ओम वर्मा, मोतिहारी। Chandra grahan :
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इस साल का अंतिम चंद्रग्रहण शनिवार को लगने वाला है। जो कई बदलाव लेकर आएगा।
यह चंद्र ग्रहण मेष राशि में लगेगा। यह चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। इसका असर देश दुनिया और मानव जीवन पर पड़ेगा। इस बारे में मोतिहारी में विद्वान धर्मेंद्र कुमार मिश्रा से हमारे विशेष संवाददाता सतेंद्र कुमार वर्मा ने बात की। धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि सूर्य और चंद्रमा के बीचोबीच जब पृथ्वी आती है तो पृथ्वी के आने के बाद की जो छाया जब चंद्रमा पर पड़ती है तो चंद्रग्रहण लगता है। उस छाया से चंद्रमा का प्रतिबिंब लाल हो जाता है। पंचाग के हिसाब से यह पूर्णिमा की रात्रि है। साथ ही इस दिन शरद पूर्णिमा भी है। यह ग्रहण 28 तारीख और 29 तारीख की मध्यरात्रि 1 बजकर 5 मिनट से 2 बजकर 35 मिनट तक लगेगा।
नौ घंटे पहले लगेगा सूतक
Chandra grahan : चंद्रग्रहण की अवधि से नौ घंटे पहले यानी 28 अक्टूबर को शाम 4 बजे लग जाएगा। सूतक अवधि से ग्रहण के काल तक जितना हो सके उतना मंत्र का जाप कर सकते हैं। मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। साधना करने वाले लोगों को इस काल में अपने ईष्ट की आराधना करनी चाहिए। इससे बहुत लाभ मिलता है। यूं कह सकते हैं कि ऐसा करने से जप करने जैसा फल की प्राप्ति होगी। यह सिद्धि देने वाला काल होता है।

विषम राशि के लोग ग्रहण से दूर रहें
Chandra grahan : धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि सभी 12 राशियों में से कुछ राशियां सम तो कुछ विषम की राशियां होती हैं। मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुंभ राशि को विषम में गिना जाता है। इन राशि के जातकों को इस खगोलिए घटना से दूर रहना चाहिए। ऐसा न करने पर उन्हें नुकसान हो सकता है। वृष, कर्क, कन्या, वृषिचक को सम राशि में गिना जाता है। इन राशि के जातकों के लिए यह चंद्रग्रहण शुभ है। ये जातक ग्रहण देख सकत हैं। इसके लिए उन्हें घर के बाहर निकलना होगा।
यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा देगा। इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, नॉर्थ अमेरिका, उत्तर व पूर्व दक्षिण अमेरिका, अर्टाटिका में भी दिखेगा।


