाजपा ने राज्य सभा में तोड़ दिया था। बावजूद इसके, चंद्र बाबू नायडू भाजपा की गोद में जाकर बैठ जाते हैं। यानी चंद्र बाबू नायडू के भी कुछ ऐसे राज हैं जो भाजपा के पास हैं। इस प्रकार सारा खेल ब्लैकमेल का दिखाई दे रहा है।
हालत यह है कि प्रक्रिया ही सजा बन गई है। दबाव बनाओ और डराओ की राजनीति की जा रही है। क्योंकि लोग कई सालों से जेल में हैं। उनके खिलाफ चार्जशीट तक दाखिल नहीं होती है। मगर उन्हें जेल में डाल दिया जाता है। अब ये जो सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है, उसके अनुसार धारा 50 के तहत आरोपी की गवाही को अदालतों में सबूत नहीं माना जाएगा। इसका मतलब अब आगे से अरविंद केजरीवाल और के कविता जैसे लोग गिरफ्तार नहीं किए जा सकेंगे।


