Skip to content
Primary Menu
  • Home
  • ख़ास ख़बर
  • आलेख
    • सत्ता की सियासत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • दिल्ली एनसीआर
  • राज्यों से …
  • कारोबार
  • साहित्य
  • संस्कार
  • तकनीक
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • खेल
Logo300

INFOPOST NEWS

The power of information

September 8, 2026

Connect with Us

  • Home
  • ख़ास ख़बर
  • आलेख
    • सत्ता की सियासत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • दिल्ली एनसीआर
  • राज्यों से …
  • कारोबार
  • साहित्य
  • संस्कार
  • तकनीक
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • खेल

Categories

  • INFOPOST PDF
  • sports
  • Uncategorized
  • अंतरराष्ट्रीय
  • आलेख
  • कारोबार
  • ख़ास ख़बर
  • तकनीक
  • दिल्ली एनसीआर
  • बोलती तस्वीरें
  • मनोरंजन
  • राज्यों से …
  • राष्ट्रीय
  • शिक्षा
  • सत्ता की सियासत
  • संस्कार
  • साहित्य
  • स्वास्थ्य
An error has occurred, which probably means the feed is down. Try again later.

  • ख़ास ख़बर
  • सत्ता की सियासत

Preparation to remove Modi: आरएसएस ने छोड़ा मोदी का साथ!

infopost May 23, 2024
Preparation to remove Modi

Preparation to remove Modi: क्या चुनाव के बीच आरएसएस और बीजेपी के रिश्तों में तल्खी आ रही है? कुछ पत्रकार तो यहां तक कह रहे हैं कि आरएसएस चीफ मोहन भागवत और पीएम मोदी के बीच बोलचाल तक बंद है। और आरएसएस ने लोकसभा चुनाव से हाथ खींच लिया है। आरएसएस के तमाम बड़े पदाधिकारी मोदी की डिक्टेटरशिप से नाराज हैं। ऐसे में क्या मोदी को मार्गदर्शक मंडल की ओर रवाना कर देने की तैयारी चल रही है?

Preparation to remove Modi: अब और तानाशाही बर्दाश्त नहीं करेगा संघ!

इंफोपोस्ट डेस्क

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

infopost.org@gmail.com


Preparation to remove Modi: आरएसएस में चर्चा है कि लोकसभा चुनाव 2024 में यदि मोदी बहुमत से कम यानी 272 से कम सीटें लाते हैं तो उन्हें रिप्लेस किया जा सकता है। और उनकी जगह कोई दूसरा प्रधानमंत्री बन सकता है। संभावना जताई जा रही है कि मोहन भागवत अपने खास नितिन गडकरी को देश का नया प्रधानमंत्री बनवा सकते हैं। यह अलग बात है कि इस तरह के भी दावे किए जा रहे हैं कि आरएसएस राजनीति के क्षेत्र में कोई हस्तक्षेप नहीं करता।

अब सवाल यह है कि चुनाव के छठे और सातवें चरण पर इस तल्खी का क्या असर पड़ने जा रहा है? लेकिन उससे पहले जान लीजिए कि यह तल्खी कब और कहां से शुरू हुई? भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक अखबार से कहा कि इस चुनाव में बीजेपी आरएसएस की कोई मदद नहीं ले रही है। यह खबर अखबार ने अपने 17 मई के अंक में प्रकाशित किया था। Clip

नड्डा की स्क्रिप्ट गुजरात लॉबी ने तैयार की थी!

नड्डा के बयान का मतलब यह लगाया गया कि बीजेपी इतनी सक्षम हो चुकी है कि उसे अब आरएसएस से मदद लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। तभी तो आरएसएस के कार्यकर्ता और नेता मोदी और उनकी भाजपा से भयंकर नाराज हो चुके हैं। अंदर की खबर यह है कि नड्डा अकेले ऐसा नहीं कह सकते थे। उन्होंने जो कुछ भी कहा, उसकी स्क्रिप्ट गुजरात लॉबी ने तैयार की थी। इसलिए नड्डा के बयान से यह साफ हो चुका है कि मोदी और भागवत के बीच बड़ी खटपट है।

उद्धव ठाकरे ने तो इस पर कटाक्ष भी कर दिया है और कहा है कि लगता है कि मोदी ही आरएसएस को बैन कर देंगे। उन्होंने कहा है कि मोदी जी कभी भी आरएसएस को नकली घोषित कर सकते हैं। इसलिए आरएसएस संगठन पर इस समय सबसे बड़ा खतरा है। लेकिन इस पर राजनाथ सिंह ने कहा है कि बीजेपी हमेशा अकेले चुनाव लड़ती आई है और आरएसएस ने कभी भी हस्तक्षेप नहीं किया। फिर भी जो दिख रहा है, उसमें बगावत का धुआं साफ नजर आ रहा है।

भाजपा में एक बहुत बड़ी लॉबी नितिन गडकरी के साथ

Preparation to remove Modi: दरअसल, भाजपा में एक बहुत बड़ी लॉबी है जो नितिन गडकरी को दिल से चाहती है। इस लॉबी के सदस्यों की एक लंबी सूची है। नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुलाकात से कयास लगाए जा रहे हैं कि योगी जी भी लॉबी के खास सदस्य हैं। सूची में शिवराज सिंह, वसुंधरा राजे, रमन सिंह, राजीव प्रताप रूड़ी, मुख्तार अब्बास नकवी आदि को शामिल बताया जा रहा है। यूपी में तो आप जानते ही हैं कि योगी और शाह में किस कदर तलवारें खिंची हुई हैं।

yogi nitin

फिर वही सवाल। यदि 272 सीटों से नीचे मोदी जी का विजय रथ फंस जाता है तो क्या इस रथ का घोड़ा बदल दिया जाएगा? वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अशोक वानखेड़े का कहना है कि खटपट तो दूर की बात, मोदी और भागवत में कोई संवाद नहीं है। यूट्यूब पर ऐसे वीडियो की कमी नहीं है, जिनमें मोहन भागवत के भाषण में मोदी के लिए तमाम नसीहतें होती हैं। वरिष्ठ पत्रकार केपी मलिक ने तो यहां तक कह दिया कि मोदी और भागवत में सात साल पहले ही तब बोल चाल बंद हो गई थी जब भागवत ने एक लंच के मौके पर मोदी से गडकरी को सपोर्ट करने का आग्रह किया था। उस समय मोदी की टिप्पणी से नाराज होकर भागवत लंच छोड़ कर चले गए थे।

भागवत के पिता और नरेंद्र मोदी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस का छठा सरसंघचालक बनने से पहले लो प्रोफाइल रहे मोहन भागवत को संघ की विचारधारा विरासत में मिली थी। उनका जन्म 11 सितंबर, 1950 को महाराष्ट्र के सांगली जिले में एक कट्टर आरएसएस परिवार में हुआ था। भागवत के दादा नानासाहेब संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के सहयोगी थे। पिता मधुकरराव गुजरात में प्रचारक थे और मां मालती आरएसएस की महिला शाखा यानी राष्ट्रसेविका समिति की सदस्य थीं। कुल मिलाकर मोहन भागवत आरएसएस के अभिजात वर्ग से आते हैं।

भागवत के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वह टकराव के बजाय लोगों का मन जीतने के लिए जाने जाते हैं। उन्हें यह गुण विरासत में मिला है। गुजरात का प्रचारक रहने के दौरान मोहन भागवत के पिता मधुकर राव भागवत ने ही संघ के भीतर नरेंद्र मोदी को प्रशिक्षित किया था। नरेंद्र मोदी ने अपनी किताब ज्योतिपुंज में बताया है कि वह 20 वर्ष की उम्र में मधुकर राव भागवत से मिले थे और आरएसएस प्रशिक्षण के तीसरे वर्ष में नागपुर में एक महीने तक उनके साथ भी रहे थे।

नरेंद्र मोदी की किताब ज्योतिपुंज में भागवत के पिता का जिक्र

Preparation to remove Modi:  नरेंद्र मोदी अपनी किताब में भागवत के पिता के बारे में लिखते हैं, “उनके पहनावे में मराठी-गुजराती संस्कृतियों का मिश्रण था। वह गुजराती शैली की गांधी धोती और उसके ऊपर विदर्भ की सिंगलेट पहनते थे। उनके हाथ में हमेशा पान का डिब्बा रहता था। जिन लोगों से हम मिलते हैं उनमें से कुछ हम पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं। लेकिन मधुकररावजी तो ऐसे घुल मिल जाते थे जैसे दूध में चीनी।”

मोदी लिखते हैं कि लाल कृष्ण आडवाणी को भी मधुकर राव भागवत ने ही प्रशिक्षित किया था, “1943-44 में आरएसएस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उन्हें उत्तर भारत और सिंध (आज का पाकिस्तान) के सभी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने का काम सौंपा। लाल कृष्ण आडवाणी जैसे कई स्वयंसेवकों ने इस काल में मधुकरराव के सानिध्य में शिक्षा प्राप्त की।” मधुकर राव से प्रेरित होने की बात स्वीकार करते हुए मोदी लिखते हैं, “वह संघ परंपरा की जीवंत पाठशाला की तरह थे। वह राष्ट्र-निर्माण की राह पर चलने वाले एक महान यात्री थे। उनके पदचिन्हों ने कई लोगों को प्रेरित किया है, और मैं भी उनमें से एक हूं।”

मोदी और भागवत का जन्म छह दिन के अंतर पर

नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत दोनों का जन्म छह दिन के अंतर पर सितंबर 1950 में हुआ था। दोनों संघ में प्रचारक रहे। ऐसा माना जाता है कि खुद मोहन भागवत ने ही प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी का नाम आगे किया था। दरअसल, सरसंघचालक बनने के बाद भागवत ने ही 75 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित की थी। द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आडवाणी को बताया गया कि 2009 का आम चुनाव सत्ता के लिए उनका आखिरी मौका होगा। हार के बाद आडवाणी को साइड कर दिया गया।

नरेंद्र मोदी ने अपनी किताब में मोहन भागवत की तारीफ करते हुए उन्हें पारसमणि बताया है। वह लिखते हैं, “मधुकरराव स्वयं प्रचारक थे और फिर उन्होंने अपने बेटे मोहनराव भागवत को भी प्रचारक के रूप में देश के आगे किया (वे आज सरसंघचालक हैं)। पारसमणि का स्पर्श लोहे को सोने में बदल देता है। लेकिन कोई पारसमणि लोहे के टुकड़े को दूसरे पारसमणि में नहीं बदल सकता। मधुकरराव और मोहनराव की कहानी इसे पलट देती है। पारसमणि मधुकरराव ने पारसमणि मोहनराव को तैयार किया।”

पशुचिकित्सक की नौकरी छोड़ प्रचारक बने थे मोहन भागवत

चार भाई-बहनों में सबसे बड़े मोहन ने बचपन में ही अपना जीवन आरएसएस को समर्पित करने का फैसला कर लिया था। चंद्रपुर गांव में बतौर पशुचिकित्सक छह महीने काम करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और जिला आरएसएस प्रचारक बनने के लिए अकोला चले गए। बाद में उन्होंने विदर्भ और फिर बिहार में भी संघ के लिए काम किया। संघ के भीतर वह तेजी से आगे बढ़े। 2000 में वह आरएसएस के सरकार्यवाह (महासचिव) बन गए थे।

2004 में भाजपा को मिली चुनावी हार के बाद संघ को ‘बुजुर्गों का संगठन’ कहा जाने लगा था। भाजपा के शासनकाल (1999-2004) में संघ परिवार के भीतर कलह देखी गई। आरएसएस के पूर्व स्वयंसेवक दिलीप देवधर का दावा है कि “2004 में भाजपा की हार सुदर्शन-दत्तोपंत ठेंगड़ी समूह और वाजपेयी समूह के बीच आंतरिक टकराव के कारण हुई थी।” 2009 में संघ के भीतर बदलाव करने का फैसला किया गया।

भागवत ऐसे बने संघ प्रमुख

Preparation to remove Modi:  मार्च 2009 में जब संघ के पदाधिकारी सरकार्यवाह के चुनाव के लिए नागपुर में जुटे तो बतौर सरकार्यवाह भागवत ने तीन-तीन साल का तीन कार्यकाल पूरा कर लिया था। द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आरएसएस विचारक एमजी वैद्य को चुनाव प्रबंधक बनाया गया था। वैद्य, सरकार्यवाह के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने वाले थे, तभी उन्हें तत्कालीन सरसंघचालक केएस सुदर्शन ने रोक दिया। उन्होंने वैद्य को अपनी खराब तबीयत के बारे में बताया, फिर सरसंघचालक पद के लिए मोहन भागवत का नाम प्रस्तावित कर दिया।

तब भागवत 59 वर्ष के थे। आरएसएस के मानकों के अनुसार वह इस शीर्ष पद के लिए युवा थे। बाहरी दुनिया संघ के फैसले से भले ही आश्चर्यचकित हुई हो। लेकिन अंदरूनी लोग जानते हैं कि संघ ने ‘पीढ़ीगत बदलाव’ की सावधानीपूर्वक योजना बनाई थी। निकटता के बावजूद मोदी और भागवत में खटपट की बातें आश्चर्यजनक नहीं हैं। क्योंकि मोदी अपनी महत्वाकांक्षा के लिए किसी को भी रास्ते से हटाने में गुरेज नहीं करते। आपको क्या लगता है, कमेंट करके जरूर बताएं।

About Author

infopost

administrator

See author's posts

Post navigation

Previous: LS Polls 2024: नड्डा-खरगे को चुनाव आयोग ने भेजा नोटिस
Next: Kedarnath Dham: हेलिकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग, बाल-बाल बचे तीर्थयात्री

Related Stories

NMC
  • ख़ास ख़बर
  • दिल्ली एनसीआर

NMC: जन्मदिन पर ‘जेपी’ सिंह का सम्मान

infopost September 7, 2026 0
Social Politics
  • ख़ास ख़बर
  • दिल्ली एनसीआर

Social Politics: नोएडा के युवा नेताओं में तेजी से उभरता नाम संदीप अवाना

infopost September 5, 2026 0
Ram Mandir Trust Controversy
  • ख़ास ख़बर
  • राष्ट्रीय

Ram Mandir Trust Controversy: राम मंदिर ट्रस्ट पर उठे सवाल

infopost June 27, 2026

Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.